मधुमक्खी और कीटनाशक

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यूरोप संगठन के देशों ने नियोनिकोटिनोआइड समूह के कीटनाशक पर एकमत से प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, इसका मुख्य कारण इस समूह के कीटनाशकों का मधुमक्खियों तथा कुछ अन्य कीटों जो फसलों, फूलों के परागण में मुख्य भूमिका निभाते हैं, उन पर इन कीटनाशकों का विपरीत प्रभाव पड़ता है और यह मधुमक्खियों के अस्तित्व को मिटा सकते हैं। वर्ष 2013 में यूरोपियन कमीशन ने तीन नियोनिकोटिनोआइड कीटनाशकों क्लोथायनिडिन, इमिडाक्लोप्रिड तथा थायामिथोक्सिन के उपयोग को नियंत्रित किया था। पिछले माह यूरोप संगठन के देशों ने नियोनिकोटिनोआइड कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। जिसके इस वर्ष 2018 के अंत तक लागू होने की संभावना है। नियोनिकोटिनोआइड समूह के कीटनाशकों में इमिडाक्लोप्रिड, थायमियोक्सिन, क्लोथायनिडिन, एसिटामिप्रिड, थायक्लोप्रिड, डायनोटीफ्यूरान तथा नाडटनपाईरम प्रमुख हैं। विश्व के अन्य देशों के साथ-साथ इनका उपयोग भारत में भी वृहद रूप से किया जा रहा है। ये कीटनाशक रस चूसने वाले कीटों के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ सफेद ग्रव, मक्खियों, जानवरों के पिस्सू, कॉकरोच आदि के लिये भी कारगर हैं। इन कीटनाशकों का उपयोग एक- दो दशकों से ही हो रहा है। मनुष्यों तथा जानवरों के लिये ये कम विषैले हैं। इनके उपयोग के आरंभ के दिनों में इन्हें मधुमक्खी सहित उपयोगी कीटों के लिये कम विषैला माना गया था। परंतु यूरोप में हुए अनुसंधान के आधार पर इन्हें मधुमक्खियों तथा अन्य परागण करने वाले कीटों के लिये असुरक्षित पाया गया है। ये कीटनाशक हाइनोपटेरागण के अन्य कीटों जो परजीवी के रूप में हानिकारक कीटों को प्रकृति में नियंत्रित करते हैं उन पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं जो अनुसंधान का विषय है। मधुमक्खी भी इसी गण के अन्तर्गत आती है। देश में भी नियोनिकोटिनोआइड कीटनाशकों का मधुमक्खियों परागण परजीवी परभक्षी कीटों पर प्रभाव देखने के लिये अनुसंधान आवश्यक है जिसके आधार पर इन कीटनाशकों पर भारत में भी प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया आरंभ की जा सके।

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