केंद्र सरकार ने पीएम-किसान योजना को 2030-31 तक बढ़ाया, 3.15 लाख करोड़ रुपये मंजूर
11 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पीएम-किसान योजना को 2030-31 तक बढ़ाया, 3.15 लाख करोड़ रुपये मंजूर – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी पीएम-किसान योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन स्वीकृत किया है।
इस फैसले से देश भर के करोड़ों भूमिधारक किसान परिवारों को अगले पांच वर्षों तक सीधी नकद सहायता मिलती रहेगी। योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई थी, जिसके तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जाते हैं। यह राशि आधार सत्यापन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी प्रणाली के जरिए दी जाती है।
हर किस्त के तहत किसान के खाते में आम तौर पर 2,000 रुपये जमा होते हैं, और यह प्रक्रिया साल में तीन बार दोहराई जाती है। सरकार का कहना है कि आधार से जुड़ी डिजिटल पहचान और सीधे बैंक खाते में भुगतान की यह व्यवस्था बिचौलियों की भूमिका खत्म करती है और तय समय पर सही किसान तक पैसा पहुंचाती है। राज्य सरकारों के जरिए लाभार्थियों की सूची का सत्यापन पहले की तरह आगे भी जारी रहेगा, ताकि अपात्र लोगों को योजना से बाहर रखा जा सके।
23 किस्तों में साढ़े चार लाख करोड़ रुपये का हस्तांतरण
अब तक इस योजना के तहत 23 किस्तों में किसानों के खातों में कुल 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे भेजे जा चुके हैं। पिछली यानी 23वीं किस्त में 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला था, जिसके तहत 18,984 करोड़ रुपये से ज्यादा जारी किए गए थे।
कोविड-19 महामारी के दौर में भी इस योजना से किसानों को 1.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली, जब खेती से जुड़ी बाकी आमदनी पर असर पड़ा था। महिला किसानों को इस योजना से अब तक 1.06 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मिल चुके हैं, और लाभार्थियों में लगभग हर चौथी किसान महिला है।
नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय के आकलन के मुताबिक, 92 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने यह राशि खेती के कामों में ही लगाई। करीब 85 प्रतिशत किसानों ने माना कि इससे उनकी खेती से होने वाली आमदनी बेहतर हुई है और साहूकारों या अनौपचारिक कर्ज पर उनकी निर्भरता घटी है।
उत्पादन और उत्पादकता में भी बढ़त
सरकार के मुताबिक वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच देश में खेती का रकबा लगभग 9.65 प्रतिशत, उत्पादकता करीब 10.53 प्रतिशत और कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 21.18 प्रतिशत बढ़ा है। सरकार इस बढ़त का एक कारण पीएम-किसान जैसी योजनाओं से किसानों को मिली आर्थिक राहत को भी मानती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी सरकार देश के किसानों के सशक्तिकरण और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है, और योजना के इस विस्तार से अन्नदाताओं को बीज, खाद और खेती की अन्य जरूरतों में मदद मिलेगी।
पीएम-किसान की अगली यानी 24वीं किस्त अभी किसानों को जारी नहीं हुई है, लेकिन मंत्रिमंडल के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि योजना अगले पांच वर्षों तक चलती रहेगी। कृषि मंत्रालय के मुताबिक पंजीकृत किसान अपने खाते की स्थिति पीएम-किसान के पोर्टल और मोबाइल ऐप पर खुद देख सकते हैं, और ई-केवाईसी पूरी न होने पर किस्त रुक सकती है।
इस विस्तार से यह भी तय हो गया है कि आने वाले वर्षों के बजट में भी पीएम-किसान के लिए अलग से बड़ी राशि आवंटित की जाती रहेगी, जिससे योजना की निरंतरता को लेकर किसानों के मन में कोई अनिश्चितता नहीं रहेगी। खेती से जुड़े जानकारों का मानना है कि बीज, खाद, सिंचाई और छोटे कृषि उपकरणों पर होने वाले शुरुआती खर्च में यह राशि छोटे और सीमांत किसानों के लिए खासतौर पर सहायक साबित होती है, क्योंकि बुवाई के मौसम में अक्सर नकदी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
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