धान में भूरा माहो की रोकथाम

Share
  • मायाविनी जेना , टोटन अदक,आर.के. साहू
    , सोमनाथ एस. पोखरे , जे. बर्लिनर
    भाकृअनुप- केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान

 

21  अगस्त 2021, धान में भूरा माहो की रोकथाम – देश में धान की खेती की जाने वाले लगभग सभी भू-भागों में भूरा पौध माहू नीलपर्वत लूगेंस स्टाल (होमोप्टेरा डेल्फासिडै) धान का एक प्रमुख नाशक कीट है। हाल में पूरे एशिया में इस कीट का प्रकोप गंभीर रूप से बढ़ा है, जिससे धान की फसल में भारी नुकसान हुआ है। ये कीट तापमान एवं नमी की एक विस्तृत सीमा को सहन कर सकते हैं। प्रतिकूल पर्यावरण में तेजी से बढ़ सकते हैं, ज्यादा आक्रमक कीटों की उत्पत्ति होना कीटनाशक प्रतिरोधी कीटों में वृद्धि होना, बड़े पंखों वाले कीटों का आविर्भाव तथा लंबी दूरी तय कर पाने के कारण इनका प्रकोप बढ़ रहा है। धान की वैज्ञानिक तकनीक से खेती कैसे करें, की जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें- धान (चावल) की खेती कैसे करें।

संवेदनशील कारक
  • अंडे एवं शिशु कीट के विकास के लिए 30 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त है। कीट के जीवित रहने के लिए 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान तथा 15 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान प्रतिकूल परिस्थिति है।
  • भूरा पौध माहू के विकास के लिए 40 से 75 प्रतिशत आपेक्षिक आर्द्रता अनुकूलतम है।
लक्षण एवं पहचान
  • यह कीट भूरा रंग का, आकार में छोटा है, यह फुदकता है और कूदता है। चूंकि ये कीट पौधों के मूल में पानी के सतह से थोड़ा सा ऊपर पत्तों के घने छतरी के नीचे रहते हैं, किसानों को इन कीटों के बारे में शीघ्र पता नहीं लग पाता है तथा इनका नियंत्रण उपाय अधिक जटिल हो जाता है, जिसके फलस्वरूप प्रबंधन प्रणाली जटिल हो जाती है।
  • अंड निक्षेपण के 4 से 10 दिन के बाद अंडों का स्फुटन होता है। कीट अपने विकास अवधि के दौरान पांच अर्भकीय इंस्टार से गुजरती हैं। साधारणतया कीट सफेद से भूरे रंग में बदल जाते हैं।
  • अर्भकीय विकास में लगभग 12 से 14 दिन लगते हैं, और कीट भूरा या सफेद वयस्क हो जाता हैं। सामान्य परिस्थिति में नर और मादा दोनों पंखरहित (ब्रेकिप्टरोस) होते हैं तथा भूरा पौध माहू वयस्क होने के 2 से 3 दिन बाद मादा अंडे देना आंरभ करती हैं। जब एक फसल क्षेत्र में कीट संख्या अधिक हो जाती है, तब पंखदार (माक्रोप्टेरोस) कीट स्थान बदलती हैं और नए फसल क्षेत्रों को प्रकोपित करती है।
पौधों में भूरा पौध माहू संक्रमण
  • ये कीटें पौधों के मूल में पानी के सतह से थोड़ा सा उपर रहती हैं।
  • भूरा पौध माहू धान पौधों से तरल पदार्थ एवं पौषक तत्व लगातार चूसते हैं जिसके कारण आरंभ में पौधे पीले हो जाते हैं।
  • पौधों पर पीलापन एवं भूरापन होता है तथा वे धीरे-धीरे सूख जाते हैं। फसल नुकसान के इस लक्षण को हापर बर्न के नाम से जाना जाता है।
समन्वित रोकथाम
  • समन्वित कीट रोकथाम पद्धति सर्वोत्तम नाशक कीट प्रबंधन रणनीति प्रदान करता है तथा किसानों की आर्थिक एवं उपलब्ध संसाधन पर करता है। रोकथाम कार्यकलापों को असरदार बनाने के लिए लगातार निगरानी की आवश्यकता है।
  • उपलब्धता के आधार पर बिन-रसायनिक पद्धति अपनाना चाहिए क्योंकि इससे बिना किसी खर्च के साथ-साथ प्रयोगकर्ता एवं पर्यावरण के लिए सुरक्षित है।
  • फसल के मूल की ओर पर्णीय छिडक़ाव करें तथा कीटों की संख्या को देखकर 7 से 10 दिनों के बाद इसका प्रयोग दोहरायें। हाथों से छिडक़ाव किये जाने वाले पर्णीय छिडक़ाव की मात्रा 500 लीटर प्रति हेक्टेयर तथा शक्ति चालित छिडक़ाव के मामले में इसकी मात्रा 200 लीटर प्रति हेक्टेयर हो।
  • फोस्फोमाइडन, फोरेट, मिथाइल पाराथियन तथा सिंथेटिक पाइरिथ्राइड्स जैसे कीटनाशकों के प्रयोग मत करें, क्योंकि अध्ययन से पता चला है कि इन रसायनों के प्रयोग से कीटों का नियंत्रण नहीं हो पाता है।

कीट नियंत्रण के उपाय –
पारंपरिक पद्धति
  • कीट पीडि़त खेतों से जल निकासी, उर्वरक का उचित मात्रा में प्रयोग, नत्रजन उर्वरक का भागों में प्रयोग आदि को अपनाने पर भूरा पौध माहू की संख्या में कमी होती है।
  • अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में प्रत्येक 8 या 10 पंक्तियों के बाद मार्ग निर्माण से कीटों की संख्या को कम करने में सहायता मिलती है तथा अत्यधिक जरूरी परिस्थिति में कीटनाशकों का छिडक़ाव करने में भी सुविधा होती है। कीट प्रकोप पर निगरानी रखना अत्यंत जरूरी है।
  • संवेदनशील किस्म की खेती उसी क्षेत्र में लगातार नहीं करें। उनके स्थान पर प्रतिरोधी या सहिष्णु किस्मों या धान के अतिरिक्त किसी अन्य फसल की खेती करें।
रसायनिक नियंत्रण
  •  धान की खेती में जब कीटों की संख्या 5 से 10 कीट प्रति पूंजा हो जाती है, तब फसल में रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें।
  • कम मात्रा में उच्च क्षमता के कीटनाशक जैसे इमिडाक्लोप्रिड, थायोमेथोक्सम का 125 मिलीलीटर सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से तथा इथोफेनप्राक्स, फिप्रोनिल की 1000 मिलीलीटर सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जा सकता है।
  • प्रयोग किए जाने वाले कीटनाशकों जैसे क्लोरोपाइरीफॉस, की 1.5 लीटर प्रति हेक्टर मात्रा, पर्णीय छिडक़ाव के रूप में तथा कार्बोफ्यूरान दानेदार 33 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर दर पर प्रयोग करने से इस नाशक कीट का नियंत्रण अच्छी तरह किया जा सकता है।
Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.