ज़ेबा : जिसका भारतीय कृषि इंतजार कर रहा था

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  • नितिन भोंसले,फील्ड डेवलपमेंट लीड
    ज़ेबा, यूपीएल

 

28 जून 2021, ज़ेबा : जिसका भारतीय कृषि इंतजार कर रहा था – भारत के पास विश्व का 10 फीसद ताजा जल है, लेकिन विश्व की जरूरतों को देखते हुए इसका उपयोग आवश्यक है। संभवत: कृषि क्षेत्र में जल उपयोगकर्ताओं का प्रभुत्व है. एक अनुमान के मुताबिक, तकरीबन 85 फीसद जल उपयोगकर्ता कृषि क्षेत्र में सक्रिय हैं. वहीं, पानी की कम उपलब्धता और कृषि क्षेत्र में मौजूद विशाल उपयोगकर्ताओं को देखते हुए उत्पादकता की वृद्धि को बनाए रखना चुनौती पूर्ण है. यह स्थिति काफी गंभीर है कि भारत की वर्तमान कृषि उत्पादकता मीट्रिक टन प्रति एकड़ से टन प्रति किलो लीटर पानी में इस्तेमाल करने पर विचार किया जाए, क्योंकि यह स्पष्ट है कि सिर्फ भूमि ही नहीं पानी, भी सीमित कारक है. यह प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान में भी रेखांकित किया गया है कि पर ड्राप, मोर क्रॉप याने प्रति बूंद, अधिक फसल का जीवंत होता नारा आगामी 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के ध्येय को साकार करता हुआ दिख रहा है.

जल का अधिकतम उपयोग

कृषि में जल-उपयोग उत्पादकता में वृद्धि तब और भी अधिक अनिवार्य हो जाती है, जब कृषि में संपाशर््िवक क्षति की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. मिट्टी में उर्वरक ढंग से अवशोषित नहीं हो पाते हैं और सतह पर ही रह जाते हैं, जिससे सिंचाई से होने वाले नुकसान की भरपाई केवल पोषक तत्व उपयोग दक्षता से पूरी नहीं होती है (नाइट्रोजन केवल 35-40 प्रतिशत ही ग्रहण होती है) लेकिन सतह और भूमिगत जल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है.

मिट्टी में नमी

ज़ेबा : जिसका भारतीय कृषि इंतजार कर रहा था

पौधे अपना पोषण मिट्टी से प्राप्त करते हैं. हालांकि, वे केवल समाधान के रूप में ऐसा करते हैं. सूखी भूमि में पोषण आपूर्ति की कड़ी टूट जाती है और पौधों पर दबाव पड़ता है. परिणामस्वरूप, ये नष्ट हो जाते हैं. प्रभावी रूप से पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी में नमी की उपस्थिति का होना आवश्यक हैं. मिट्टी में नमी की उपस्थिति पौधों को अनुकूल पोषण व वृद्धि उपलब्ध कराती है, जिससे यह आगे चलकर उत्पाद भी अच्छा प्रदान करता है.

प्राय: मृदा खराब नमी की उपलब्धता से होकर गुजरती है. चाहे आप उसकी सिंचाई खुद करें या वर्षा के माध्यम से उसकी सिंचाई हो. यहां तक की सिंचित भूमि पर भी यह अव्यवहारिक प्रतीत होगा कि मृदा को अनुकूल जल की आपूर्ति हो सके. लंबा-अंतराल व क्रमिक वर्षा की प्रक्रिया पौधे के दबाव को बढ़ा देती है. किसान उस वक्त फसलों को सींचना बंद कर देते हैं, जब इसमें प्राकृतिक वृद्धि शुरू होती है.

मिट्टी की जल धारण क्षमता

कृषि में पानी के उपयोग की उत्पादकता बढ़ाने में एक प्रमुख बाधा मिट्टी की जल धारण क्षमता है – कुछ मिट्टी दूसरों की तुलना में बेहतर हैं, लेकिन अंतत: सभी मिट्टी के प्रकार उनकी क्षेत्र क्षमता से विवश होते हैं. चाहे बारिश हो या सिंचाई, मिट्टी की क्षेत्र क्षमता से परे दिया गया पानी बह जाता है या नीचे तक पहुंच जाता है, जहां फसल की जड़ें पहुंच सकती हैं.
जड़ क्षेत्र में मिट्टी की बेहतर जल धारण क्षमता बेहतर पौध पोषण, कम रन-ऑफ और कम लीचिंग – सभी का उपयोग जल-उपयोग की बेहतर उत्पादकता के लिए ही किया जाएगा.

यूपीएल का दृष्टिकोण- सतत कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि

यूपीएल ने रबी 2015 में भारतीय कृषि समुदाय के लिए इस नवीन तकनीक की शुरुआत की है. यूपीएल भारत में मुख्यालय वाली एक वैश्विक तकनीक पौध सरंक्षण समाधान और बीज कंपनी है. यह किसानों को उच्च गुणवत्ता, आधुनिक और पारिस्थितिक रूप से अनुकूल समाधान देने की आवश्यकता को पहचानता है. यूपीएल का दृष्टिकोण हमारी बढ़ती जनसंख्या की मांगों को पूरा करते हुए सतत कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि सुनिश्चित करना है.

