खीरे के रोग एवं प्रबंधन

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  • अभिषेक कुमार , कुशल राज
  • अराधना सागवाल ,राकेश चुघ
    पादप रोग विभाग, चौधरी चरण सिंह, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

1 नवम्बर 2021, खीरे के रोग एवं प्रबंधन– खीरा एक महत्वपूर्ण सब्जी फसल है। खीरे के अपरिपक्व फल का उपयोग सलाद के रूप में और अचार बनाने के लिए किया जाता है, इसके फल में लगभग 96 प्रतिशत पानी होता है, और यह सोडियम, मैग्नीशियम, विटामिन, पोटैशियम, सल्फर, सिलिकॉन आदि का स्रोत है। खीरे की खेती के लिए पीएच मान 6-7 सबसे उपयुक्त है। बीज के अच्छे अंकुरण के लिए खेत को 2-3 बार हैरो या देसी हल से तैयार करके पाटा से खेत को समतल करना चाहिए। इसकी बुवाई का उपयुक्त समय फरवरी से मार्च एवं जून से जुलाई उचित होता है। इसकी बिजाई नालियों के किनारों पर करते हंै जिसमें एक नाली से दूसरी नाली के बीच की दूरी एक से डेढ़ मीटर रखते हैं और पौधों के बीच का फासला 60 सेंटीमीटर रखते हैं। खीरे की फसल में हानिकारक रोगों का नियंत्रण आधिक उत्पादन लेने के लिए आवश्यक है। वैसे तो खीरे की फसल को बहुत से रोग नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन इस फसल के कुछ प्रमुख रोग जिससे फसल को काफी नुकसान होता है, के लक्षण एवं निदान इस प्रकार हैं।

पाउडरी मिल्ड्यू

इस रोग का कारण कवक होता है। यह रोग पत्तियों की ऊपरी सतहों और संक्रमित पौधों के तनों पर एक सफेद पाउडर के रूप में दिखाई देता है। आमतौर पर फलों का स्वाद एवं गुणवत्ता खराब हो जाती है। संक्रमण तब हो सकता है, जब उच्च सापेक्ष आद्र्रता वाले शुष्क मौसम के दौरान तापमान 10 और 320 से. के बीच हो। देर से लगाई फसल में यह बीमारी एक विशेष समस्या हो सकती हैं।

प्रबंधन

रोगरोधी किस्में उगायें। 8-10 किलोग्राम प्रति एकड़ बारीक गंधक का धूड़ा बीमारी लगे भाग पर बुरकाव से रोग को रोका जा सकता है, धूड़ा सुबह या शाम के समय करें। फल पर गंधक न बुरके। धूड़ा के स्थान पर 500 ग्राम घुलनशील गंधक 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ के हिसाब से छिडक़ाव कर सकते हैं।

अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट

यह रोग कवक के कारण होता है जिसके कारण पत्तियों पर छोटे, गोलाकार, भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो बाद में डेढ़ इंच या उससे अधिक व्यास तक बढ़ जाते हैं। निश्चित सांद्रता के छल्ले दिखाई देते हैं जो उस क्षेत्र को ‘बैल की आंख’ का रूप देते हैं। तेज धूप, लगातार ओस या बारिश और तापमान 15और 32० से. के बीच इस रोग का विकास ज्यादा होता है।

प्रबंधन

फसल के अंत में सभी संक्रमित पौधों के अवशेषों को हटा दें और नष्ट कर दें, क्योंकि कवक पौधे के अवशेषों पर सर्दियों में जीवित रहता है। बीमारी आसानी से कृषि यंत्रों, हवा, पानी या कीड़े से फैलती है। फसल चक्र और बीज उपचार अपनायें। पौधों पर 400 ग्राम ब्लाईटॉक्स का एक एकड़ के लिए 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

डाउनी मिल्ड्यू

यह रोग कवक के कारण होता है, यह खीरे के सबसे महत्वपूर्ण रोगों में से एक है। आमतौर पर, लक्षण पत्ती की ऊपरी सतह पर धब्बे छोटे पीले अथवा नारंगी रंग के रूप में शुरू होते हैं। जैसे-जैसे धब्बे बड़े होते है, वे अनियमित मार्जिन के साथ भूरे रंग के हो सकते हैं। संक्रमित पौधे निचली पत्ती की सतह पर सफेद या हल्के बैंगनी रंग का पाउडर दिखाई देता हैं। फल प्रभावित नहीं होता है, लेकिन स्वाद के मामले में, यह कम मीठा होता है। अधिक संक्रमण की अवस्था में इस रोग में पत्तियां सूख जाती है और पौधा नष्ट हो जाता है।

