पीएम-कुसुम योजना से 10 लाख सौर पंप लगे, एग्रीवोल्टिक्स से किसानों की आय ₹1 लाख प्रति एकड़ तक संभव
11 मार्च 2026, नई दिल्ली: पीएम-कुसुम योजना से 10 लाख सौर पंप लगे, एग्रीवोल्टिक्स से किसानों की आय ₹1 लाख प्रति एकड़ तक संभव – केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि नवीकरणीय ऊर्जा भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत देशभर में 10 लाख से अधिक स्वतंत्र सौर कृषि पंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे किसानों को सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध हो रही है तथा सिंचाई लागत में कमी आ रही है।
नई दिल्ली में आयोजित चौथे राष्ट्रीय एग्रो-आरई शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि खेतों, घरों और ग्रामीण उद्यमों तक सौर ऊर्जा का विस्तार केवल ऊर्जा परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के व्यापक रूपांतरण की दिशा में बड़ा कदम है।
सौर पंपों से सिंचाई लागत में कमी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डीजल से सिंचाई करने पर गेहूं के लिए प्रति एकड़ लगभग ₹6,790 और कपास जैसी फसलों के लिए ₹8,000 से अधिक खर्च आता है। जबकि सौर पंपों के उपयोग से किसान प्रति एकड़ प्रतिवर्ष लगभग ₹5,000 से ₹6,500 तक की बचत कर सकते हैं। इससे लागत घटने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है।
पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत देशभर में अब तक 10 लाख से अधिक स्वतंत्र सौर कृषि पंप लगाए जा चुके हैं , साथ ही 13 लाख से अधिक ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण किया जा चुका है।
पीएम-कुसुम 2.0 में एग्री-पीवी को बढ़ावा
उन्होंने जानकारी दी कि सरकार पीएम-कुसुम 2.0 की तैयारी कर रही है, जिसमें 10 गीगावॉट का समर्पित एग्री-पीवी (कृषि-पीवी) घटक शामिल होगा।
इस पहल के तहत फसलों के साथ सौर पैनलों की सह-स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसान एक ही भूमि पर खेती जारी रखते हुए बिजली उत्पादन भी कर सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का नया मॉडल विकसित होने की उम्मीद है।
एग्रीवोल्टिक्स से आय के नए अवसर
मंत्री जोशी ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक प्रणालियां कृषि और सौर ऊर्जा के संयोजन का प्रभावी मॉडल हैं। इससे भूमि की उत्पादकता बढ़ सकती है और किसानों को आय का अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है।
अनुमानों के अनुसार भारत में एग्रीवोल्टिक्स की संभावित क्षमता 3,000 गीगावॉट से 14,000 गीगावॉट तक हो सकती है। अध्ययनों के मुताबिक, फसल उत्पादन के साथ बिजली उत्पादन से होने वाली आय जोड़ने पर किसानों की आय लगभग ₹60,000 प्रति एकड़ से बढ़कर ₹1 लाख प्रति एकड़ से अधिक तक पहुंच सकती है।कार्यक्रम को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने भी संबोधित किया ।

