खेतों की तैयारी भी जरूरी

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15 मार्च 2021, भोपाल । खेतों की तैयारी भी जरूरी – खेती एक सतत क्रिया है। कहावत है ‘खेती आप सेती’ मतलब खेती किसी संदेश या खबर पर नहीं की जा सकती है, खेती स्वयं को करना पड़ता है। खेती की निरंतरता बनाये रखने के लिये सामने आया कार्य समय पर करके नये युग की शुरुआत तो करना ही पड़ेगा। इस आशा और विश्वास के साथ जो कि प्रकृति ने बीते समय में कठोरता दिखाई है अब वह कभी नहीं होगा अब जो भी होगा बहुत अच्छा ही होगा। खेत की कटाई, गहाई, भण्डारण के कार्य यथासम्भव समाप्त हो गये होंगे। अब आगे की आवश्यकता है कि खेत बनाकर अधिक से अधिक क्षेत्र में मूंग, उड़द, लोबिया या भुट्टों के लिये मक्का लगाकर अतिरिक्त आय के साधन की नींव डालें। दूसरा खेत की आने वाले समय के लिये तैयारी अच्छे ढंग से की जाये। भूमि, जमीन को हमने माता का दर्जा दिया है जो हमारी हर जरूरत को पूरा करती है। कम्बाईन से कटे खेतों में बचे अवशेषों को कदापि नहीं जलायें क्योंकि जलना सिर्फ एक सेकंड का कार्य है परन्तु उसके परिणाम वर्षों भुगतना पड़ सकते है।  

सस्ता सरल उपाय मानकर कृषक देखा-देखी में नरवाई जलाने का कार्य कर बैठते हैं जिससे भूमिगत लाखों जीवाणुओं को हानि पहुंचती है जो खेत में आगे लगने वाली फसल के लिये बहुत उपयोगी होते हैं। भूसा काटने की मशीन आज किराये पर उपलब्ध है कृपया उसका उपयोग करें और इस आग लगाने के कुप्रभाव को पहचाने-जानें तथा अंगीकरण भी करें। खेत में नमी की कमी नहीं होगी। खेतों में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करके तीन- चार प्रकार के लाभ उठायें। पहला लाभ भूमि में कम से कम 9 इंच तक की गहराई में वर्षा जल को संजो कर रखा जा सकता है। जिससे आने वाली फसलों को नमी की कमी ना हो और अच्छे अंकुरण की पुख्ता पृष्ठभूमि तैयार हो सके। कड़ी धूप के कारण भूमिगत कीट-रोग, खरपतवारों के बीज ऊपर आकर समाप्त हो जायें।

उल्लेखनीय है कि अनेकों कीटों की शंखियां, रोगों की फफूंदी तथा खरपतवारों के बीज भूमिगत होते हैं और गहरी जुताई के कारण उनके बचाव का साधन समाप्त हो जाता है। जुताई के बाद बखर करके खेत समतलीकरण के प्रयास करें। ध्यान रहे खेत के ऊपरी सतह की 1 इंच भूमि सबसे अधिक उपयोगी होती है जो बरसात में ऊबड़-खाबड़ खेत होने से बह जाती है। हल्का समतलीकरण, छोटे-छोटे गड्ढों को भरना और छोटे-छोटे टीलों को खरोचना इस क्रिया को सरलता से पूरा किया जा सकता है। भूमि में प्रकाश और ताप दोनों की आवश्यकता के लिये उपयोगी होती है तो जरूरी होगा यह कार्य जल्द से जल्द निपटा दिया जाये। गहरी जुताई से फसलों के अवशेषों को मिट्टी में मिलने का अच्छा मौका मिल सकता है और वे सड़-गल कर आने वाली फसलों के लिये जैविक खाद के रूप में उपयोगी हो जाते हैं। आग लगाना ही है तो खेतों की मेढ़ों पर लगायें वहां पलते-पुसते खरपतवारों के पौध जिन पर कीट, रोग को आश्रय मिलता है समाप्त किये जा सकते हैं। स्वच्छ सपाट खेत की तैयारी लक्षित उत्पादन की सबसे अहम जरूरत होती है। वर्तमान में तो किराये पर सभी प्रकार के यंत्र शासन द्वारा उपलब्ध है। उनका अधिक से अधिक उपयोग करके भविष्य के खेत का आईना साफ स्वयं देखें और करें। समय परिवर्तनशील है आने वाला समय भरपूर उत्पादन देगा यह विश्वास मन में बिठा लें निराशा मन से बाहर फेंक दें।

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