कम्पनी समाचार (Industry News)

प्लास्टिक अपशिष्ट नियम 2026 में बदलाव से कीटनाशक उद्योग को राहत, नियमों में आया स्पष्टता

03 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: प्लास्टिक अपशिष्ट नियम 2026 में बदलाव से कीटनाशक उद्योग को राहत, नियमों में आया स्पष्टता – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2026 से कीटनाशक उद्योग से जुड़ी एक बड़ी उलझन दूर हो गई है। अब साफ कर दिया गया है कि जहां किसी अन्य कानून के तहत पुनर्चक्रित प्लास्टिक (रीसाइकिल प्लास्टिक) का उपयोग अनुमति नहीं है, वहां इसे अनिवार्य नहीं माना जाएगा।

क्या था मुद्दा?

पहले के नियमों में प्लास्टिक पैकेजिंग में एक तय प्रतिशत तक रीसाइकिल प्लास्टिक का उपयोग जरूरी किया गया था। लेकिन कीटनाशकों की पैकेजिंग, जिसे केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति नियंत्रित करता है, में सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आमतौर पर नए (वर्जिन) प्लास्टिक का ही इस्तेमाल करना पड़ता है।

इस वजह से कंपनियां दो अलग-अलग नियमों के बीच फंस गई थीं, एक तरफ पर्यावरण नियम, दूसरी तरफ सुरक्षा नियम।

अब नए संशोधन ने इस टकराव को खत्म कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहां कानून रीसाइकिल प्लास्टिक की अनुमति नहीं देता, वहां उसका उपयोग अनिवार्य नहीं होगा। इससे कीटनाशक पैकेजिंग को इस नियम से छूट मिल गई है।

उद्योग की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा कि इससे लंबे समय से चल रही समस्या का समाधान हुआ है।

क्रॉपलाइफ इंडिया के महासचिव श्री दुर्गेश चंद्र ने कहा, “क्रॉपलाइफ इंडिया पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2026 के उस प्रावधान का स्वागत करता है, जिसमें कीटनाशक उद्योग को प्लास्टिक पैकेजिंग में अनिवार्य रूप से पुनर्चक्रित प्लास्टिक के उपयोग से छूट दी गई है। यह स्पष्टता अत्यंत आवश्यक नियामकीय समन्वय स्थापित करती है, क्योंकि इस प्रकार की पैकेजिंग पहले से ही केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति के नियमों एवं विनियमों के अंतर्गत नियंत्रित है।

अधिसूचना के अनुसार, प्लास्टिक पैकेजिंग की विभिन्न श्रेणियों में पुनर्चक्रित प्लास्टिक के अनिवार्य उपयोग का प्रावधान उन स्थितियों में लागू नहीं होगा, जहां किसी कानून, नियम या सरकारी निकाय जैसे केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड द्वारा इसकी अनुमति नहीं दी गई है।

हम सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं और हमें यह देखकर प्रोत्साहन मिला है कि इस विषय पर हमारी दीर्घकालिक प्रस्तुतियों पर विचार किया गया है। क्रॉपलाइफ इंडिया लगातार इस राहत की मांग कर रहा था और यह निर्णय पूरे कीटनाशक उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन के रूप में सामने आया है। यह कदम पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ-साथ फसल सुरक्षा उत्पादों के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने में सहायक होगा।”

क्यों है यह अहम?

यह फैसला दिखाता है कि सरकार पर्यावरण संरक्षण और उत्पाद सुरक्षा, दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। जहां संभव है वहां रीसाइकिल प्लास्टिक को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन जहां जोखिम है वहां लचीलापन भी रखा गया है।

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