फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान में पत्ता लपेटक कीट से फसल बचाएं, पूसा संस्थान की ये तकनीकें अपनाएं

17 सितम्बर 2025, नई दिल्ली: धान में पत्ता लपेटक कीट से फसल बचाएं, पूसा संस्थान की ये तकनीकें अपनाएं – धान की फसल किसानों की मेहनत और आजीविका का आधार है, लेकिन पत्ता लपेटक (लीफ फोल्डर) जैसे कीट इसकी पैदावार को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान IARI, पूसा के विशेषज्ञों ने इस कीट के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और कारगर उपाय सुझाए हैं। अगर आप धान की खेती करते हैं, तो ये जानकारी आपकी फसल को सुरक्षित रखने और पैदावार बढ़ाने में मददगार साबित होगी। आइए जानते हैं, पत्ता लपेटक कीट से कैसे निपटें।

पत्ता लपेटक कीट: धान का खामोश खतरा

पत्ता लपेटक (लीफ फोल्डर) उत्तर भारत में धान की फसल को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कीट है। पूसा संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस कीट का व्यस्क रूप (शलक) पत्तियों पर अंडे देता है। इन अंडों से निकलने वाली सुंडियाँ (लार्वा) पत्तियों को मोड़कर उनके अंदर के ऊतकों को खा लेती हैं। इससे पत्तियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, और अगर प्रकोप बढ़ जाए, तो खेत दूर से सफेद दिखने लगता है। यह नुकसान पैदावार को 15-25% तक कम कर सकता है।

पत्ता लपेटक से बचाव के वैज्ञानिक उपाय

IARI के विशेषज्ञों ने पत्ता लपेटक कीट को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए हैं:

  1. प्रकाश ट्रैप का उपयोग: व्यस्क कीटों को पकड़ने के लिए खेत में प्रकाश ट्रैप (लाइट ट्रैप) लगाएँ। एक प्लास्टिक टब में पानी और थोड़ा कीटनाशक मिलाएँ, फिर इसके ऊपर बल्ब जलाएँ। कीट रोशनी की ओर आकर्षित होकर पानी में गिरकर मर जाएँगे। यह पर्यावरण-अनुकूल और प्रभावी तरीका है।
  2. निगरानी और आर्थिक दहलीज स्तर: कीटों की संख्या तब खतरनाक हो जाती है जब प्रति पौधा दो क्षतिग्रस्त पत्तियाँ (Economic Threshold Level – ETL) दिखें। इस स्तर पर कीटनाशकों का उपयोग जरूरी हो जाता है।
  3. कीटनाशकों का सही उपयोग: जब कीटों का प्रकोप आर्थिक दहलीज स्तर तक पहुँच जाए, तो निम्नलिखित कीटनाशकों का उपयोग करें:
    • फिप्रोनिल 0.6% जीआर: 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
    • क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5 SC: 60 मिलीलीटर प्रति एकड़।
    • इसोप्रोक्लोरोन 18.1 SC: 40 मिलीलीटर प्रति एकड़।
    • टेट्रानिलिप्रोल 18.18 SC: 100 मिलीलीटर प्रति एकड़।

इन कीटनाशकों का छिड़काव सावधानी से करें और आसमान साफ होने पर ही उपयोग करें, ताकि दवा का असर अधिक हो।

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पूसा संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि पत्ता लपेटक कीट से बचाव के लिए खेतों की नियमित निगरानी जरूरी है। पत्तियों पर मोड़ने के लक्षण या सुंडियों की मौजूदगी की जाँच करें। शुरुआती अवस्था में ही उपाय करने से नुकसान को कम किया जा सकता है। प्रकाश ट्रैप जैसे पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को प्राथमिकता दें, ताकि रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम हो। साथ ही, खेत में साफ-सफाई बनाए रखें और क्षतिग्रस्त पत्तियों को हटाकर नष्ट करें।

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