पौध संरक्षण रसायनों की खपत कम क्यों ?
देश व प्रदेश के किसान पौध संरक्षण के प्रति उदासीन हैं। इस कारण देश में पौध संरक्षण रसायनों की खपत मात्र 0.6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। एशिया महाद्वीप के अन्य देशों में यह खपत जापान में 12.0 किलो, चीन में
देश व प्रदेश के किसान पौध संरक्षण के प्रति उदासीन हैं। इस कारण देश में पौध संरक्षण रसायनों की खपत मात्र 0.6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। एशिया महाद्वीप के अन्य देशों में यह खपत जापान में 12.0 किलो, चीन में
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रदेश में इस वर्ष 131.20 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलें लेने का लक्ष्य रखा गया है। इसके विरूद्ध अब तक 121.73 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है जो 92 फीसदी से अधिक
किसानों को धान रोपा लगाने की मशीन दी मुख्यमंत्री ने बालाघाट। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राज्य सरकार हर गरीब परिवार को रहने लायक जमीन का टुकड़ा और उसे मकान बनवाने के लिए मदद देगी। किसी
बालोदा बाजार (छत्तीसगढ़) पलारी विकासखंड के ग्राम-सिसदेवरी के प्रगतिशील कृषक श्री नोहरलाल चंद्राकर ने अपनी 12 एकड़ जमीन में सरसों प्रजाति महिको गोल्ड का प्रति एकड़ 2 किलो बीज 200 रु. प्रति किलो क्रय कर नवम्बर माह में बोया। जिसका
(विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों में, तटीय और दक्षिण कर्नाटक के शेष हिस्सों में, रायलसीमा और तटीय आंध्रप्रदेश के कुछ हिस्सों में पहुंच गया है। इसके अलावा मध्य पूर्व बंगाल की खाड़ी और
(विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। मध्य प्रदेश में सोयाबीन बीज की बढ़ती किल्लत एवं विगत दो वर्षों से हो रहे नुकसान के चलते किसान का सोयाबीन से मोह भंग हो रहा है, इस कारण अब वह संकर मक्का एवं दलहनी फसल की
भारत सरकार ने पिछले सप्ताह खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किये हैं, जिनमें पिछले वर्ष घोषित समर्थन मूल्य की अपेक्षा धान में 60 रु., ज्वार में 55-60 रु., बाजरा में 55 रु., मक्का में 43 रु. रागी में
न्या. (से.नि.) चंद्रशेखर धर्माधिकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा न्यायाधीशों की कमी को लेकर प्रकट की गई वेदना को कई लोगों ने कमजोरी माना है। वस्तुस्थिति इसके उलट है। सिर्फ न्यायाधीशों की कमी की पूर्ति से हमारी न्याय व्यवस्था पटरी
– डॉ. एस.डी. बिल्लौरे – डॉ. बी.यू. दुपारे भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इन्दौर सोयाबीन की खेती में मुख्य रूप से खरपतवार, कीट व रोगों के प्रकोप से उत्पादन में कमी आती है, जिनमें अधिकतम 35 से 70 प्रतिशत तक हानि केवल
बरुथी जिन्हें अंग्रेजी में माइटस कहते हैं बहुत पुराने काल से कृषि फसलों को हानि पहुंचाते आ रहे हैं, परंतु अब यह कीट गंभीर एवं कई रोगों में वाहक कीटों का काम कर रहे हैं। अत्यधिक कीटनाशियों तथा उर्वरकों के