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फसल की खेती (Crop Cultivation)

गन्ना नकदी फसल लेकिन वैज्ञानिक विधियों से करें तो ज्यादा फायदा

06 फरवरी 2026, नई दिल्ली: गन्ना नकदी फसल लेकिन वैज्ञानिक विधियों से करें तो ज्यादा फायदा – कृषि विशेषज्ञों की ही नहीं बल्कि उन किसानों का भी यह मानना है कि गन्ना एक नकदी फसल है लेकिन विशेषज्ञों का यह कहना है कि यदि गन्ने की खेती वैज्ञानिक विधियों से की जाए तो गन्ना उत्पादक किसानों को और अधिक फायदा मिल सकता है.

गन्ने की सफल खेती के लिए उपयुक्त जलवायु, उपजाऊ मिट्टी, सही समय पर बुवाई और उन्नत किस्मों का चयन अत्यंत आवश्यक है. संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग, समयानुसार सिंचाई तथा खरपतवार नियंत्रण फसल की अच्छी बढ़वार में सहायक होते हैं. बीज गन्ने का सही चुनाव, उसका उपचार और भूमि की उचित तैयारी करने से अंकुरण प्रतिशत बढ़ता है.

साथ ही कीट एवं रोग प्रबंधन, मिट्टी चढ़ाना, गुड़ाई और समय पर बंधाई जैसी क्रियाएं गन्ने की गुणवत्ता सुधारती हैं. इन सभी वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं और खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं.

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बुवाई का उपयुक्त समय

शरद काल – मध्य सितम्बर से अक्टूबर.

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बसंतकाल

पूर्वी क्षेत्र – मध्य जनवरी से फरवरी.

मध्य क्षेत्र – फरवरी से मार्च.

पश्चिमी क्षेत्र – मध्य फरवरी से मध्य अप्रैल.

चुनाव व मात्रा

रोग व कीट रहित, प्रचुर मात्रा में खाद वर पानी प्राप्त खेत (पौधाशाला) से शुद्ध बीज का चुनाव करें. गन्ने के ऊपरी 1/3 भाग का जमाव अपेक्षाकृत अच्छा होता है. गन्ने की मोटाई के अनुसार 50-60 कुन्तल (लगभग 37.5 हजार) तीन-तीन आँख के पैड़े प्रति हेक्टेयर) बीज की आवश्यकता पड़ती है. देर से बुवाई करने पर उपरोक्त का डेढ गुना (56.25 हजार तीन-तीन आँख के टुकड़े) बीज की आवश्यकता होती है.

बीज उपचार

(अ) उष्णोपचार: गर्म जल में 52 डिग्री से.ग्रे. पर दो घन्टे तक अथवा सर्द गर्म हवा यन्त्र में 54 डिग्री से.ग्रे. पर 2.30 घंटे तक पैडों को उपचारित करना चाहिए. फसल अवशेष को मत जलाओं, प्रकृति कहे उसे खेत में मिलाओ है.

(ब) रासायनिक उपचार: बाविस्टीन की 112 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की 112 लीटर पानी में घोल बनाकर गन्ने के पेड़ों को 10 मिनट डुबोकर उपचारित करना चाहिए.

सिंचाई

प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में 4-5 मध्य क्षेत्र में 5-6 तथा पश्चिमी क्षेत्र में 7-8 सिंचाई (दो सिंचाई वर्षो उपरान्त करना लाभप्रद पाया गया है.

गुड़ाई

गन्ने के पौधों के जड़ों की नमी व वायु उपलब्ध कराने तथा खर-पतवार नियंत्रण के दृष्किोण से ग्रीष्मकाल से प्रत्येक सिंचाई के बाद एक गुड़ाई कस्सी/कल्टीवेटर से करना लाभप्रद रहता है.

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