संपादकीय (Editorial)

ब्याज माफी के डिफाल्टर किसानों का विश्लेषण जरूरी

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15 मई 2023, भोपाल । ब्याज माफी के डिफाल्टर किसानों का विश्लेषण जरूरी – मध्यप्रदेश सरकार ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के 2 लाख रूपये तक के ब्याज को माफ करने का ऐलान किया है। सरकार द्वारा घोषित ब्याज माफी योजना से करीब 11 लाख 19 हजार डिफाल्टर किसान लाभांवित होंगे। इन किसानों पर बकाया ऋण पर ब्याज की राशि 2 हजार 123 करोड़ रूपये है। ब्याज की इस राशि का मप्र सरकार द्वारा भुगतान किया जायेगा। इस योजना में ऐसे डिफॉल्टर किसान, जिन पर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के 31 मार्च, 2023 की स्थिति के अनुसार मूल एवं ब्याज को मिला कर 2 लाख रूपये तक का ऋण बकाया है, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा।

ऋण पर ब्याज माफी योजना की केबिनेट में मंजूरी मिलते ही सरकार और पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू गया है। जो किसान डिफाल्टर हुये हैं, इसके लिये पक्ष कमलनाथ सरकार को दोषी बता रहे हैं जबकि विपक्ष इसका दोष शिवराज सरकार के माथे मढ़ रहे हैं। पक्ष और विपक्ष की रस्साकशी का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। प्रथम दृष्टया यह योजना किसानों के हित में तो है लेकिन सरकार को उन कारणों पर भी विचार करना चाहिये कि ये किसान डिफाल्टर क्यों और कैसे हुये? इसके लिये जिम्मेदार कौन है? इन डिफाल्टर किसानों में लघु और सीमांत किसानों की संख्या कितनी है? यह भी पता करना होगा कि क्या डिफाल्टर किसानों की संख्या कम हो रही है या बढ़ रही है? इस कारणों का खुलासा होना इसलिये भी जरूरी है कि कहीं डिफाल्टॅर होने की प्रवृत्ति में इजाफा तो नहीं हो रहा है? इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि कुछ किसान जान-बूझकर ऋण और ब्याज इसलिये जमा नहीं करते हैं कि सरकार आज नहीं तो कल, ब्याज और ऋण माफ तो कर ही देगी। इसका दुष्परिणाम डिफाल्टर के रूप में सामने आता है। एक बात यह भी देखने में आती है कि आमतौर पर अधिकांश लघु और सीमांत किसान ऋण का भुगतान समय पर कर देते हैं।

 इसकी बड़ी वजह यह भी है कि उन्हें कृषि कार्यों के सुचारू संचालन व अगली फसल के लिये ऋण की जरूरत होने के कारण वर्तमान ऋण का भुगतान करना जरूरी हो जाता है।

 किसान क्रेडिट कार्ड लघु और सीमांत किसानों के लिये तो अत्यंत उपयोगी योजना है। ऐसा भी देखा गया है कि यदि किसानों के पास ऋण भुगतान करने के लिये राशि नहीं है तो बैंक के बाहर साहूकार खड़े रहते हैं जो ऋण का भुगतान कर देते हैं जिससे किसान फिर से ऋण लेने का पात्र हो जाता है। साहूकार ऋण राशि का पांच-दस प्रतिशत रूपया किसानों से वसूल लेते हैं। लेकिन इससे किसान डिफाल्टॅर होने से बच जाता है। इसीलिये सरकार को डिफाल्टर किसानों का विश्लेषण करना चाहिये ताकि यह पता चल सकेगा कि क्या किसान जान-बूझकर डिफाल्टर तो नहीं हो रहे हैं? यदि ऐसा है तो लघु और सीमांत किसानों के लिये अलग से ऋण योजना शुरू करनी चाहिये और समय पर ऋण अदायगी पर ब्याज में भी कुछ छूट देनी चाहिये। इससे ऋण का समय पर भुगतान करने के लिये किसान जरूर प्रोत्साहित होंगे। जब से राजनीतिक दलों ने ऋण और ब्याज माफी को चुनावी घोषणा पत्रों में शामिल करना शुरू किया है, उसके बाद से सक्षम किसान भी ऋण का भुगतान नहीं करते हैं। इस मानसिकता से किसानों को उबारने की जरूरत है। यदि किसानों को उनकी फसल/उपज का सही मूल्य मिल जाये तो यह एक कारगर उपाय हो सकता है। कृषि उत्पादन की लागत में कमी करने के लिये भी गम्भीर प्रयास करने होंगे। साथ ही कृषि के साथ सह व्यवसाय को भी बढ़ावा देना होगा ताकि प्राकृतिक आपदाओं के समय किसान कठिनाई से आसानी से उबर सके। इन उपायों से किसान उतना ही ऋण लेंगे जितना वे आसानी से भुगतान कर सकेंगे. यानी जितनी लम्बी चादर होगी.. उतने ही पैर फैलायेंगे।

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