पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज में विजेता को मिलेंगे 10 लाख रुपए

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विजेता को 10 लाख रुपये और उपविजेता को 7 लाख रुपये के नकद पुरस्कार मिलेंगे

28 दिसंबर 2021, नई दिल्ली । पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज में विजेता को मिलेंगे 10 लाख रुपए – पशुपालन और डेयरी विभाग ने स्टार्टअप इंडिया के साथ साझेदारी में, डॉ. वर्गीस कुरियन की जन्म शताब्दी के अवसर पर गुजरात के आणंद में ‘राष्ट्रीय दुग्ध दिवस’ मनाने के एक कार्यक्रम के दौरान ‘पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज’ का दूसरा संस्करण लॉन्च किया। यह कार्यक्रम केंद्रीय पशुपालन मंत्री, श्री पुरुषोत्तम रूपाला, केंद्रीय राज्य मंत्री, डॉ. एल मुरुगन और डॉ. संजीव बालयान की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया। www.startupindia.gov.in पर आवेदन करें ।

स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज का पहला संस्करण 12 सितंबर, 2019 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था। पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज 2.0 को केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री, श्री पुरुषोत्तम रूपाला द्वारा पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के सामने आने वाली छह समस्याओं के समाधान के लिये नवीन और व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक हल को तलाशने के लिये लॉन्च किया गया है। स्टार्टअप इंडिया पोर्टल – www.startupindia.gov.in – पर यह चुनौती सभी स्टार्टअप के लिये निम्नलिखित समस्या कथन के लिये खुली है:-

सीमन डोज के भंडारण और आपूर्ति के लिए समस्या
  • सीमन उत्पादन केंद्रों से किसान के घर तक, जहां सीमन का उपयोग किसान की गाय/ भैंस के गर्भाधान के लिये किया जाता है, सीमन डोज की आपूर्ति के लिए कोल्ड चेन का रखरखाव, भारत में एआई वितरण प्रणाली की रीढ़ है।
  • तरल नाइट्रोजन और तरल नाइट्रोजन कंटेनर सीमन डोज को रखने और परिवहन के लिए उपयोग किया जाता है। भंडारण और परिवहन के दौरान एलएन 2 का नुकसान अधिक होता है, जिससे कोल्ड चेन के रखरखाव की लागत में वृद्धि होती है।
उपाय
  •  सीमन डोज के भंडारण और परिवहन के कुछ वैकल्पिक लागत प्रभावी, लंबी अवधि और उपयोगकर्ता के अनुकूल साधनों को तलाशा जा सकता है, उन्हें लोकप्रिय बनाया जा सकता है।
  • भंडारण कंटेनर को इस तरह से डिजाइन किया जा सकता है कि यह छोटा और ले जाने में आसान हो।
    पशुओं की पहचान (आरएफआईडी)
  • जानवरों की पहचान एक विशिष्ट पहचान संख्या के साथ पॉलीयूरेथिन टैग का उपयोग करके की जाती है। अनुमान है कि 5 से 10 प्रतिशत टैग खो जाते हैं क्योंकि ये टैग बाहरी तरफ लगाये जाते हैं। पहचान संख्या पढऩा भी मुश्किल है। इसलिए गाय-भैंस को स्थायी पहचान देना समय की मांग है।
  • वर्तमान में जानवरों के बीच इस्तेमाल हो रही रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन का उपयोग करने वाली तकनीक बहुत महंगी है। इसकी लागत 50 से 100 रुपये तक है, और रीडर की लागत भी बहुत अधिक है, 15,000 से 20,000 रुपये तक। आरएफआईडी एक स्थायी पहचान संख्या है क्योंकि इसे त्वचा के नीचे लगाया जाता है और इसे आसानी से हटाया नहीं जा सकता है। चूंकि तकनीक महंगी है, इसका उपयोग भारत में पशुधन पर नहीं किया जाता है।
उपाय

उद्यमी फार्म में रखे जाने वाले पशुओं, विशेष रूप से मवेशियों और भैंसों की पहचान के लिए लागत प्रभावी आरएफआईडी पहचान प्रणाली विकसित कर सकता है। रीडर की लागत को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हीट डिटेक्शन किट

कृत्रिम तरीके से पशुओं के प्रजनन को सीमित करने में सबसे महत्वपूर्ण कारण गायों या बछिया में मदकाल का गलत अनुमान लगाना है। पारंपरिक रूप से मदकाल का पता देखकर लगाया जाता रहा है। हालाँकि, यह विधि थकाने वाली है और इसमें लगने वाली श्रम लागत ऊंची है। डेयरी गायों में मद से जुड़े संकेतों में, गायों के द्वारा विशेष व्यवहार दिखाना मदकाल का सबसे विश्वसनीय संकेत है।

  • भैंसों में मदकाल के संकेत नहीं होते। इसलिए, यह पता लगाना मुश्किल है कि वे कब मद में हैं, और भैंसों के मामले में बछड़ों के जन्म के बीच लंबा अंतराल होने का यह एक प्रमुख कारण है।
उपाय

