कम्पनी समाचार (Industry News)

भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशक उपयोग वैश्विक स्तर से काफी कम; क्रॉपलाइफ इंडिया ने आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की

17 मार्च 2026, नई दिल्ली: भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशक उपयोग वैश्विक स्तर से काफी कम; क्रॉपलाइफ इंडिया ने आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की – खाद्य अवशेष, पर्यावरणीय जोखिम और उत्पाद सुरक्षा को लेकर बढ़ती सार्वजनिक बहस के बीच क्रॉपलाइफ इंडिया (CropLife India) ने कीटनाशकों पर “मिथक बनाम तथ्य” (Myth vs Fact) पर आधारित एक विस्तृत जानकारी पत्र जारी किया है। संगठन ने कहा कि जहां कीटनाशकों के दुरुपयोग को लेकर चिंताएं वाजिब हैं, वहीं गलत जानकारी किसानों के सामने मौजूद वास्तविक चुनौतियों को समझने में बाधा बन सकती है।

भारत में कृषि 93 मिलियन से अधिक परिवारों और लगभग 150 मिलियन किसानों की आजीविका का आधार है। यह क्षेत्र देश के लगभग 46 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देता है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 16–18 प्रतिशत का योगदान करता है। इसके बावजूद, कीट और बीमारियां हर साल 10–35 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं, जबकि गंभीर प्रकोप के दौरान यह नुकसान और भी अधिक हो सकता है।

इन चुनौतियों के बावजूद, भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का उपयोग वैश्विक स्तर की तुलना में काफी कम है। भारतीय किसान आमतौर पर 0.3–0.6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का उपयोग करते हैं, जबकि कई यूरोपीय देशों में यह 2–4 किलोग्राम, चीन में लगभग 13 किलोग्राम और पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों में 10 किलोग्राम से अधिक है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा कि सार्वजनिक चर्चा में इन तथ्यों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

अनुसंधान-आधारित फसल विज्ञान कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस संगठन ने जोर देकर कहा कि कीटनाशकों पर चर्चा संतुलित और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें जिम्मेदार उपयोग, किसानों की जागरूकता और मजबूत नियामक व्यवस्था को भी महत्व दिया जाए।

क्रॉपलाइफ इंडिया के महासचिव दुर्गेश चंद्र ने कहा कि इस जानकारी पत्र का उद्देश्य कीटनाशकों को लेकर संतुलित और तथ्य-आधारित संवाद को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि फसल सुरक्षा उत्पाद फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और किसानों को उत्पादन सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। साथ ही, उद्योग जिम्मेदार उपयोग, स्टेवार्डशिप और भारत की सख्त नियामक व्यवस्था के पालन के लिए प्रतिबद्ध है।

संगठन ने यह भी बताया कि “कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग” या “नियमन की कमी” जैसे कई आम धारणा भारत में मौजूद संरचित मूल्यांकन और अनुमोदन प्रणाली को पूरी तरह नहीं दर्शाती हैं। यह जानकारी पत्र वैज्ञानिक साक्ष्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर सुरक्षा, अवशेष प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रभाव और नियामक नियंत्रण से जुड़े प्रमुख मुद्दों को स्पष्ट करता है।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित और प्रभावी फसल सुरक्षा के लिए किसानों का प्रशिक्षण, बेहतर उपयोग पद्धतियां और निरंतर नियामक निगरानी बेहद जरूरी हैं। संगठन ने किसानों के समर्थन, सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने और भारत में सतत कृषि को मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कीटनाशक: मिथक बनाम वास्तविकता — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: “कीटनाशक कैंसर का कारण बनते हैं।” क्या यह सही है?
उत्तर: भारत में उपयोग होने वाले कीटनाशकों को मंजूरी से पहले सरकारी सुरक्षा जांच से गुजरना होता है। सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIB&RC) स्वास्थ्य जोखिम, पर्यावरणीय प्रभाव और खाद्य अवशेषों का मूल्यांकन करती है। नियामकों के अनुसार, स्वीकृत निर्देशों और निर्धारित सुरक्षा सीमाओं के अनुसार उपयोग करने पर उपभोक्ताओं में कैंसर के बढ़े हुए जोखिम का कोई प्रमाण नहीं मिला है। किसानों और उपयोगकर्ताओं के लिए लेबल निर्देशों का पालन, सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग और उचित प्रशिक्षण जरूरी है।

