कम पूंजी से करें बकरी पालन

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  • डॉ. प्रवीण पिलानिया (पीएचडी शोधार्थी)
    पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग राजूवास, बीकानेर (राज.)

 

25 जुलाई 2022, कम पूंजी से करें बकरी पालन – बकरी एक बहुउपयोगी पशु है जो अपने छोटे कद हर तरह की जलवायु में रहने की क्षमता तथा रहन-सहन की आसान आदतों के कारण सभी वर्ग बकरी पालन करते हंै। बकरी पालन व्यवसाय कम पूंजी एवं कम साधन से आरम्भ कर परिवार के भरण पोषण के लिये नियमित आय प्राप्त की जा सकती है। पशुपालक द्वारा बकरियों के उचित रखरखाव संतुलित पोशाहार और बेहतर प्रबंधन के द्वारा बकरियों को रोगग्रस्त होने से बचाकर दुधारू बकरियों को बेचकर, ऊन व खाल द्वारा प्राप्त आय, बकरों को मांस के रूप में बेचकर, मिंगनियों को खाद के रूप में बेचकर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकतेहैं।

मुख्य नस्लें

मुख्य रूप से सिरोही, मारवाड़ी, जखराना नस्ल की बकरियां पायी जाती है।

आवास व्यवस्था

बकरी की आदर्श आवास सुविधा हेतु बाड़े में कुछ स्थान पर छायादार व कुछ स्थान पर खुला हों जिसमें चारे एवं पानी उपलब्ध हो। बकरी का बाड़ा इस प्रकार बनायें ताकि सूर्य की सीधी गर्मी से बचा जा सकें। बकरियों को खड़े रहने के लिये प्रति वयस्क के हिसाब से 1-1.5 वर्ग मीटर स्थान हो।

आहार व्यवस्था

बकरी लगभग सभी प्रकार की वनस्पति खा सकती है। बकरी पेड़ों की पत्तियों से लेकर घास तक चरती है। बकरियों में रेशेदार चारों को पचाने की अधिक क्षमता होती है। चरने के अलावा बकरियां बबूल, आम, जामुन, खेजड़ी, नीम, बेर की पत्तियां खाना पसंद करती हंै। बकरियां रिजका व बरसीम भी खाना पसन्द करती है। बकरियों को प्रोटीन से भरपूर राशन दें। दाना मिश्रण में दाना अवयव इस प्रकार है:-

दाना अवयव प्रतिशत

चना -15
जौ या मक्का -37
मूंगफली या खल- 25
गेहूं का चोकर -20
खनिज लवण -2.5
साधारण नमक -0.5

बकरियों में प्रजनन

सामान्यतया बकरी 8-12 माह की उम्र में गर्मी में आने लगती है। लेकिन अच्छे दुग्ध उत्पादन व शारीरिक भार में वृद्धि परिणाम के लिये बकरियों को 15-18 माह में ही गर्भित करवायें तथा इस आयु तक बकरी का वजन 22-25 किग्रा. हो। बकरियों में मदकाल लगभग 24-48 घण्टों का होता है। ताव में आने के 34-36 घण्टे बाद गर्भित करवायें। इस दौरान यदि गर्भ ना ठहरे तो बकरी 18-21 दिन बाद पुन: मदकाल में आ जाती है। बकरी का गर्भकाल 145-151 दिन होता है सामान्यता हमारे यहां बकरियों को साल भर गर्भित करवाया जा सकता है, परन्तु प्रजनन के लिये एक समय होना चाहिये जिससे कि बच्चे पैदा होने के समय अच्छी चराई उपलब्ध हो तथा बरसात व ज्यादा ठंड न हो इससे बकरी का स्वास्थ्य ठीक रहने के साथ-साथ अधिक दूध उत्पादन से बच्चे की शारीरिक वृद्धि ठीक होगी तथा बच्चों में मृत्यु दर कम रहेगी।

स्वास्थ्य संरक्षण

अन्य जानवरों की तुलना में बकरी कम बीमार पड़ती है लेकिन अधिक लाभ के लिये बकरी की नियमित देखभाल करना आवश्यक है। बकरियों को वर्ष में तीन बार कृमिनाशक दवा पशुचिकित्सक की सलाह से निम्न प्रकार से पिलायें।

  • वर्षा ऋतु से पूर्व (मई-जून) प्रथम खुराक।
  • वर्षा ऋतु के बाद (सितम्बर- अक्टूबर) द्वितीय खुराक।
  • बसंत ऋतु में (फरवरी-मार्च) तृतीय खुराक।
टीकाकरण करवायें

फड़कियां, माता रोग, मुंहपका-खुरपका।

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