कृषि कार्य में लागत घटायें, लाभ कमायें

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फसलोत्पादन में होने वाला व्यय जानकारी के अभाव एवं बिना ठोस योजना के अपव्यय में बदल जाता है। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से छोटी-छोटी परंतु महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रख कर न केवल व्यय में कटौती की जा सकती  बल्कि संसाधनों को भी लम्बे समय तक उत्पादक बनाये रखा जा सकता है ।
क्रमवार तरीके से जानेँ कि खेती में अपव्यय कहाँ – कहाँ होता है ।
खेत की तैयारी में – 
  • कम या खराब रखरखाव वाले ट्रैक्टर का प्रयोग करना। 
  • लीकेज वाले ट्रैक्टर का उपयोग करना ।
  • अनुभवहीन या नौसिखिये ड्राइवर से ट्रैक्टर चलवाना ।
  • बड़े ट्रैक्टर से छोटे यंत्र चलाना । 
  • छोटे ट्रैक्टर से बड़े यंत्र चलाना । 
  • मेड़ें बहुत अधिक चौड़ी रखना ।
  • बहुत छोटी-छोटी जोत रखना ।
  • बोनी के ठीक पहले गहरी जुताई कराना ।  
बोनी एवं उर्वरक प्रयोग में –
  • अनुशंसित मात्रा से अधिक बीज बोना। 
  • कम अंकुरण क्षमता वाले पुराने बीज का प्रयोग करना। 
  • बिना मिट्टी परीक्षण के उर्वरकों का असंतुलित (कम या ज्यादा) प्रयोग करना । 
  • केवल एक ही उर्वरक का प्रयोग अधिक मात्रा में करना। 
  • धान्य फसलों में नत्रजन उर्रवकों की पूरी मात्रा एक ही बार में डालना । 
  • उर्वरकों का सही समय पर एवं सही विधि द्वारा प्रयोग न करना। 
  • बीज एवं उर्वरक मिलाकर बोना । 
  • उर्वरकों के सस्ते विकल्पों का उपयोग न करना, बीजोपचार नहीं करना । 
जल प्रबंधन में –
  • आवश्यकता से अधिक या कम क्षमता वाले पंपों का प्रयोग करना । 
  • बहाव/जलोढ विधि से सिंचाई करना । 
  • एक बार में आवश्यकता से अधिक सिंचाई करना । 
  • उपयुक्त सिंचाई विधि का प्रयोग नहीं करना ।
  • कुएं एवं पंप के बीच अधिक दूरी रखना । 
  • पाईप में टूट-फूट, लीकेज या अत्याधिक जोड़ होना । 
  • क्रांतिक अवस्था के अतिरिक्त सिंचाई करना ।
अंतरफसलीय क्रियाओं में –
  • सही दवा का चुनाव नहीं करना । 
  • आर्थिक हानि स्तर के पहले ही दवा उपयोग करना ।
  • खरवतवारों, कीटों एवं रोगों की अनुशंसित समय एवं अवस्था पर रोकथाम नहीं करना।
  • बीमरियों एवं रोगों का केवल रसायनिक नियंत्रण करना। 
  • दवाईयों का बार-बार असंतुलित एवं अविवेकपूर्ण छिड़काव करना ।
  • एक्सपायरी डेट अर्थात दवा इस्तेमाल करने की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी दवा का प्रयोग करना । 
  • जानकारी के अभाव में रोग लगने पर कीटनाशक दवाओं का अथवा कीट लगने पर रोगनाशी दवाओं का प्रयोग करना । 
  • दवाओं के दो प्रयोगों के बीच कम अन्तर रखना अर्थात् अनुशंसित समय के पहले जल्दी-जल्दी दवा छिड़कना। 
  • कम अथवा अधिक सांद्रता के घोल तैयार करना ।
  • सही स्प्रेयर पंप या पावर पंप का चुनाव नहीं करना । 
कटाई एवं कटाई उपरांत क्रियाओं में –
  • समय पर कटाई नहीं करना । 