प्रश्न 2: “कीटनाशक कभी खत्म नहीं होते।” क्या यह सही है?
उत्तर: कई आधुनिक कीटनाशक मिट्टी और पानी में अपेक्षाकृत जल्दी टूटने के लिए बनाए जाते हैं। उनका व्यवहार उत्पाद, मिट्टी की स्थिति और मौसम पर निर्भर करता है। लेबल पर सही मात्रा और फसल कटाई से पहले का अंतराल स्पष्ट रूप से दिया जाता है।

प्रश्न 3: “सभी कीटनाशक ज़हर होते हैं।” क्या यह सही है?
उत्तर: कीटनाशकों की विषाक्तता अलग-अलग होती है। प्रत्येक उत्पाद का अलग-अलग परीक्षण किया जाता है और उसे सुरक्षा श्रेणियों में रखा जाता है। लेबल पर सुरक्षित मात्रा, उपयोग और प्रतीक्षा अवधि की स्पष्ट जानकारी दी जाती है।

प्रश्न 4: “ऑर्गेनिक खेती का मतलब पूरी तरह रसायन मुक्त खेती है।” क्या यह सही है?
उत्तर: ऑर्गेनिक खेती में भी कुछ स्वीकृत कीटनाशकों का उपयोग होता है, जैसे नीम आधारित उत्पाद और पायरेथ्रम (Pyrethrum)। प्राकृतिक और सिंथेटिक दोनों प्रकार के कीटनाशकों को मंजूरी से पहले सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना होता है।

प्रश्न 5: “कीटनाशक लाभकारी कीटों को भी मार देते हैं।” क्या यह हमेशा सही है?
उत्तर: किसान अब इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) अपनाते हैं, जिसमें जैविक नियंत्रण, निगरानी और लक्षित उपयोग शामिल होता है। सही समय और तरीके से उपयोग करने पर कई उत्पाद लाभकारी कीटों और परागणकर्ताओं पर न्यूनतम प्रभाव डालने के लिए बनाए जाते हैं।

प्रश्न 6: “खाद्य अवशेष खतरनाक होते हैं।” क्या उपभोक्ताओं को चिंता करनी चाहिए?
उत्तर: भारत में खाद्य पदार्थों के लिए अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) तय की गई है। 2022 से 2025 के बीच 86,000 से अधिक नमूनों की जांच में लगभग 97 प्रतिशत नमूने इन सीमाओं के अनुरूप पाए गए। धोने, छीलने और पकाने से अवशेष और कम हो सकते हैं।

प्रश्न 7: “भूजल पूरी तरह प्रदूषित हो रहा है।” क्या यह अनिवार्य है?
उत्तर: पर्यावरणीय प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि कीटनाशकों का उपयोग कैसे किया जाता है। कई उत्पाद मिट्टी से मजबूती से बंध जाते हैं, जिससे उनका भूजल में जाना सीमित होता है। समस्याएं आमतौर पर अधिक या गलत उपयोग से होती हैं।

प्रश्न 8: “कीटनाशक-मुक्त खेती संभव है।” क्या यह व्यवहारिक है?
उत्तर: फसल सुरक्षा के बिना कीट प्रकोप से 30–50 प्रतिशत तक उत्पादन हानि हो सकती है, जिससे किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है।

प्रश्न 9: “किसान कीटनाशकों से प्रभावित होते हैं।” क्या यह आम स्थिति है?
उत्तर: सुरक्षित उपयोग बेहद जरूरी है। सुरक्षात्मक उपकरण, उचित प्रशिक्षण और लेबल निर्देशों का पालन करने से जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

प्रश्न 10: “उद्योग सच्चाई छुपाता है।” क्या यह सही है?
उत्तर: कीटनाशकों के पंजीकरण के लिए कंपनियों को स्वास्थ्य, पर्यावरण और खाद्य अवशेषों पर विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करने होते हैं। नियामक संस्थाएं इनका मूल्यांकन करने के बाद ही उत्पादों को मंजूरी देती हैं।

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