राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

सरकार की कथनी-करनी में फर्क

सरकार की कथनी-करनी में फर्क

27 कीटनाशकों पर प्रतिबंध का प्रस्ताव

क्या मेक इन इंडिया सिर्फ नारा ही है ?- मोदीजी

  • सुनील गंगराड़े

सरकार की कथनी-करनी में फर्क – ये बात ना प्रधानमंत्री मोदी समझना चाह रहे हैं, ना उनकी टीम। मेक इन इंडिया या मेक फॉर फॉरेन -ये सारे जुमले लगता है दिल्ली में प्रधानमंत्री निवास से निकल कर उनके मंत्रियों तक भी नहीं पहुँच पाते हैं। हम कोरोना को मारने के लिए पी पी किट विदेश से मँगा रहे हैं, टिड्डी मारने के लिए स्प्रेयर ब्रिटेन से आ रहे हैं। भारत के उद्योग, यहाँ की फ़ैक्ट्री, लगे कारख़ाने क्या लॉकडाउन के बाद भी बंद रहेंगे, या उनकी तालाबंदी की सुनियोजित साजि़श है। सरकार की कथनी और करनी में विरोधाभास की यह उत्कृष्ट मिसाल है। ये बात हम मेक इन इंडिया की कर रहे हैं।

27 कीटनाशकों के निर्माण पर सरकार नेे प्रतिबंध के लिए मसौदा अध्यादेश जारी कर दिया हैं और 45 दिनों के बाद उसको पूरी तरह से बंद करने का अध्यादेश निकाल देंगे और उन कीटनाशकों के विकल्प जो उपलब्ध होंगे, वे किसानों के लिए चौगुने भाव पर मिलेंगे तो खेती की लागत अपने आप बढ़ेगी और आमदनी किसान की वहीं की वहीं रह जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के इस क़दम का स्वयं भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के सचिव ने भी विरोध किया है ।

श्री आर.के. चतुर्वेदी सचिव रसायन एंव उर्वरक मंत्रालय ने भारत सरकार के कृषि सचिव श्री संजय अग्रवाल को प्रेषित पत्र में कोविड -19 महामारी में सभी उद्योगों की बदहाली का जि़क्र करते हुए देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सुविचारित क्षेत्रवार रणनीति बनाने की अवाश्यकता बताई । साथ ही वर्तमान में टिड्डी हमले को झेल रहे किसानों के इस मुसीबत भरे दौर में कृषि मंत्रालय का यह क़दम असामयिक निरूपित किया है। कृषि मंत्रालय को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर सुलझे हुए वरिष्ठ जन प्रतिनिधि हैं ,विश्वास है इस विषय पर वे चिंतन करेंगे और आवश्यक क़दम उठाएँगे ।

इस प्रतिबंध के विरोध में भारत सरकार की कंपनी हिंदुस्तान इनसेक्टिसाईडस इंडिया लिमिटेड और उद्योग से जुड़े अन्य संगठन क्करूस्न्रढ्ढ , स्नढ्ढष्टष्टढ्ढ , ष्ट॥श्वरूश्वङ्गष्टढ्ढरु सभी ने अपना विरोध दर्ज कराया है । भारतीय कीटनाशक उद्योग में इन 27 जेनरिक कीटनाशकों की लगभग 40 प्रतिशत की भागीदारी है। प्रतिबंध लगने से पूरा उद्योग जगत प्रभावित होगा, इसके साथ ही ये कीटनाशक अमेरिका और चाइना को भी निर्यात होते थे।

Advertisement
Advertisement

इंडस्ट्री में इस बात पर भी हैरत जतायी जा रही है कि मसौदा आदेश में यह उल्लेख है कि इन 27 कीटनाशकों का डाटा अपूर्ण है जबकि सेंट्रल इंसेक्टीसाईडस् बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी की धारा 9 (3) के अनुसार डिटेल जानकारी पूर्ण होने पर ही पेस्टीसाइड का रजिस्ट्रेशन किया जाता है जिसमें कीटनाशकों की बायो एफिकेसी ,टॉक्सिसिटी, रेसीडयू आदि का विवरण होता है। इनमें से अधिकांश केमिकल गत 40 वर्षों से भारतीय किसान फसलों में उपयोग कर रहे हंै। इन प्रस्तावित प्रतिबंधित कीटनाशकों का व्यापार 4 से 5 हजार करोड़ रुपए का है जिसमें 500 से 1000 करोड़ रुपए का एक्स्पोर्ट भी शामिल है।

Advertisement
Advertisement

पाकिस्तान से टिड्डी, ब्रिटेन से स्प्रेयर, भारतीय उद्योग पर क्या कृषि मंत्री जी तालाबंदी?

भारतीय कीटनाशक सस्ते होने के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों के महंगे कीटनाशकों का बाज़ार सीमित है। यह तय है कि इन प्रस्तावित प्रतिबंधित कीटनाशकों के विकल्प तिगुने चौगुने दामों पर मिलेंगे तो किसानों की खेती की लागत बढ़ जाएगी । उद्योग से जुड़े प्रेक्षकों के मुताबिक़ आमदनी दोगुना होने के बजाय किसान की गाँठ से रक़म निकल जाएगी । भारत को आत्मनिर्भर बनाने के सपने देखने की दिशा में हम भारत के उद्योगों को ही क्यों पराधीन करने का प्रयास कर रहे हैं।

किसानों का गेहूं मंडी में गीला हो जाता है, प्याज़ गोदाम में सड़ जाती है, प्रसंस्करण सुविधा ना होने पर टमाटर खेतों में खऱाब हो जाता है। हमारे पास कृषि उपज के भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं ,कोल्ड स्टोरेज नहीं ,परिवहन का पर्याप्त इंतज़ाम नहीं। खेती में निवेश हमने धेले भर का नहीं किया और 70 प्रतिशत देश की आबादी उसी पर निर्भर है। जीडीपी में कृषि की घटती भागीदारी पर हम ज़रूर चिंता करते हैं ।

Advertisements
Advertisement
Advertisement

हम कोविड- 19 को हराने के लिए दिए लगाते हैं, कोरोना मारने के लिए ताली पीटते हैं, टिड्डियों को भगाने के लिए थाली पीटते हैं और जब ये सब चीज़ें नाकाम हो जाती तो हम स्यापा करने के लिए छाती पीटते रह जाते हैं। सरकार, कुछ ठोस करिए ,कुछ हवाई योजनाओं को ज़मीन पर तो उतारिए ,योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुँचे इसकी कार्यनीति मज़बूत हो तो ही भारत आत्मनिर्भर बनेगा और ये केवल टीवी पर मुट्ठी भींचकर नहीं हो सकता , ये तय है ।

Advertisements
Advertisement
Advertisement