गेहूं की फसल बर्बाद कर देंगे ये खतरनाक कीट और खरपतवार, किसान बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
08 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: गेहूं की फसल बर्बाद कर देंगे ये खतरनाक कीट और खरपतवार, किसान बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय – देश के अधिकांश राज्यों में गेहूं की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यह अभी भी जारी है। इस बीच कई जगहों पर गेहूं की फसल में कीट, रोग और खरपतवार की समस्या सामने आ रही है, जिससे किसानों की मेहनत और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने किसानों को इन समस्याओं से बचाव के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
गेहूं के लिए खतरनाक कीट और उनके बचाव के उपाय
1. दीमक: देरी से बोई गई फसलों में दीमक अधिक सक्रिय होती है। यह फसल को नुकसान पहुंचाकर उत्पादन घटा सकती है।
बीज उपचार: गेहूं की फसल में कीटों से बचाव के लिए बीज उपचार अत्यंत प्रभावी उपाय है। इसके लिए बीज को क्लोरोपाइरीफॉस @ 0.9 ग्राम प्रति किलो बीज, थायोमेथोक्साम 70 डब्ल्यूएस @ 0.7 ग्राम प्रति किलो बीज या फिप्रोनिल (रीजेंट 5 एफएस) @ 0.3 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित किया जा सकता है। बीज उपचार से दीमक और अन्य कीटों का प्रभाव कम होता है और फसल की अच्छी वृद्धि सुनिश्चित होती है।
सिंचाई: समय पर बोई गई फसलों में दीमक का आक्रमण दिखे तो सिंचाई करना फायदेमंद है।
2. गुलाबी तना छेदक कीट: कम जुताई वाले खेतों में अधिक पाया जाता है।
उपाय: कीट दिखाई देते ही क्विनालफॉस (ईकालक्स) 800 मिली/एकड़ का पत्तियों पर छिड़काव करें। सिंचाई भी नुकसान कम करने में मदद करती है।
3. धारीदार रतुआ (पीला/भूरा रतुआ): फसल में शुरुआती पीलेपन को कभी-कभी रतुआ समझ लिया जाता है।
उपाय: किसी संदेह होने पर तुरंत स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से पुष्टि कराएँ।
गेंहू की फसल को खतरनाक खरपतवार से कैसे बचाए?
1. संकरी पत्ती वाले खरपतवार:
नियंत्रण के लिए: क्लोडिनाफॉप 15 डब्ल्यूपी @ 160 ग्राम/एकड़ या पिनोक्साडेन 5 ईसी @ 400 मिली/एकड़।
2. चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार:
नियंत्रण के लिए: 2,4-डी ई 500 मिली/एकड़ या मेटसल्फ्युरॉन 20 डब्ल्यूपी @ 8 ग्राम/एकड़।
3. संकरी और चौड़ी पत्ती वाले दोनों खरपतवार:
सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 डब्ल्यू जी @ 13.5 ग्राम/एकड़ या सल्फोसल्फ्यूरॉन + मेटसल्फ्युरॉन 80 डब्ल्यू जी @ 16 ग्राम/एकड़ का मिश्रण पहली सिंचाई से पहले या 10-15 दिन बाद।
वैकल्पिक: मेसोसल्फ्यूरॉन आयोडोसल्फ्युरॉन 3.6% डब्ल्यूडीजी @ 160 ग्राम/एकड़।
4. अगेती बुवाई वाले उच्च उपज वाले गेहूं: क्लोरमेक्वाट क्लोराइड 50% एसएल का पहला छिड़काव प्रथम नोड अवस्था (50-55 डीएएस) पर 160 लीटर/एकड़ पानी में करें।
5. फैलेरिस माइनर (कनकी/गुल्ली डंडा): बुवाई के 0-3 दिन बाद पाइरेट्स सल्फोन 85 डब्ल्यू जी @ 60 ग्राम/एकड़ अकेले या पेंडिमेथालिन 30 ईसी @ 2 लीटर/एकड़।
वैकल्पिक मिश्रण: एक्लोनिफेन 450 + डाइफ्लुफेनिकन 75 + पाइरोक्सासल्फोन 50 @ 800 मिली/एकड़, पहली सिंचाई के 10-15 दिन बाद क्लोडिनाफॉप + मेट्रिब्यूज़िन 12+42% डब्ल्यूपी @ 200 ग्राम/एकड़।
किसानों के लिए जरूरी सलाह:
गेहूं की फसल का नियमित निरीक्षण करें। बीज उपचार और समय पर छिड़काव से कीट और रोगों का प्रभाव कम किया जा सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत कृषि विशेषज्ञ या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
इस तरह समय रहते उपाय अपनाने से गेहूं की फसल को कीट, रोग और खरपतवार से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है।
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