मदकाल का पता लगाने के लिए पश्चिमी देशों की डेयरियों में हीट माउंट डिटेक्टर (एचएमडी) अधिक लोकप्रिय हो गये हैं। शारीरिक गतिविधि का अध्ययन करने के लिए पैडोमीटर/गर्दन पर लगे कॉलर का उपयोग किया गया है और इससे मद का समय निर्धारित किया गया है, लेकिन समस्या वही है, ये तकनीकें महंगी हैं।

प्रेग्नेन्सी डाइग्नोसिस किट

एआई कार्यक्रमों में, गर्भावस्था के 70 से 90 दिनों में रेक्टल पेल्पेशन के माध्यम से गर्भावस्था का सफलतापूर्वक पता लगाया जाता है। रेक्टल पैल्पेशन एक पशुचिकित्सक द्वारा, या एक पशुचिकित्सक की उपस्थिति में तकनीशियनों द्वारा किया जाता है।

  • किसानों के लिए प्रारंभिक अवस्था में (गर्भावस्था के लगभग 30 दिनों में) गर्भावस्था का पता लगाना संभव नहीं है।
उपाय

रक्त प्रोटीन के आधार पर प्रेग्नेन्सी डाइग्नोसिस किट विकसित की जाये।
उद्यमी आईडीईएक्सएक्स द्वारा विपणित अलर्टिस रुमिनेंट प्रेग्नेन्सी टेस्ट किट की तर्ज पर प्रेग्नेन्सी टेस्ट किट विकसित कर सकता है और इसके उत्पादन के लिए सुविधा स्थापित कर सकता है।

सप्लाई चेन में सुधार

ऐसे गांव का पता लगाने और उसकी पहचान करने का कोई तंत्र नहीं है जहां से संग्रह केंद्र द्वारा दूध एकत्र किया जा रहा है। इसलिए, पूरे देश में सभी गांवों को कूटबद्ध किया जाना है।

  • संग्रह केंद्र से बीएमसी (बल्क मिल्क कूलिंग) केंद्र तक दूध ले जाने के लिये उपयोग होने वाले मार्ग (टैंकर/ट्रक द्वारा) के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। इसलिए, सहकारी और निजी क्षेत्र के डेयरी प्रोसेसर के सभी दूध ले जाने वाले मार्गों को कूटबद्ध किया जाना है।
  • दूध के किस टैंकर या दूध परिवहन करने वाले वाहन ने संग्रह केंद्र से बीएमसी केंद्र तक दूध पहुंचाया, इसकी कोई जानकारी नहीं होती है। इसलिए, सभी दूध टैंकरों/दूध परिवहन वाहनों को कूटबद्ध और जीपीएस-सक्षम होना चाहिये।
  • इस बात की कोई जानकारी नहीं होती है कि डेयरी प्लांट पहुंचने से पहले किस दूध के टैंकर ने उस ठंडे दूध को पहुंचाया।
  • किस डेयरी प्लांट ने उस दूध को प्राप्त किया, इसकी कोई जानकारी नहीं होती है। इसलिए सभी डेयरी संयंत्रों को कूटबद्ध किया जाना है। इसके अलावा, प्रत्येक डेयरी प्लांट में, सभी मिल्क साइलो, मिल्क पास्चराइजऱ, मिल्क पैकिंग मशीन, सभी प्रोसेसिंग बैच/प्रोसेसिंग शिफ्ट आदि को कूटबद्ध किया जाना है।
  • जियो-कोड के आधार पर, एसएपी-आधारित समाधान प्रदाता द्वारा एक व्यापक और विशिष्ट कोड उत्पन्न करने की आवश्यकता होती है, जिसे पाश्चुरीकृत दूध / डेयरी उत्पादों जैसे दही, पनीर आदि के पाउच में अंकित किया जाना है।
संचालन के दौरान नुकसान में कमी
  • दूध को लाने ले जाने में लगने वाला समय घटने से रखरखाव के दौरान नुकसान/कच्चे दूध के खराब होने से नुकसान को कम करना।
  • कच्चे दूध की गुणवत्ता में सुधार और तरल दूध को मूल्य वर्धित उत्पादों में बदलने के अवसर में वृद्धि के कारण बिक्री में वृद्धि, जिससे उच्च रिटर्न और डेयरी निर्यात में वृद्धि।
कम लागत वाली कूलिंग प्रणाली

पहाड़ी क्षेत्रों में दूध को 40 लीटर और 20 लीटर क्षमता के दूध के डिब्बे में सडक़ किनारे डीसीएस तक ले जाया जाता है। दूध निकाले जाने के समय से दूध संग्रह केंद्र तक पहुंचने में 2 घंटे तक का समय लग सकता है। इसी तरह, रेगिस्तान, नदी डेल्टा क्षेत्रों में द्वीपों और अन्य दूरदराज के क्षेत्रों में, किसानों को संग्रह केंद्र तक पहुंचने के लिए कोल्ड चेन से जुड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे दूध की गुणवत्ता में गिरावट आती है और आर्थिक नुकसान होता है। एफएसएसएआई के नियमों के अनुसार, जानवरों से दूध प्राप्त करने के बाद उसे साफ करना चाहिये।

