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फसल की खेती (Crop Cultivation)

बरसात के बाद (रबी) ज्वार लगायें

04 जनवरी 2023,  भोपाल । बरसात के बाद (रबी) ज्वार लगायें –

भूमि की तैयारी : गर्मियों में मोल्ड बोर्ड हल से एक गहरी जुताई के बाद 3 से 4 हैरो से जुताई करें। अच्छे बीज क्यारी प्राप्त करने और खरपतवार मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए जल प्रति धारण में सुधार करने के लिए 10 3 10 मीटर के कंपार्टमेंटल मेड़ की सिफारिश की जाती है।

बुवाई का तरीका और समय

बीज को मिट्टी में 5-7 सेमी गहराई पर सीड ड्रिल द्वारा बोया जाता है। बीज बुआई के बाद सीड ड्रिल से एक हैरो से ढक दिया जाता है। इसकी बुआई ट्रैक्टर चालित सीड ड्रिल से भी की जाती है।

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बुवाई समय

रबी ज्वार की बुवाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़े से अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक है।

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बीज दर, दूरी और पौधों की संख्या

बीज दर 8-10 किग्रा/हेक्टेयर या 3 किग्रा/ एकड़ की सिफारिश की जाती है। कतार से कतार की दूरी 45 सेमी और कतार में पौधे की दूरी 15 सेमी, वर्षा आधारित परिस्थितियों में पौधों की संख्या 1.35 लाख/हेक्टेयर और सिंचित स्थिति में 1.5 से 1.8 लाख/हेक्टेयर (15-20 पौधे प्रति वर्ग मीटर)।

पोषक तत्व प्रबंधन

बारानी (उथली से मध्यम मिट्टी) स्थितियों के लिए, बेसल खुराक के रूप में 40:20:00 किलोग्राम एनपीके/हेक्टेयर दें। बारानी के लिए (गहरी मिट्टी) की स्थिति, बेसल के रूप में 60:30:00 किग्रा एनपीके/हेक्टेयर दें। सिंचित दशाओं के लिए 80:40:40 किग्रा एनपीके/ हेक्टेयर।

अंतर खेती और खरपतवार नियंत्रण

खरपतवार वृद्धि को रोकने के लिए बुवाई के 3, 5 और 7 सप्ताह बाद 2 या 3 बार अंतर-जुताई करें। जो टॉप स्वॉइल मल्च करके मिट्टी की नमी को संरक्षित करने में भी मदद करता है।

खरपतवार प्रबंधन

मिट्टी पर छिडक़ाव के रूप में एट्राजिन ञ्च 0.5 किग्रा ए.आई/हे. प्रयोग किया जा सकता है। बुवाई के 48 घंटे के भीतर तुरंत छिडक़ाव करें।

जल प्रबंधन

मध्यम-गहरी से गहरी मिट्टी में सिंचित दशाओं में तीन सिंचाइयां – पहली अंकुरण पर, दूसरी पुष्पगुच्छ आरंभ होने पर और तीसरा दाना भरने की अवस्था में आवश्यक है। अधिकतम सिंचाई 5 बार हो सकती है। जो फसल की बढ़वार की स्थिति पर निर्भर है। जिसमें 35, 55, 75, 85 एवं 105 दिन की बुवाई हो गई हो। सीमित पानी की स्थिति में एक सिंचाई पुष्पन अवस्था में मिट्टी में नमी को देख कर करें।

फसल आधारित फसल प्रणाली

रबी ज्वार को बरसात (खरीफ) ज्वार के बाद परती की मध्यम से गहरी मिट्टी में उगाया जा सकता है जहां वर्षा अधिक होती है। हालांकि, काले चने/हरे की दोहरी फसल चना/लोबिया (चारा) और रबी ज्वार की सिफारिश की जाती है। सिंचित परिस्थितियों में सोयाबीन + रबी ज्वार अनुक्रम फसल को लाभदायक पाया गया है। गहरी मिट्टी में 4:2 या 6:3 के अनुपात में कुसुम के साथ ज्वार की इंटरक्रॉपिंग की सिफारिश की जाती है।