1 लाख किसानों द्वारा उपयोग

भारत में, ‘ज़ेबा जागरूकता कार्यक्रम’ किसानों और अन्य हितधारकों के लिए अपने उत्पाद को प्रदर्शित करने के लिए किसान क्षेत्र प्रदर्शनों के आसपास केंद्रित है. आज लगभग 1 लाख किसान राजस्थान, हरियाणा, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों में कपास, सरसों, मूंगफली, जीरा, गन्ना, लहसुन, अदरक, हल्दी, आलू, प्याज, टमाटर, मिर्च, अनार, साइट्रस, केला, अंगूर, तरबूज, ककड़ी, , धान और सब्जी नर्सरी, अरहर , चना , फूल जैसी फसलों के लिए ज़ेबा का उपयोग करते हैं.

कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में प्रदर्शन

इसके अलावा,राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश तेलंगाना, कर्नाटक समेत तमिलनाडु आदि राज्यों में कपास, गन्ना, मूंगफली, सरसों, अरहर, सोयाबीन, आलू, प्याज, मिर्च, केला, जैसी फसलों में आईसीएआर सहित प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के साथ काम किया गया है.

जेबा प्रदर्शन के उल्लेखनीय परिणाम
  • अनुसंधान केन्द्रों के परिणाम ने औसत 10-15 प्रतिशत उपज सुधार बनाम नियंत्रण दिखाया । इसके अलावा, उपज वृद्धि और गुणवत्ता दोनों में सुधार के कारण कृषि उपज की बेहतर विपणन क्षमता बढ़ेगी जिससे कृषि आय में वृद्धि होगी।
  • ज़ेबा ने परीक्षण के लिए प्याज, आलू और गन्ना फसल में प्रयोग किया था- सिंचाई की संख्या को 25 प्रतिशत कम किया गया. इस कमी के बावजूद, ज़ेबा नियंत्रण क्षेत्र में उपज बेहतर थी.
  • किसानों की प्रतिक्रिया और अनुसंधान के परिणाम विभिन्न फसलों, मिट्टी और कृषि-जलवायु के आधार पर स्पष्ट रूप से ज़ेबा की उपयोगिता और लाभों का वर्णन करते हैं.
उपयोग की विधि

जेबा एक दानेदार उत्पाद है, जो कि मृदा या भूमि में प्रयोग के लिए उपयुक्त है. सर्वोत्तम परिणामों के लिए, ज़ेबा को रोपण/बुवाई के समय जड़ में मिट्टी में लगाने की सिफारिश की जाती है. ज़ेबा उपयोग की विशिष्ट दर खेत फसलों के लिए 5 किलोग्राम/एकड़ है. फसल में अधिक विशिष्ट प्रयोगों के लिए यूपीएल प्रतिनिधि के साथ संपर्क कर सकते हैं.
ज़ेबा को कृषि व्यवसाय में विभिन्न प्रकार के प्रयोगों के रूप में लाभकारी पाया गया, जैसे कि मौसमी क्षेत्र की फसलें, बारहमासी बागवानी की फसलें, वृक्षारोपण की फसलें, फसल की नर्सरी, कुटीर पौधे, वानिकी, लॉन और बगीचे आदि.

यूपीएल का ज़ेबा

बेहतर जल धारण क्षमता को बनाए रखने के लिए – एक अभिनव प्रौद्योगिकी, ज़ेबा पर्यावरण के अनुकूल स्टार्च-आधारित व उच्च शोषक है. ज़ेबा अपने वजन से कई गुना ज्यादा पानी को अवशोषित करता है. जेबा पौधे की जरूरत के अनुसार, जल और पोषक तत्वों को अवशोषित, मुक्त व पकड़ कर रखता है. फसलों की वृद्धि के दौरान जेबा बेहद ही कारगर है, क्योंकि यह अन्य पौधों के अवशेषों की तरह ही मिट्टी में प्राकृतिक तरीके से सड़ जाता है. ज़ेबा पीएच तटस्थ और विषहीन है. इसका मतलब यह मिट्टी और फसलों के लिए हानिरहित है.जेबा उपयोग करने वाले किसानों के लिए प्रमुख तीन लाभ – जैसे, जल, जड़ क्षेत्र पोषण पहुंचाना व मृदा स्वास्थ्य में सुधार करना शामिल है.

आमदनी में वृद्धि

मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना,जड़ क्षेत्र में बेहतर नमी और पोषक तत्व पौधों की मांग को बढ़ाते हैं, जिससे उपज अधिक होती है और उपज की बेहतर गुणवत्ता होती है.
कृषि आदान की दक्षता में सुधार – ज़ेबा का उपयोग करने वाले किसान उपज और गुणवत्ता से समझौता किए बिना पानी और उर्वरक जैसे दुर्लभ और महंगे कृषि आदान का समुचित उपयोग कर सकते हैं.
पर्यावरण बोनस – रन-ऑफ और पानी और पोषक तत्वों की लीचिंग की जाँच पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार करती है और प्रदूषण के प्रमुख स्रोत को समाप्त करती है.
इसके अलावा, ज़ेबा स्टार्च से उत्पन्न होता है – यह मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है और कार्बनिक पदार्थों को- जीवित चीजों के लिए एक स्वस्थ स्थान उपलब्ध कराती है.

2019 में ‘फसल कटाई दिवस’ पर जेबा प्रदर्शन के संदर्भ में किसानों की प्रतिक्रिया कुछ इस प्रकार है –

फसल  खेतों की   किलोग्राम/एकड़  आय
  संख्या    
मूंगफली  25 568.1 22723
कपास  6 260 13022
आलू  20 1761.3 35226
जीरा  4 123.8 18507
लहसुन  10 1115 44604
सरसों  11 309.8 13013
प्याज  12 3597.3 28779
सुपारी 2 198 81180
अदरक  2 4750 194750
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