डेटा लॉगर- प्राथमिक उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मापदंडों की निगरानी के हिस्से के रूप में, कुछ सहकारी समितियों के द्वारा सॉफ्टवेयर आधारित स्वचालित आंकड़ा संग्रह प्रणाली शुरू की गयी थी। यह प्राथमिक उत्पादन में पूर्ण जानकारी की क्षमता स्थापित करता है जो एफएसएसएआई के अनुसार अनिवार्य है। यह मूल रूप से बीएमसी की बेहतर निगरानी और दक्षता के लिए ज्यादा रिपोर्टिंग, चोरी में कमी, और छेड़छाड़ पर रोकथाम की सुविधाओं के साथ बीएमसी का एक इंटरनेट-आधारित, वास्तविक-समय आधारित प्रबंधन है। एसएमएस अलर्ट जैसे सूचना अलर्ट और महत्वपूर्ण अलर्ट विभिन्न हितधारकों को मोबाइल फोन पर प्रदान किये जायेंगे। बीएमसी के संचालन और संबंधित दूध भंडारण डेटा की दैनिक/साप्ताहिक/मासिक रिपोर्ट भी मोबाइल फोन और इंटरनेट पर उपलब्ध होगी। यह प्रणाली क्लस्टर सोसायटियों में सभी किसान-वार खरीद डेटा को सीधे दूध विश्लेषक के साथ-साथ बीएमसी से भी प्राप्त करती है, जिसे सॉफ्टवेयर सिस्टम से जोड़ा जा सकता है।

उपाय
  • कम लागत वाली ग्रामीण स्तर की कूलिंग प्रणाली जैसे, छोटी क्षमता के दूध के डिब्बे बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों, एफएसएसएआई नियमों के अनुपालन, किसानों को उच्च आय आदि में मदद करेंगे।
  • दूध के टैंकर, थोक वेंडिंग मशीनों, दूध के डिब्बे में वर्गीकृत लागत पर स्मार्ट डेटा लॉगिंग डिवाइस, उत्पाद की गुणवत्ता और सुधारात्मक कार्यों की अधिक निगरानी में मदद करेगा।
पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज 2.0 के विजेता स्टार्टअप को निम्नलिखित प्रोत्साहन प्रदान किये जायेंगे :-
नकद पुरस्कार

6 समस्या क्षेत्रों में से प्रत्येक के लिये, एक विजेता को 10 लाख रुपये और एक उपविजेता को 7 लाख रुपये नकद पुरस्कार के रूप में दिये जायेंगे।

इन्क्यूबेशन

12 विजेताओं को इन्क्यूबेशन का मौका मिलेगा। इनक्यूबेटर 3 महीने तक इन स्टार्टअप्स के वर्चुअल इनक्यूबेशन, मेंटर मैचमेकिंग, पीओसी डेवलपमेंट और टेस्टिंग सुविधाओं के लिये लैब सुविधा, बिजनेस और इन्वेस्टर वर्कशॉप आयोजित करने और कार्यक्रम के पूरा होने के बाद 9 महीने तक स्टार्टअप की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार होगा।

वर्चुअल मास्टरक्लास

प्रतियोगिता के लिये आवेदन करने वाले सभी स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को मेंटरशिप प्रदान करने के लिये 6 वर्चुअल मास्टरक्लास का आयोजन किया जायेगा।

मेंटरशिप

प्रत्येक विजेता को 6 महीने के लिये पशुपालन और डेयरी विभाग से एक अनुभवी परामर्शदाता सौंपा जायेगा।

सबके सामने आने का अवसर

कार्यक्रम के विजेताओं के उत्पादों/समाधानों को अधिकतम दृश्यता सुनिश्चित करने के लिये कृषि भवन में मंत्री कार्यालय और नई दिल्ली में सचिव कार्यालय में प्रदर्शित किया जायेगा।

प्रदर्शन का दिन

समस्या क्षेत्रों में आवेदक पूल से चुने गये शीर्ष 30 स्टार्टअप के लिये वर्चुअल प्रदर्शन दिवस का आयोजन किया जायेगा।


इन स्टार्टअप्स को निम्नलिखित अवसर प्राप्त होंगे:
  • दर्शकों जिसमें मंत्रालयों, सरकारी विभागों के अधिकारियों, कोऑपेरिटिव, कॉर्पोरेट निकायों, निवेशक आदि शामिल होंगे, के समक्ष उत्पाद को रखने का अवसर
  • प्रतिभागियों को मिले व्यक्तिगत वर्चुअल बूथ पर अपने उत्पाद/सेवाओं के प्रदर्शन का अवसर
  • प्रारंभिक उत्पाद, खरीद के ऑर्डर और वित्त तक पहुंच

 

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