गेंहूँ की रिकॉर्ड पैदावार की उम्मीद

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बेमौसम बारिश, ओले और बढ़ते कोरोना के बावजूद

  • शशिकांत त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार
    मो.: 98933 55391

9 अप्रैल 2021, भोपाल । गेंहूँ की रिकॉर्ड पैदावार की उम्मीद – बेमौसम बारिश, बढ़ते कोरोना संक्रमण के बावजूद इस वर्ष फिर मध्य प्रदेश में गेहूँ की बम्पर फसल हो सकती है और उपार्जन 135 लाख टन तक पहुंच सकता है। मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में बेमौसम बारिश के चलते रबी फसल का उपार्जन मतलब सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूँ आदि की खरीदी रोक दी गई थी। सरकार के सूत्रों के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि बारिश के कारण गेहूँ आदि में नमी आ जाती है जिससे उसकी गुणवत्ता (फेयर एवरेज क्वालिटी) प्रभावित होती है और किसान को उपार्जन का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

इस वर्ष के बजट भाषण में मध्य प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने पिछले वर्ष कोरोना संकट और लॉकडाउन की परेशानियों के बावजूद हुए गेहँू के रिकॉर्ड उपार्जन का उल्लेख किया है जो लगभग 130 लाख टन हुआ। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इस वर्ष भी प्रदेश के 4500 खरीदी केन्द्रों पर गेहूँ उपार्जन का कार्य किया जाएगा। इंदौर और उज्जैन में 22 मार्च से और शेष अन्य जिलों में एक अप्रैल से गेहूँ उपार्जन शुरू किया जाना तय किया गया था लेकिन बैमोसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण इसे आगे बढ़ाया गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने इस वर्ष लगभग 135 लाख मीट्रिक टन गेहूँ और 20 लाख मीट्रिक टन दलहन एवं तिलहन उपार्जन करने का अनुमान लगाया है।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन की केबिनेट शीघ्र ही मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम और मार्कफेड को गेहूँ के उपार्जन के लिए कर्ज लेने के लिए ग्यारंटी देने के सम्बंध में निर्णय लेगी। अनुमानित राशि जिसकी ग्यारंटी दी जानी है वह 25000 करोड़ रुपए से अधिक होगी।
मध्यप्रदेश में निजी कंपनियां भी अपनी निजी मंडी में समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदती हैं।

भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास उपलब्ध डेटा से पता चलता है कि 6 जून 2020 तक, मध्य प्रदेश ने राज्य में कुल 127.34 LMT गेहूं के 125.59 LMT  गेहूं – 98.62 प्रतिशत की खरीद की है। मध्य प्रदेश ने देश में खरीदे गए 386.54 लाख मीट्रिक टन गेहूं में से 33 प्रतिशत का योगदान दिया है, जो उसके इतिहास में सबसे अधिक है। मध्य प्रदेश अपने उच्च प्रोटीन वाले शरबती गेहूँ की विविधता और ड्यूरम जैसी गेहूँ की प्रजाति के लिए जाना जाता है। ड्यूरम प्रजाति पास्ता बनाने में उपयोग में लाया जाता है इसलिए इसकी अच्छी माँग रहती है।

राज्य ने केंद्र सरकार के आदेश के बाद 2014 में किसानों को 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना बंद कर दिया। हालांकि विपक्षी कांग्रेस गेहूँ खरीद और उप्तादन पर पर सरकार के दावों को खारिज करती आ रही है, लेकिन उपज 2007-2008 से बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने हाल ही में कहा है कि गेहूँ का उत्पादन पिछले वर्ष में 1,078.6 लाख टन से बढ़कर 2020-21 में रिकॉर्ड 1,092.4 लाख टन होने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश के कृषि विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, 2007 में, मध्य प्रदेश में गेहूँ की उपज 1,643 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जिसकी 2016-17 के रबी मौसम में लगभग प्रति हेक्टेयर 3,271 किलोग्राम तक पहुंचने की उम्मीद थी। केंद्र द्वारा इस माह जारी एक अनुमान के मुताबिक 2021-22 रबी विपणन सीजन के दौरान गेहूँ की खरीद 9.56 प्रतिशत बढ़कर 427.36 लाख टन रहने का अनुमान है; पंजाब में गेहूँ की खरीद 130 लाख टन, मध्य प्रदेश 135 लाख टन, हरियाणा 80 लाख टन और उत्तर प्रदेश 55 लाख टन होने का अनुमान है।

पिछले वर्षों में मध्य प्रदेश में गेहूँ का उपार्जन (लाख मीट्रिक टन)

2014-15                 72.00
2015-16                 73.10
2016-17                 39.91
2017-18                 67.25
2018-19                73.13
2019-20                73.69
2020-21              129.35
(स्रोत: मप्र राज्य आपूर्ति निगम)

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