  • असवाधानीपूर्वक कटाई करना ।
  • बालों अथवा कलियों का खेत में ही झड़ जाना । 
  • मशीन से गहाई में फसल को ऊपर से कटवाना । 
  • कटी फसल अधिक समय खलिहान में ही रहना । 
  • थ्रेशर में दाने का टूटना । 
  • गलत तरीकों से भण्डारण करना । 
  • फटे बोरों या फिर खुले स्थानों पर भण्डारण करना ।
  • भण्डार गृह या भण्डार पात्र में चूहों एव पक्षियों के आवागमन पर रोक न लगाना । 
वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । यद्यपि खेती – किसानी की दृष्टि से यह समय न केवल चुनौतियों बल्कि नये अवसरों से भी भरा पड़ा है । यदि अपव्यय से बचेगें तो आमदनी दोगुनी से भी अधिक की जा सकती है ।
अपव्यय रोकने के उपाय
उपरोक्त सभी बातें छोटी हैं परंतु ये सभी आमदनी रूपी नाव में छोटे-छोटे छेद हैं जिन्हे हम अपनी असावधानी एवं उपेक्षा से लगातार बड़ा करते जाते हैं। अपव्यय को रोकने और लागत घटाने से आमदनी में बढ़ोत्तरी होती है। इन छोटे-छोटे फिजूल के खर्चों से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए  ताकि आप सभी कृषि क्रियाओं में लगने वाले समय, खर्चे एवं अन्य महत्वपूर्ण बारीकियों से आप अवगत हो सकें । याद रखिये जानकारी ही बचत का आधार है ।
  • जागरूक बनें ताकि आप सभी कृषि क्रियाओं में लगने वाले समय, खर्चे एवं अन्य महत्वपूर्ण बारीकियों से आप अवगत हो सकें। जानकारी ही बचत का आधार है ।  
  • प्रशिक्षण प्राप्त करें ताकि नई तकनीकी से आपको फायदा मिले।
  • खेत का अवलोकन करते रहें ताकि रोग, बीमारियों को समय पर नियंत्रित किया जा सके। 
  • मशीनों उपकरणों एवं दवाईयों के साथ आये हुए मैन्युअल (पुस्तिका) एवं पर्चों को सम्भाल कर रखें एवं समय-समय पर उनका अध्ययन करें। 
  • खरीदे हुए आदानों की पक्की रसीद प्राप्त करें और उनकी एक्सपायरी तिथि का विशेष ध्यान रखें। 
  • ट्रैक्टर  एवं ट्रैक्टर चलित यंत्रों का चलाने का कौशल आधारित प्रशिक्षण प्राप्त करें। 
  • कृषि यंत्रों एवं उपकरणों की छोटी-मोटी सुधार एवं मरम्मत स्वयं करना सीखें । 
  • वैज्ञानिक विधी द्वारा खेती करना सीखें । 
  • सम समायिक, प्रशिक्षित एवं कुशल श्रमिकों की मदद लें ।
  • प्रगतिशील किसानों के प्रक्षेत्र पर, मेलों में भ्रमण करें।
  • खेती में विविधता लाये ।
  • खेती का बही खाता/लेखा जोखा रखें । 
  • आय को तीन हिस्सों में बांटे – पहला हिस्सा खेती में पुनर्निवेश, दूसरा हिस्सा बचत और तीसरा हिस्सा कृषि उद्यम विस्तार हेतु । 
  • समूह बनाकर कार्य करें । 
इन सभी उपायों को अपनाकर अपव्यय को रोका जा सकता है । किसानों के पास एवं गाँवों में नगदी की कमी होती है । ऐसे में उपलब्ध पैसों को अवाश्यक उत्पादक कार्य में लगाना ही श्रेयस्कर है । अनुत्पादक उपयोग को फिजूलखर्ची या अपव्यय कहलाता है । अपव्यय से बचे और आमदनी बढ़ाये ।
  • डॉ. किन्जल्क सी. सिंह  
  • डॉ. चंद्रजीत सिंह
       email : chandar30@gmail.com
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