मौसम की बेरुखी से बेभाव हुआ संतरा

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नागपुरी संतरों को मात देने वाले म.प्र. के आगर, शाजापुर के संतरे को इस बार मौसम ने मात दे दी है और किसानों के बगीचों के साथ ही उनकी उम्मीदों पर तुषारापात हो गया है। आगर जिले में लगभग 33 हजार हेक्टेयर और उससे जुड़े हुए मातृजिले शाजापुर में 11 हजार हेक्टेयर में संतरे के बगीचे लगे हैं। सबसे ज्यादा नुकसान आगर के सुसनेर विकासखंड में हुआ है। बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि से 25 से 30 प्रतिशत फसल चौपट हो गई है। नुकसान का वास्तविक आंकड़ा तो अंतिम सर्वे रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक अग्रिम सौदेबयानो के मुताबिक 600 रु. प्रति क्विंटल के हिसाब से लगभग 1 अरब से ऊपर की फसल की आस क्षेत्र के किसानों को थी, पर मौसम की बेरूखी से 30 प्रतिशत तक बगीचे नष्ट हो गए हैं। एक नजरिया आकलन के मुताबिक 30 से 35 करोड़ रुपये का नुकसान क्षेत्र के संतरा उत्पादकों को हुआ है। फल दागी होने के कारण व्यापारियों ने सौदे भी रद्द कर दिए और स्थानीय बाजारों- मंडियों में अधिक पूछ-परख न होने से किसानों को तुड़ाई कर परिवहन खर्च निकालने के लाले पड़ रहे हैं। म.प्र. सरकार ने नुकसान होने पर प्रति पेड़ 500 रु. मुआवजा देने की घोषणा की है।

शाजापुर कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजीव उमठ ने बताया कि संतरे की औसत उत्पादकता 90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और इस क्षेत्र में संतरे की मृग बहार फसल ली जाती है। और लगभग 50 प्रतिशत पेड़ों पर फल लगे थे। याने 22 हजार हेक्टेयर में लगभग 20 लाख क्विंटल संतरा होने की आशा थी।

बांग्लादेश ने बढ़ाई संतरे पर
कस्टम ड्यूटी
व्यापारियों ने दिखाई बेरुखी


फल निर्यातक व्यापारी ने चिंतापूर्ण स्तर में बताया कि आगर- शाजापुर का संतरा बांग्ला देश और नेपाल भी जाता है पर आयात हतोत्साहित करने के लिए बांग्लादेश ने गत वर्ष से कस्टम ड्यूटी में 40 रु. किलो तक की बढ़ौत्री कर दी है। जिस कारण बाजार में दामों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। बांग्लादेश की कस्टम ड्यूटी में वृद्धि के अलावा प. बंगाल और अन्य उत्तर पूर्वी राज्यों जिनके रास्ते माल भेजा जाता है, वहां अशांति, उपद्रव और अराजकता के
कारण भी निर्यात प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही माल ढोने वाले सामान्य ट्रकों से जाने के कारण परिवहन और अंतिम गंतव्य पर पहुंचने में समय लगने से संतरे की गुणवत्ता और बाजार मूल्य में गिरावट आती है। निर्यात को ध्यान में रखते हुए इसकी तुड़ाई, भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और उपयुक्त परिवहन हो तो मध्य प्रदेश का संतरा अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकता है। संतरा उत्पादन में मध्य प्रदेश भारत में दूसरे स्थान (6.78 लाख टन) पर है। उज्जैन संभाग के आयुक्त डॉ.रवीन्द्र पस्तौर कृषि विपणन क्षेत्र के संगठित स्वरूप को संगठित बनाने का अथक प्रयास कर रहे हैं। आपने इस क्षेत्र की उपज को, मालवा फ्रेश ब्रान्ड के रूप में दिल्ली और पंजाब के बाजारों में भी भेजा है। किसान और बाजार के बीच सीधे लिंकेज
विकसित करने की दिशा में डॉ. पस्तौर को सफलता भी मिली है। डॉ. पस्तौर के प्रयासों से नलखेड़ा के किसानों का संतरा उत्तरी भारत के बाजारों में 28 रु. किलो तक बिका। वहीं बाहर का व्यापारी जिले में आकर केवल 5-6 रु. किलो के भाव से ही खरीदता है।

हमारा प्रयास है कि कृषि उपज के बिखरे हुए बाजार को संगठित स्वरूप दें। भावों में स्थिरता रहे। किसानों को कोल्ड स्टोरेज आदि की सुविधाएं मिले।
– डॉ. रवीन्द्र पस्तौर
आयुक्त, उज्जैन संभाग

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