फसल की खेती (Crop Cultivation)

हाइड्रोपोनिक खेती का भविष्य

लेखक- अन्नूरानी, सहायक प्रोफेसर, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद

09 जुलाई 2024, भोपाल: हाइड्रोपोनिक खेती का भविष्य – हाइड्रोपोनिक खेती, जिसे मृदा रहित खेती भी कहा जाता है, एक ऐसी नवीनतम कृषि पद्धति है जिसमें पौधों को मिट्टी के बिना ही उगाया जाता है। इस पद्धति में पौधों को पोषक तत्वों के घोल में उगाया जाता है। यह विधि विशेष रूप से उन स्थानों के लिए उपयोगी है जहां मिट्टी की गुणवत्ता खराब है या जहां भूमि की कमी है।

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हाइड्रोपोनिक खेती क्या है?

हाइड्रोपोनिक खेती एक वैज्ञानिक और आधुनिक खेती पद्धति है, जिसमें पौधों की जड़ों को पानी में रखकर पोषक तत्व दिए जाते हैं। इस पद्धति में पौधों को आवश्यक पोषक तत्व पानी के माध्यम से सीधे जड़ों तक पहुंचाए जाते हैं। इस विधि में जल का उपयोग बहुत कम होता है और पौधों की वृद्धि तेजी से होती है।

हाइड्रोपोनिक खेती के लाभ

  • पारंपरिक खेती की तुलना में हाइड्रोपोनिक खेती में 90 प्रतिशत तक कम पानी की आवश्यकता होती है। यह पद्धति उन क्षेत्रों में बेहद फायदेमंद है जहां जल की कमी है।
  • हाइड्रोपोनिक खेती में पौधों की वृद्धि दर तेजी से होती है, जिससे उत्पादन भी अधिक होता है। इस पद्धति में पौधों को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं जिससे वे तेजी से बढ़ते हैं।
  • शहरों में जहां भूमि की कमी होती है, वहां हाइड्रोपोनिक खेती एक बेहतरीन विकल्प है। इस पद्धति का उपयोग कर छोटे स्थानों पर भी खेती की जा सकती है।
  • हाइड्रोपोनिक खेती में मिट्टी का उपयोग नहीं होने के कारण कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती। इससे उत्पादित फसलें अधिक स्वच्छ और सुरक्षित होती हैं।
  • इस पद्धति में नियंत्रित वातावरण के कारण साल भर फसल उगाई जा सकती है, जिससे बाजार में ताजे फल और सब्जियों की निरंतर उपलब्धता बनी रहती है।

हाइड्रोपोनिक खेती की चुनौतियाँ

  • हाइड्रोपोनिक सिस्टम की स्थापना की प्रारंभिक लागत पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक होती है। लेकिन दीर्घकालिक लाभों को देखते हुए यह एक निवेश के रूप में देखा जा सकता है।
  • हाइड्रोपोनिक खेती को सफलतापूर्वक करने के लिए तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। किसानों को इस पद्धति के बारे में सही प्रशिक्षण और जानकारी की आवश्यकता होती है।
  • हाइड्रोपोनिक सिस्टम में पौधों की जड़ों तक पोषक तत्वों के घोल को पहुंचाने के लिए पंप और अन्य उपकरणों की आवश्यकता होती है, जिससे बिजली की खपत बढ़ती है।

निष्कर्ष

हाइड्रोपोनिक खेती कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह न केवल जल और भूमि की कमी की समस्याओं का समाधान प्रदान करती है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है। भारत जैसे देश में, जहां कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है, हाइड्रोपोनिक खेती भविष्य की खेती के रूप में उभर सकती है। इसके लिए आवश्यक है कि किसानों को इस पद्धति के बारे में अधिक जानकारी और प्रशिक्षण मिले, ताकि वे इसका सही उपयोग कर सकें और अधिक लाभ कमा सकें। अंतत:, हाइड्रोपोनिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि सही ढंग से और व्यापक स्तर पर अपनाई जाए, तो हाइड्रोपोनिक खेती कृषि क्षेत्र में एक नई दिशा और नया उछाल ला सकती है।

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