लहसुन की खेती करना चाहते हैं तो जान लें सही तरीका, बुवाई से खाद-उर्वरक तक पूरी जानकारी
04 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: लहसुन की खेती करना चाहते हैं तो जान लें सही तरीका, बुवाई से खाद-उर्वरक तक पूरी जानकारी – लहसुन की खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी वाली फसलों में शामिल है। इसकी बुवाई के लिए सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्टूबर का अंतिम सप्ताह उपयुक्त माना जाता है। इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट भूमि को बेहतर माना गया है। अगर किसान सही समय पर बुवाई के साथ बीज की उचित मात्रा, खाद-उर्वरक, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण का ध्यान रखें तो फसल की अच्छी पैदावार ली जा सकती है। यहां जानिए लहसुन की खेती का पूरा तरीका।
लहसुन की खेती के लिए कैसी हो मिट्टी
लहसुन की खेती हल्की से भारी सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है। हालांकि, बलुई दोमट, अच्छी जल निकासी वाली और जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी इसके लिए बेहतर मानी जाती है। भूमि में पानी का निकास अच्छा होना जरूरी है। नर्म और बहुत रेतली जमीन लहसुन के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, क्योंकि ऐसी जमीन में तैयार गांठें जल्दी खराब हो सकती हैं। भूमि का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना बेहतर है।
खेत की तैयारी कैसे करें
लहसुन की बुवाई से पहले खेत की 3 से 4 बार जुताई करें। जुताई के बाद मिट्टी को भुरभुरा और समतल कर लें। खेत में जैविक पदार्थ बढ़ाने के लिए कंपोस्ट या गोबर की सड़ी खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद खेत में क्यारियां तैयार करके बुवाई की जा सकती है।
सितंबर के अंत से अक्टूबर तक करें बुवाई
लहसुन की बुवाई के लिए सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक का समय उपयुक्त माना गया है। पौधे से पौधे के बीच करीब 7.5 सेंटीमीटर और कतार से कतार की दूरी 15 सेंटीमीटर रखें। लहसुन की कलियों को 3 से 5 सेंटीमीटर की गहराई पर लगाएं और कलिका का उगने वाला हिस्सा ऊपर की तरफ रखें। बुवाई के लिए केरा विधि का प्रयोग किया जा सकता है। बुवाई हाथ से या मशीन से भी की जा सकती है। कलियां लगाने के बाद उन्हें मिट्टी से ढककर हल्की सिंचाई करें।
एक एकड़ में 225-250 किलो बीज की जरूरत
लहसुन की खेती के लिए एक एकड़ में करीब 225 से 250 किलोग्राम बीज यानी कलिका की जरूरत होती है। उचित मात्रा में बीज का इस्तेमाल करना जरूरी है, क्योंकि बीज की मात्रा कम या ज्यादा होने का असर फसल की पैदावार पर पड़ सकता है।
बुवाई से पहले बीज उपचार करें
लहसुन की कलियों को बीज उपचार के बाद बोना चाहिए। दिए गए विवरण के अनुसार प्रति किलो बीज के लिए थीरम 2 ग्राम और बेनोमाइल 50 डब्ल्यूपी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से उपचार किया जा सकता है। रासायनिक उपचार के बाद जैव एजेंट ट्राइकोडर्मा विरिडी से भी बीज उपचार करने की सिफारिश की गई है। इससे मिट्टी से होने वाली बीमारियों से पौधों को बचाने में मदद मिल सकती है।
खाद और उर्वरक का रखें ध्यान
खाद और उर्वरक की मात्रा मिट्टी की जांच के आधार पर तय करना बेहतर होता है। सामान्य तौर पर खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 10 से 12 टन गोबर की खाद डालकर मिट्टी में मिला सकते हैं। बुवाई से पहले 20 से 28 किलोग्राम नत्रजन, 24 किलोग्राम फॉस्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति एकड़ की दर से देने का उल्लेख है। कलियों को पीएसबी से उपचारित करके बोने की भी सलाह दी गई है। बुवाई के करीब एक महीने बाद खड़ी फसल में 20 किलोग्राम नाइट्रोजन देना लाभकारी बताया गया है। लहसुन की बुवाई के 55 से 60 दिन बाद किसी भी तरह के रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी गई है।
खरपतवार नियंत्रण के लिए करें गुड़ाई
अच्छी पैदावार के लिए लहसुन की फसल में 3 से 4 बार गुड़ाई करनी चाहिए। इससे मिट्टी में हवा का संचार बेहतर होता है और नई जड़ों के विकास में मदद मिलती है। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 1 से 3 दिन के अंदर पेन्डीमिथालिन 1.2 लीटर प्रति एकड़ की दर से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा ऑक्सीडायजन 400 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से अंकुरण से पहले इस्तेमाल करने का भी उल्लेख है।
जरूरत के अनुसार करें सिंचाई
लहसुन की फसल में सिंचाई मिट्टी और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर करनी चाहिए। बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें। इसके बाद जरूरत के अनुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें।
खुदाई से पहले सिंचाई बंद कर दें
लहसुन की फसल सामान्य तौर पर बुवाई के 135 से 150 दिन बाद खुदाई के लिए तैयार हो जाती है। जब करीब 50 प्रतिशत पत्तियां पीली होकर सूखने लगें, तब फसल की खुदाई की जा सकती है। खुदाई से करीब 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें। पौधों को उखाड़ने के बाद छोटे-छोटे गुच्छों में बांधकर 2 से 3 दिन खेत में सुखाएं। इसके बाद अच्छी तरह सूखने पर सूखे तने काट दें और लहसुन की गांठों को साफ करें।
इस तरह करें लहसुन का भंडारण
कटाई के बाद लहसुन की गांठों को करीब 7 से 8 दिन तक अच्छी तरह सुखाना चाहिए। इसके बाद गांठों को आकार के अनुसार अलग करके बोरों में भरकर भंडारण किया जा सकता है। भंडारण के लिए गांठों का अच्छी तरह सूखा होना जरूरी है।
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