फूल गोभी का बीज उत्पादन

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खेत का चयन
खेत का चयन करते समय यह ध्यान रखें कि वहां पहले दो वर्ष तक गोभी वर्गीय फसल बीज के लिए नहीं उगाई गई हो तथा खेत की मिट्टी दोमट, गहरी, उपजाऊ तथा पानी निकास अच्छा होना चाहिए। खेत की मिट्टी का पी.एच. 5.5 से 6.5 होना चाहिए।

पृथक्करण दूरी
फूलगोभी एक परपरागण वाली फसल है तथा इसमें परागण मधुमक्खियों द्वारा किया जाता है। इसलिए बीज की गुणवत्ता व अनुवांशिक अव्ययता बनाये रखने के लिए फूल गोभी दूसरी किस्मों व इस वर्ग की अन्य फसलों से अभिजनक व आधार बीज के लिए 1600 मीटर की तथा प्रमाणित बीज के लिए 1000 मीटर की पृथक्करण दूरी होनी चाहिए।

खाद एवं उर्वरक
फूल गोभी की अच्छी बीज फसल उगाने के लिए 25-30 टन सड़ी गली गोबर खाद, 60 किग्रा. नत्रजन, 80 किग्रा फास्फोरस व 40 किग्रा पोटाश खेत तैयारी के समय भूमि में मिला दें। शेष 60 किग्रा नत्रजन दो भागों में बांटकर रोपाई के एक-एक महीने पश्चात् निराई गुड़ाई व मिट्टी चढ़ाते समय खेत में मिलाएं। सूक्ष्म पोषक तत्वों (बोरान व मोलिब्डेनम) की कमी की अवस्था में 10-15 किग्रा बोरेक्स, 1-15 किग्रा. सोडियम मोलिब्डेट भूमि में मिलाएं।

कृषक क्रियायें
अगेती किस्मों के लिए 600-700 ग्रा. प्रति हेक्टेयर बीज की मात्रा तथा मध्यम वर्ग की किस्मों के लिए 400-500 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की मात्रा आवश्यक है। फसल अंतरण अगेती किस्मों के लिए 60 सेमी. पंक्तियों में तथा 45 सेमी. पौधों में व मध्यम वर्ग की किस्मों के लिए 75 सेमी. पंक्तियों में तथा 45 सेमी. पौधों में होना आवश्यक है। रोपाई से पहले खरपतवारनाशी जैसे स्टॉम्प 2.3 लीटर या बासालीन 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर डालकर हल्की सिंचाई कर दें।

अवांछनीय पौधों को निकालना
फूल बनने की स्थिति से लेकर, स्फुटन तथा पुष्पन की स्थिति तक अवांछनीय पौधों जो कि पत्तों व फूल के लिए विभिन्न लग रहे हों उन्हें निकालना आवश्यक है।

परागण प्रबंध
फूल गोभी एक परपरागित फसल होने के कारण इसमें मधुमक्खियों का परपरागण और बीज तैयार करने में बहुत योगदान है। इस लिए लगभग एक हेक्टेयर की गोभी बीज फसल में फूल आने के समय लगभग 1-2 मधुमक्खियों के छत्ते या कॉलोनी खेत के आसपास रखें।

प्रमुख रोग और नियंत्रण
गोभी बीज फसल के प्रमुख रोग ब्लैक रॉट, डाउनी मिल्ड्यू, बैक्टीरियल सॉफ्ट रॉट व स्क्लैरोटिनियां रॉट है।

ब्लैक रॉट के नियंत्रण के लिए

  • तीन से चार वर्ष का फसल चक्र।
  • 1 प्रतिशत मरक्यूरिक क्लोराइड में आधे घंटे के लिए बीज उपचार
  • प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग।

मृदुल आसिता
यह बीमारी शुरू वाली स्थिति में आती है। अत: इसके नियंत्रण के लिए डायथेन एम 45 का 0.2 प्रतिशत या रोडोमिल 0.05 प्रतिशत का छिड़काव करें।

बैक्टीरियल सॉफ्ट रॉट
इसके लिए पौधों का निराई गुड़ाई व मिट्टी चढ़ाते समय ध्यान रखें कि किससे इनको नुकसान हो। और इसके अतिरिक्त स्टेप्टोसाइक्लीन नामक दवाई का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करें।

स्कलेरोटिनिया रॉट-
इस बीमारी के नियंत्रण के लिए भी 0.2 प्रतिशत मेन्कोजेब व कार्बेन्डाजिम का छिड़काव 15-20 दिन के अंतराल पर करें।

तुड़ाई एवं कटाई की अवस्था
जब 60-70 प्रतिशत फलियां भूरी हों जाए तथा फसल पीली भूरी हो जाए तो पौधों को काटकर पकने व सूखने के लिए ढेर लगाकर रख दिया जाए। चार-पांच दिन के पश्चात् ढेर की अदला-बदली कर चार-पांच दिन और सूखने दिया जाए।

बीज निष्कासन
पौधों की टहनियों व फलियों के पश्चात छड़ी की सहायता से पीट कर बीज निकाल कर उसे साफ कर सूर्य की धूप में 7 प्रतिशत नमी तक सुखा लें और ठंडी जगह भंडारण करें।

बीज उपज
औसतन अगेती किस्मों में लगभग 200-250 किग्रा. तथा मध्यम व पछेती किस्मों में 300-400 किग्रा. प्रति हेक्टेयर बीज पैदावार होती है। और लगभग 1000 बीज का भार 2.8 से 3.0 ग्राम तक होता है।

फूल गोभी का तापमान के लिए अत्याधिक संवेदनशील होने के कारण इसकी सभी प्रजातियों का बीजोत्पाद हर जलवायु में नहीं किया जा सकता है। पिछेती किस्मों का बीज पर्वतीय क्षेत्रों के कुछ चुने हुए स्थानों (सोलन, कुल्लू तथा सिरमौर) में ही किया जाता है। अगेती व मध्यम किस्मों के बीज निचले पर्वतीय क्षेत्रों एवं मैदानी भागों में भी उत्पादित किए जा सकते हैं।

  • रूपाली पटेल, email : roopalipatel847@gmail.com
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