कृषि को व्यावहारिक और लाभकारी बनाना होगा

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बेंगलुरू। उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि कृषि अधिकतर भारतीयों की मुख्य आजीविका है, परंतु किसानों को यह व्यवसाय आकर्षक नहीं लगता क्योंकि इसमें आय तथा उत्पादकता कम है। उन्होंने बेंगलुरू में सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन संस्थान में 14वां डॉ. वी.के.आर.वी. स्मृति व्याख्यान देते हुए यह कहा। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल श्री वाजूभाई रूदाभाई वाला, संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अनंत कुमार और अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तीव्र, समावेशी और सतत विकास की रणनीतियों को किसानों की समस्याओं को हल करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, ई-नाम और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी सरकारी पहलों से किसानों को उत्पादकता में सुधार करने और बेहतर लाभ प्राप्त करने की दिशा में मदद मिल रही हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के निवेशों में बढ़ोत्तरी की आवश्यकता है। इसके लिए दीर्घकालीन और मध्यकालीन कार्य योजना बनाएं, जिनके तहत निजी और सार्वजनिक निवेशों को लाभबंद किया जा सके।

उत्पादन और उत्पादकता वृद्धि के सुझाव

  • बेहतर बीजों का इस्तेमाल
  • उर्वरकों का संतुलित उपयोग
  • सीमान्त और छोटे किसानों को ऋण
  • दुग्ध, मछली और मुर्गीपालन जैसी गतिविधियां खेती से जोड़ें
  • खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा
  • कृषि को बागवानी से जोड़ें तथा पहाड़ों में कृषि का यंत्रीकरण
  • कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन
  • पानी के इस्तेमाल के प्रति बेहतर समझ
  • किसानों को उपभोक्ता मूल्य के बड़े हिस्से को समझना होगा
  • भू-नीति में मूलभूत सुधारों पर गौर करना
  • जलवायु परिवर्तन के मुताबिक कृषि गतिविधियों को विकसित करना
  • ज्ञान को साझा करने की प्रक्रियाओं को दुरूस्त करना

 

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