फसल की खेती (Crop Cultivation)

लीची फसल पर मंडराया फल बेधक कीट का खतरा, नियंत्रण के लिए किसान अपनाएं ये जरूरी उपाय  

01 मई 2026, नई दिल्ली: लीची फसल पर मंडराया फल बेधक कीट का खतरा, नियंत्रण के लिए किसान अपनाएं ये जरूरी उपाय – गर्मी का मौसम शुरू होते ही लीची के बागानों में फलों का विकास तेजी से होने लगता है, लेकिन इसी दौरान कीटों का खतरा भी बढ़ जाता है। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित National Litchi Research Centre द्वारा लीची किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि फल बेधक कीट (Fruit Borer) इस समय लीची फसल के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

फल बेधक कीट से बढ़ता नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार फल बेधक कीट लीची के फलों में छोटा छेद करके अंदर प्रवेश करता है और गूदे को नुकसान पहुंचाता है। बाहर से फल सामान्य दिखाई देता है, लेकिन अंदर से वह खराब होने लगता है।

इस संक्रमण के कारण फल समय से पहले पेड़ से गिरने लगते हैं और सड़न की समस्या बढ़ जाती है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह कीट फसल को 60 से 80 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता है।

एडवाइजरी: बचाव के मुख्य उपाय

लीची बागानों को इस कीट से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने कई महत्वपूर्ण उपाय सुझाए हैं। सबसे पहले बागानों में गिरे हुए सड़े-गले फलों को तुरंत हटाकर नष्ट करना जरूरी है, ताकि कीट का प्रसार रोका जा सके। इसके साथ ही फल लगने के बाद उन्हें कागज या कपड़े की थैली से ढकने (बैगिंग) की सलाह दी गई है, जो एक प्रभावी तरीका माना जाता है।

कीटों की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है, जिससे कीट की पहचान और नियंत्रण आसान हो जाता है।

कीटनाशक और पोषक तत्वों का उपयोग

विशेषज्ञों ने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर किसान कीटनाशकों का उपयोग कर सकते हैं। इनमें थियाक्लोप्रिड और लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन का मिश्रण या नोवल्यूरॉन और इंडोक्साकार्ब आधारित घोल प्रभावी माना गया है।

इसके साथ ही घुलनशील बोरॉन (21%) का छिड़काव करने से फल का विकास बेहतर होता है, गुणवत्ता बढ़ती है और फल झड़ने की समस्या कम होती है। बोरॉन का उपयोग कीटनाशक के साथ मिलाकर भी किया जा सकता है।

अंतिम छिड़काव की सलाह

फसल को अंतिम चरण में सुरक्षित रखने के लिए तुड़ाई से 10–12 दिन पहले अंतिम छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके लिए इमामेक्टिन बेंजोएट, स्पाइनोसेड या स्पिनेटोरम जैसे सुरक्षित कीटनाशकों का उपयोग विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।

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