गेहूं भंडारण: रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण हुआ था। कारण बतायें ?

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  • देवेन्द्र उइके, नरसिंहपुर

20  मई 2021, नरसिंहपुर । पिछले वर्ष अच्छी तरह सुखा कर भंडारण करने के बाद भी रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण हुआ था। कारण बतायें – गेहूं में लगने वाले खपरा भृंग संसार का संग्रहित अनाज का प्रमुख कीट है। यह कीट 2 प्रतिशत आद्रता की स्थिति में भी अपना विकास करने की क्षमता रखता है। यह अकेला कीट है जो दानों में 8 प्रतिशत से कम नमी में भी विकसित हो सकता है। गेहूं को धूप में अच्छी तरह सुखाने पर दानों में नमी का प्रतिशत 9 के नीचे नहीं जा पाता इसलिये अच्छी तरह सुखाने के बाद भी खपरा भृंग का प्रकोप भंडारण में हो सकता है।

  • यह 8 डिग्री से.ग्रे. से तापक्रम में जिन्दा रहता है और यदि इसे कोई भोज्य पदार्थ न मिले तब भी यह तीन वर्ष तक जिन्दा रहने की क्षमता रखता है। यह अपनी त्वचा छोड़ता रहता है अनाज की ऊपरी सतह पर इकट्ठी त्वचा द्वारा इसके प्रकोप को पहचाना जा सकता है।
  • भंडारण के पूर्व ये सुनिश्चित कर लें कि भंडारगृह में खपरा भृंग की कोई भी अवस्था न हो। इसके लिये भंडारगृह की सफाई के बाद भंडारगृह में मेलाथियान 0.1प्रतिशत घोल का छिड़काव अच्छी तरह कर लें।
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