उद्यानिकी (Horticulture)

सेब की नई पहचान: भारत में किसाबेल ऑरेंज का आगमन

05 दिसंबर 2024, नई दिल्ली: सेब की नई पहचान: भारत में किसाबेल ऑरेंज का आगमन – किसाबेल ऑरेंज, एक फ्रांसीसी सेब प्रजाति, अपनी अनोखी पीली त्वचा, गुलाबी रंगत और गहरे लाल गूदे के कारण वैश्विक बाजारों में छाई हुई है। इसका कुरकुरा स्वाद और खट्टा-मिठास इसे स्वास्थ्यप्रेमी और प्रीमियम फलों के शौकीन लोगों के बीच लोकप्रिय बना रहा है। यह आईफोरेड कंसोर्टियम का हिस्सा है, जिसमें 13 देशों के 14 उत्पादक शामिल हैं, जो उच्च मूल्य वाले फलों का उत्पादन कर रहे हैं।  

भारत में संभावनाएं

भारत में किसाबेल सेब के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवा उपभोक्ताओं और बढ़ते प्रीमियम फल बाजार को देखते हुए, यह सेब भारतीय ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है। इसकी अनूठी लाल गूदे और खट्टे स्वाद वाली विशेषताएं, विशेष रूप से त्योहारों और उपहार देने के लिए उपयुक्त हैं।  

भारत में खेती की संभावना

किसाबेल सेब समशीतोष्ण जलवायु में पनपता है और इसके लिए ठंड के मौसम में 1,200-1,500 घंटे की आवश्यकता होती है। भारत में, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, और उत्तराखंड जैसे क्षेत्र इसकी खेती के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। हालाँकि, इसके लिए स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुकूल शोध और फसल प्रबंधन की आवश्यकता होगी।  

निर्यात के अवसर

यदि किसाबेल सेब को भारत में सफलतापूर्वक उगाया जाता है, तो यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए निर्यात का एक बड़ा अवसर प्रदान कर सकता है। एशियाई बाजारों में लाल रंग के फलों की विशेष मांग है, जहाँ इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। भारत इस सेगमेंट में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।  

चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएँ

भारत में किसाबेल सेब की खेती को बढ़ावा देने के लिए उचित शोध, वित्तीय समर्थन, और जागरूकता अभियानों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, किसानों को नई तकनीकों और विदेशी भागीदारी के माध्यम से प्रशिक्षित करना होगा।  
किसाबेल ऑरेंज केवल एक कृषि उत्पाद नहीं है, बल्कि भारतीय फलों के बाजार में बदलाव लाने का एक अवसर है। अगर इसे सही रणनीति के साथ बढ़ावा दिया जाए, तो यह भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।  

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