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फसल की खेती (Crop Cultivation)

गाजर की टॉप हाई-यील्ड किस्में: सिर्फ 85 से 110 दिन में होंगी तैयार, 35 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलेगी पैदावार

03 अगस्त 2026, नई दिल्ली: गाजर की टॉप हाई-यील्ड किस्में: सिर्फ 85 से 110 दिन में होंगी तैयार, 35 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलेगी पैदावार – देशभर में सर्दियों के मौसम में गाजर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यह जड़ वाली प्रमुख सब्जी फसल है, जिससे किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी के लिए किसान अब हाई-यील्ड किस्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं। गाजर की प्रमुख किस्मों को उष्णवर्गीय और शीतोष्णवर्गीय दो श्रेणियों में बांटा जाता है। यहां जानिए उष्णवर्गीय श्रेणी की उन प्रमुख किस्मों के बारे में, जो कम समय में तैयार होकर 35 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।

1. पूसा वसुधा

पूसा वसुधा उष्णवर्गीय श्रेणी की प्रमुख किस्म है। यह फसल 85 से 90 दिन में तैयार हो जाती है और 35 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देने की क्षमता रखती है। अधिक उत्पादन के कारण यह किसानों के बीच लोकप्रिय किस्मों में शामिल है।

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2. पूसा रूधिरा

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पूसा रूधिरा भी उष्णवर्गीय श्रेणी की किस्म है। इसकी फसल लगभग 90 दिन में तैयार होती है। यह किस्म 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है और बेहतर पैदावार के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

3. पूसा अशिता

पूसा अशिता गहरे बैंगनी रंग की किस्म है, जिसे काली गाजर के नाम से भी जाना जाता है। यह किस्म 100 से 110 दिन में तैयार होती है और इसकी औसत उपज 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर है। इसका उपयोग विभिन्न खाद्य उत्पादों और प्रसंस्करण में भी किया जाता है।

4. पूसा कुल्फी

पूसा कुल्फी पीले रंग की उष्णवर्गीय गाजर की किस्म है। यह लगभग 90 से 100 दिन में तैयार हो जाती है। इसकी औसत पैदावार 25 टन प्रति हेक्टेयर तक होती है।

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