राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पेस्टीसाइड मैनेजमेंट बिल 2025 पर क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया ने सरकार को सौंपे सुझाव और आपत्तियाँ

18 फरवरी 2026, नई दिल्ली: पेस्टीसाइड मैनेजमेंट बिल 2025 पर क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया ने सरकार को सौंपे सुझाव और आपत्तियाँ – क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (CCFI) ने प्रस्तावित पेस्टीसाइड मैनेजमेंट बिल (PMB) 2025 पर अपनी आपत्तियाँ और सुझाव भारत सरकार को सौंप दिए हैं। यह प्रस्तुति 4 फरवरी 2026 को विभिन्न हितधारकों से हुई चर्चाओं के बाद दी गई, जिसका उद्देश्य स्वदेशी निर्माताओं के हितों की रक्षा करते हुए एक संतुलित नियामक ढांचा सुनिश्चित करना है।

CCFI ने बिल के मसौदे को तैयार करने में सरकार द्वारा अपनाई गई परामर्श प्रक्रिया की सराहना की और कुछ प्रावधानों का स्वागत किया।

श्री दीपक शाह, अध्यक्ष, सीसीएफआई

CCFI के चेयरमैन श्री दीपक शाह ने कहा, “स्वदेशी निर्माताओं के हित में डेटा प्रोटेक्शन या डेटा एक्सक्लूसिविटी को शामिल न करना एक बहुत ही विवेकपूर्ण निर्णय है। इसी तरह प्राइस कंट्रोल से संबंधित प्रावधान को हटाना घरेलू बाजार में उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। हम वैश्विक स्तर पर एग्रोकेमिकल्स के मैन्युफैक्चरिंग और आरएंडडी इनोवेशन हब के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

हालांकि, संगठन ने बिल के कुछ प्रावधानों पर गंभीर चिंताएँ भी जताई हैं, जिन्हें अंतिम रूप देने से पहले पुनर्विचार की आवश्यकता बताई गई है।

CCFI ने कहा कि मिसब्रांडिंग से जुड़े मामलों में कंपनी के निदेशकों को स्वतः आरोपी बनाए जाने से संबंधित उद्योग की मांग को अब तक संबोधित नहीं किया गया है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों को कीटनाशकों की बिक्री को एक वर्ष तक प्रतिबंधित या रोकने की व्यापक शक्तियाँ दिए जाने पर भी चिंता जताई गई है। संगठन का मानना है कि ऐसी शक्तियों के साथ स्पष्ट जवाबदेही तंत्र होना चाहिए।

फेडरेशन ने यह भी कहा कि कुछ अपराधों के लिए निर्धारित जुर्माने और दंड अत्यधिक हैं, जिन्हें तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है। एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि भारत में प्रतिबंधित उत्पादों की उन देशों में भी बिक्री या वितरण पर रोक का प्रावधान है, जहाँ उनकी मांग और अनुमति मौजूद है। इससे भारत के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

CCFI ने यह भी रेखांकित किया कि बिल में नए केमिकल एंटिटी (NCE) के अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। संगठन के अनुसार, यह Make in India और आत्मनिर्भर भारत जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं है, जबकि भारत के पास मजबूत विनिर्माण क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध है।

तकनीकी प्रगति का उल्लेख करते हुए श्री शाह ने कहा,
“एआई आधारित कृषि समाधानों के लोकतंत्रीकरण ने भारत में परिवर्तनकारी परिणाम दिए हैं। इंडिया एआई मिशन इन तकनीकों को देश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमें ऐसे स्वदेशी समाधानों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो कम बैंडविड्थ और बहुभाषीय वातावरण में काम कर सकें, ताकि हर किसान को वैश्विक एग्री-बिजनेस जैसी सुविधाएँ मिल सकें।”

CCFI ने अपनी सिफारिशों में यह भी प्रस्ताव रखा है कि PMB 2025 में ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कीटनाशकों की बिक्री के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा शामिल किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इसके लिए विशेष प्रावधान नहीं किए गए, तो बिना पर्याप्त निगरानी के ऑनलाइन बिक्री बढ़ सकती है, जिससे अनधिकृत विक्रेताओं और अपंजीकृत या प्रतिबंधित उत्पादों के बाजार में आने का खतरा रहेगा।

इस संदर्भ में CCFI ने सुझाव दिया है कि ऑनलाइन बिक्री करने वाली संस्थाओं के लिए कड़े लाइसेंसिंग मानदंड तय किए जाएँ, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट हों, जहाँ आवश्यक हो वहाँ खरीदार की पात्रता का सत्यापन किया जाए, सभी ऑनलाइन लेनदेन का रिकॉर्ड रखा जाए और ई-कॉमर्स से संबंधित आवश्यक परिभाषाएँ बिल में जोड़ी जाएँ।

CCFI ने सरकार से इन सुझावों पर तार्किक रूप से विचार करने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि संतुलित और नवाचार-समर्थक नीति ढांचा न केवल किसानों और कृषि समुदाय के हित में होगा, बल्कि भारत को वैश्विक एग्रोकेमिकल विनिर्माण और अनुसंधान केंद्र के रूप में मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध होगा।

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