गांवों तक पहुंची एआई तकनीक, ग्राम पंचायत बैठकों का बनने लगा डिजिटल सार
19 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: गांवों तक पहुंची एआई तकनीक, ग्राम पंचायत बैठकों का बनने लगा डिजिटल सार – क्या कभी आपने सोचा है कि गांव की ग्राम सभा की बैठक में कही गई बातों को अब मशीन भी समझ सकती है? भारत के गांवों में स्थानीय शासन व्यवस्था धीरे-धीरे तकनीक से जुड़ रही है और अब इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की भी एंट्री हो चुकी है।
पंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों के कामकाज को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए एक एआई आधारित टूल ‘सभा सार’ शुरू किया है। यह टूल ग्राम सभा और पंचायत बैठकों की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर अपने आप बैठक की कार्यवाही यानी मिनट्स तैयार करता है। इसका उद्देश्य यह है कि बैठकों में हुई चर्चाओं को सही तरीके से दर्ज किया जा सके और बाद में उन्हें आसानी से देखा और समझा जा सके।
अब तक ग्राम पंचायत की बैठकों की कार्यवाही लिखना पूरी तरह मैन्युअल काम था। इसमें समय भी लगता था और कई बार बातें ठीक से दर्ज नहीं हो पाती थीं। ‘सभा सार’ इस समस्या को कम करने की कोशिश है, ताकि पंचायत प्रतिनिधि कागजों में उलझने के बजाय गांव के विकास से जुड़े फैसलों पर ज्यादा ध्यान दे सकें।
भारत जैसे बहुभाषी देश में भाषा भी एक बड़ी चुनौती होती है। इसे ध्यान में रखते हुए ‘सभा सार’ को भाषिणी, यानी राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन से जोड़ा गया है। इस वजह से यह टूल 22 भारतीय भाषाओं में लिखित अनुवाद और 13 भारतीय भाषाओं में आवाज को लिखित रूप में बदलने की सुविधा देता है। इससे अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के लिए इसका उपयोग आसान हो जाता है।
इस तकनीक का इस्तेमाल अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। अगस्त 2025 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर त्रिपुरा की सभी 1,194 ग्राम पंचायतों को विशेष ग्राम सभाओं में इस टूल के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया। उसी दिन देश भर में 12,667 ग्राम पंचायतों ने इसका इस्तेमाल किया। इसके बाद 2 अक्टूबर 2025 को आयोजित ग्राम सभाओं में यह संख्या बढ़कर 77,198 हो गई। 28 नवंबर 2025 तक देश की 92,034 ग्राम पंचायतें ‘सभा सार’ के जरिए बैठकों का एआई आधारित सार तैयार कर चुकी थीं।
यह आंकड़े दिखाते हैं कि गांव स्तर पर भी डिजिटल तकनीक को धीरे-धीरे अपनाया जा रहा है। हालांकि यह तकनीक फैसले नहीं लेती, लेकिन फैसलों को दर्ज करने, समझने और आगे की योजना बनाने में मदद जरूर कर सकती है।
पंचायती राज मंत्रालय का कहना है कि ‘सभा सार’ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध है और आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ेगा। अगर इसका सही तरीके से इस्तेमाल हुआ, तो यह ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इस बारे में जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, जिन्हें ललन सिंह के नाम से भी जाना जाता है, ने 3 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में लिखित जवाब के जरिए दी।
जब देश डिजिटल गवर्नेंस की ओर बढ़ रहा है, तब गांवों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह प्रयोग एक नई दिशा दिखाता है। अब देखना यह है कि क्या एआई सिर्फ बैठकों की कार्यवाही लिखने तक सीमित रहेगा या भविष्य में ग्राम पंचायतों की कार्यशैली को और मजबूत बनाने में भी मदद करेगा।
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