प्रबंधन

रोग-रोधी किस्में उगाये। खरपतवारों को नष्ट कर दें। पौधों पर 400 ग्राम ब्लाईटॉक्स या इंडोफिल एम-45 का एक एकड़ के लिए 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ें।

कोणीय पर्णदाग

कोणीय पर्णदाग एक जीवाणु जनित रोग है जिसके प्रारंभिक लक्षण पत्तियों पर छोटे, कोणीय, भूरे या भूसे के रंग के धब्बे बनते हैं। संवेदनशील किस्मों पर, धब्बे एक पीले चक्कतों से घिरे हो सकते हैं। नमी वाले मौसम में, संक्रमित ऊतकों से एक दूधिया द्रव निकलता है। यह द्रव सूख जाता है, जिससे घावों को कवर करने वाला एक सफेद क्रस्ट निकल जाता है। रोग तने एवं फलों को भी प्रभावित करता है। फलों के घाव छोटे और गोलाकार होते है। कोणीय पत्ती स्पॉट जीवाणु बीजजनित हो सकता है, और फसल के अवशेषों में जीवित रह सकता है। ज्यादा नमी होने पर यह रोग आसानी से फैलता है।

प्रबंधन

प्रमाणित स्रोत से रोगजनक मुक्त बीज लेकर उपयोग करें। इसके अलावा, ऐसी किस्मों को चुने जो रोग के लिए प्रतिरोधी हो। प्रतिरोध के उच्च और मध्यवर्ती स्तर के साथ खीरे की किस्में उपलब्ध हैं। खेतों में कम से कम दो साल के लिए गैर-कुकुरबिट फसल चक्र अपनायें। उचित सिंचाई करें। पौधों के गीला होने पर उपकरणों को खेतों से बाहर रखें।

एन्थ्रेक्नोज

यह रोग कवक के कारण होता है, और रोग के विकास के लिए कई दिनों तक बारिश, ठंड के मौसम की आवश्यकता होती है। एन्थ्रेक्नोज के पहले लक्षण पत्तियों एवं फलों पर धब्बे पड़ जाते हैं। जो पीले या पानी से लथपथ क्षेत्रों के रूप में शुरू होते हैं। नमी की अवस्था में इन धब्बों पर गोंद की तरह का पदार्थ दिखाई देता है। एन्थ्रेक्नोज गीली और गर्म स्थितियों में सबसे अधिक प्रचलित है।

प्रबंधन

पुराने अवशेषों को हटा दें या नष्ट कर दें, क्योंकि यह वह जगह है जहां कवक सर्दियों में जीवित रहता है। रोग को कम करने के लिए फसल चक्र भी महत्वपूर्ण है। एक प्रमाणित स्रोत से बीज खरीदें, क्योंकि बीमारी बीजजनित हो सकती है। इसकी रोकथाम के लिए 400 ग्राम इंडोफिल एम-45 दवा 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिडक़ें।

मोजेक विषाणु

कई सामान्य वायरस खीरे को प्रभावित कर सकते हैं, जिसमें खीरे का मोजैक विषाणु एक मुख्य बीमारी हैं। संक्रमित पौधों के पत्ते पीले व कहीं-कहीं से हरे नजर आते हैं, फल आकार में अनियमित या पतले हो सकते हैं। विभिन्न कीड़े इन विषाणुओं से फसल को संक्रमित करते हैं।

प्रबंधन

विषाणु फैलाने वाले कीड़ों का रसायनिक नियंत्रण रोग को कम कर सकता है। विषाणु वाहक कीट के नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 0.05 प्रतिशत रसायनिक दवा का छिडक़ाव 10 दिन के अंतराल पर करें, लेकिन फल लगने के बाद रसायनिक दवा का प्रयोग न करें। स्वस्थ और जोरदार पौधों को बनाए रखने के लिए एक अच्छी नियंत्रण रणनीति है, पौधों की सिफारिश की गई किस्में उगाना और किसी भी असामान्य लक्षण के लिए अपने खेतों की निगरानी करना। खरपतवारों को साफ रखें। देर से रोपण वायरस की गंभीरता को कम करने में मदद कर सकता है।

 

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