कटाई – गहाई, भंडारण

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चार-पांच माह मौसम के कारण कशमकश के बीते आज खेतों में हंसिया लगने का समय सामने है। कटाई,गहाई, भंडारण को किसी उपन्यास का सुखद या दुखद अंत माना जाये तो गलत नहीं होगा। सुखद इसलिये कि कटाई/गहाई के बाद अनाज या तो मंडी में जाकर बेचा जाता है ताकि साल भर की जरूरत का सामान इकट्ठा किया जा सके और शेष बचे अनाज का भंडारण आने वाले वर्ष में बुआई के लिये सुरक्षित रखा जाये और दुखद इसलिये कि थोड़ी सी असावधानी से पूरे वर्ष की मेहनत चौपट होने में देरी नहीं लगती है। इसलिये यथा सम्भव खेत में खड़े अनाज की कटाई कम्बाईन द्वारा ही निपटा दी जाये। कम्बाईन के उपयोग में एक-दो सावधानियाँ बरतनी पड़ती हैं। पहली यह कि फसल अधिक से अधिक निचाई से कटाई की जाये ताकि ठूंठ लम्बे-लम्बे नहीं बच पायें। जिनको नष्ट करने के लिये आग लगाने जैसी गलत बात अपनाने पर मजबूर होना पड़े। नरवाई कतई नहीं जलाई जाये इसके अनेकों दुष्परिणाम होते हंै जो आज का कृषक अच्छी तरह से समझने लगा है। खेतों में पड़े टूटी बालियों को इकट्ठा ‘शीलाÓ चुनवाई का कार्य तुरंत कर लें ताकि अतिरिक्त अनाज मिल सके। शीला चुनाई एक ऐसा कार्य है जिससे उभयपक्ष को लाभ मिलता है। एक मजदूर जो चुनता है उसका पेट भरता है दूसरा मालिक को अतिरिक्त अनाज मिल पाता है। कम्बाईन से कटे गेहूं को खले में अच्छी तरह से सुखाना बहुत जरूरी होता ताकि दानों में अतिरिक्त नमी को समाप्त किया जा सके। अच्छी तरह से सूखा अनाज कीट, कवक से बचा रहता है। अन्य विधि से कटाई के बाद ढुलाई सावधानीपूर्वक हो पूलों को गाड़ी से गिरने से बचायें। गाड़ी, ट्रैक्टर में तिरपाल बिछाकर पूले रखें ताकि ट्रांसपोर्ट के समय अनाज रास्ते में नहीं गिरे खले में अलग-अलग प्रकार के अन्न को अलग-अलग से रखें बिखेर कर धूप लगने दें फिर गहाई करें इस बीच बिजली के उपकरण से चिनगारी अथवा बीड़ी के उपयोग से सम्भावित आग लगने की घटना के प्रति सजग रहें। उड़ावनी करते समय बार-बार देखें कि दाना कट तो नहीं रहा है। वारदानों की सफाई करके उसमें अनाज भरा जाये बुआई के लिये। अनाज का भंडारण नये बारदानों में किया जाये भंडारण और कीट, कवक का चोली दामन का साथ है जरा सी असावधानी से अनाज की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह बन जाता है। भंडारण के लिये प्रदेश तथा केन्द्रीय शासन द्वारा समुचित अनुदान की पात्रता के साथ सुविधायें भी सरलता से प्राप्त की जा सकती हैं। जिसके तहत सुरक्षित भंडारण के लिये कोठियां इत्यादि बनवाई जा सकती हैं। कहने की बात यह है कि आज साधन हर दिशा में बढऩे के लिये उपलब्ध है। साध्य को जागरूक होने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि जितना आवश्यक अन्नोत्पादन करना है उसमें अधिक महत्वपूर्ण होता है उस उत्पादित अन्न को सुरक्षित बाजार तथा भंडारण के द्वार तक ले जाना।

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