फसल की खेती (Crop Cultivation)

नीम कड़वा है पर है बहुत उपयोगी

नीम कड़वा है पर है बहुत उपयोगी

नीम कड़वा है पर है बहुत उपयोगी – नीम का उपयोग फसलों में लगने वाले अनेक दुश्मन कीटों को मारने व दूर भगाने में कारगर है। जैविक खेती में नीम का अत्यधिक महत्व होता है। अपनी खेती में नीम का प्रयोग कर हम रसायनिक कीटनाशकों के लगातार एवं अनियंत्रित प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं, साथ ही कम से कम लागत में कीटों को स्थाई रुप से नियंत्रित भी कर सकते हैं।

वर्षा के पूर्व मई-जून में नीम के फल, जिन्हें निम्बोली या निमोली कहा जाता है, पक कर गिरने लगते हैं। इन निम्बोली को पेड़ के नीचे पुरानी चादर, कपड़ा या प्लास्टिक की शीट बिछा कर एकत्र कर सकते हैं।

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निम्बोली को इकठ्ठा करने के बाद पानी में डाल कर, छिलका निकाल कर धो लें। निकले हुए छिलके एवं पानी का सदुपयोग कम्पोस्ट या गोबर की खाद में डालकर कर सकते हैं।

साफ हवादार एवं छाया वाले स्थान पर सुखाने के बाद निम्बोली को स्टोर कर सकते हैं। पूर्ण रूप से सूखे हुए बीजों को खुले छायादार स्थान पर कपड़े या बोरी के थैलों में डालकर रखना चाहिए ताकि उन्हें अच्छी तरह से हवा मिल सके।

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निम्बोली से विभिन्न उत्पाद जैसे कि नीम का तेल, नीम कीटनाशी, नीम खाद, नीम चूर्ण, नीम सत आदि खेतों पर ही बनाकर फसलों में उपयोग किया जा सकता है। उपयोग करने के लिए इसे पीसकर प्रति गमला 100 ग्राम और प्रति एकड़ 25 किलो का उपयोग कर सकते हैं। इससे भूमि जनित रोग विशेष रूप से निमेटोड, दीमक, सफेद लट और कई बीमारियों, कीटों की रोकथाम हो जाती है।

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निंबोली के तेल का उपयोग जैविक कीटनाशक के रुप में किया जा सकता है। तेल निकालने के बाद जो खली बचती है उसको भी पौधों में डाला जा सकता है जो खाद के साथ-साथ बेहतरीन फफूंदनाशक का काम करती है।

निम्बोली के पाउडर को पानी में घोलकर (10 प्रतिशत) उबालने पर उसका सत तैयार कर इसके 10 प्रतिशत घोल का छिड़काव पौधों पर रस चूसने वाले कीटों का नियंत्रण करने के लिए किया जा सकता है।

  • भूपेंद्र सिंह सिनसिनवार (उद्यान पर्यवेक्षक) मो.: 8696309997
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