फूलों की खेती से फैली खुशियों की मुस्कान

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  • (दिलीप दसौंधी, मंडलेश्वर)

16 अगस्त 2022, फूलों की खेती से फैली खुशियों की मुस्कान फूलों का नाम आते ही खुशबू का अहसास होने लगता है, लेकिन जब इन्हीं फूलों की खेती की कमाई से जेब फूलने लगे तो चेहरे पर खुशियों की मुस्कान बरबस आ जाती है। फूलों की खेती करके इसे साबित किया है, बुरहानपुर जिले के ग्राम चाकबारा के उन्नत किसान श्री संजय महाजन ने।

श्री महाजन ने कृषक जगत को बताया कि केले की खेती तो वो लम्बे अर्से से कर रहे हैं और अच्छा उत्पादन भी ले रहे हैं। इस वर्ष तो भाव भी अच्छा मिल रहा है। फूलों की खेती 2001 से शुरू की थी। बीते दो दशकों से भी ज़्यादा समय से गेंदे और सेवंती के फूलों की खेती कर रहे हैं। सफेद सेवन्ती के अलावा गेंदे की पीली और ऑरेंज किस्म लगाते हैं। फूलों की खेती में लागत कम और लाभ अधिक मिलता है। गत वर्ष भी 17 एकड़ में गेंदा/सेवंती लगाया था। वैसे तो गेंदे का औसत उत्पादन 40 क्विंटल/एकड़ मिल जाता है, लेकिन पिछले साल नवरात्रि के समय बारिश होने से फूलों की फसल को बहुत नुकसान हुआ। उत्पादन घटकर 35 क्विंटल/एकड़ रह गया। माल गीला होने से दाम भी कम मिला।

श्री संजय ने कहा कि फूलों की मांग ज़्यादा होने पर 100 रुपए किलो तक बिक जाता है। वहीं उत्पादन अधिक होने पर कीमत जरूर कम मिलती है, लेकिन घाटा नहीं होता है। सामान्यत: 35 रुपए किलो और न्यूनतम 20 रुपए किलो का भाव तो मिल ही जाता है। लॉक डाउन के समय तो गेंदा 200 रुपए किलो तक बिका था। फूलों को प्राय: बुरहानपुर में ही बेचा जाता है, लेकिन कभी-कभी नागपुर और जलगांव भी कैरेट में फूल रखकर पिकअप वाहन से भेजे जाते हैं। वहां दाम अच्छे मिल जाते हैं। भाड़ा काटने के बाद भी अच्छा मुनाफा मिलने से चेहरे पर स्वत: खुशियों की मुस्कान छा जाती है।  सम्पर्क: 9993592034

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