रिलायंस फाउंडेशन द्वारा टिड्डी नियंत्रण के लिए कांन्फ्रेंस

Share this

रिलायंस फाउंडेशन द्वारा टिड्डी नियंत्रण के लिए कांन्फ्रेंस

भोपाल। रिलायंस फाउंडेशन द्वारा मल्टी लोकेशन डायलॉग कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से कीटशास्त्र के वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों ने इस आयोजन में भाग लिया। जिसमें किसानों के लिए गर्मियों में सब्जी भाजी में कीट नियंत्रण के साथ-साथ प्रदेश में चल रही प्रमुख समस्या टिड्डी कीट नियंत्रण किस प्रकार से किया जाए, मुख्य रूप से चर्चा का विषय रहा।

इसमें रिलायंस फाउंडेशन द्वारा मध्य प्रदेश के 42 जिलों के कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन, आजीविका कृषिसखी एवं फील्ड स्टाफ ने भाग लिया। इसमें कृषि वैज्ञानिकगण डॉ. जे.के.सिंह सीहोर, डॉ. शेखर सिंह बघेल, डॉ. मोनी थामस जबलपुर, डॉ. कायम सिंह केवीके शाजापुर, डॉ. लाल सिंह केवीके राजगढ़, डॉ. जे. के. कनौजिया केवीके सीहोर, और श्री मनीष पवार स्टेट मैनेजर फार्म लाइवलीहुड म.प्र. ने जानकारी दी।मल्टी लोकेशन डायलॉग कॉन्फ्रेंस का संचालन रिलायंस फाउंडेशन के श्री जगदीश प्रजापति ने किया।

टिड्डी दल रात को पहुंचाता है फसलों को नुकसान

ये टिड्डी दल समूह में रात्रिकालीन के समय खेतो में रूककर फसलों को नुकसान पहुंचाता है एवं जमीन में लगभग 500 से 1000 अंडे प्रति मादा कीट देकर सुबह उड़ कर के आगे चला जाता है। टिड्डी दल के समूह में लाखों की संख्या होती है, ये जहाँ भी पेड़ पौधे या अन्य वनस्पति दिखाई देती है उसको खाकर आगे बढ़ जाते है। टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव हेतु सभी किसान भाई को सलाह दी जाती है कि अपने स्तर पर अपने गाँव में समूह बनाकर खेतो में रात्रिकालीन के समय निगरानी रखे। यदि टिड्डी दल का प्रकोप होता है तो किसान निम्न प्रकार से अपने उपायों को कर सकते हैं जैसे कि

  1. किसान भाई, किसान दीदी इस कीट की सतत् निगरानी रखे, यह कीट किसी भी समय खेतों में आक्रमण कर क्षति पंहुचा सकता है। शाम 7 बजे से 9 बजे के मध्य यह दल रात्रिकालीन विश्राम के लिए कहीं भी बैठ सकते हैं जिसकी पहचान एवं जानकारी के लिए स्थानीय स्तर पर दल बनाकर सतत निगरानी रखे।

  2. जैसे ही किसी गाँव में टिड्डी दल के आक्रमण एवं पहचान की जानकारी मिलती है तो त्वरित गति से स्थानीय प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर जानकारी देवे।

  3. यदि टिडडी दल का प्रकोप हो गया है तो सभी किसान भाई टोली बनाकर विभिन्‍न तरह की परम्परागत उपाय जेसे ढोल, डीजे बजाकर, थाली, टीन के डिब्बे से शोर मचाकर, ट्रैक्टर का सायलेंसर निकालकर चलाकर, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर टिड्डी दल को खेतों से भागाया जा सकता है।

  4. यदि शाम के समय टिड्डी दल का प्रकोप हो गया है तो टिडडी की विश्राम अवस्था में सुबह 3 बजे से 5 बजे के बीच में तुरंत कीटनाशी दवायें क्‍लोरोपायरीफास 20 ई.सी. 200 मि.ली. या लेम्डासाईलोयिन 5 ई.सी. 400 मि.ल्री. या डाईफ्लूबेन्जूसन 25 WT 240 ग्राम प्रति है. 500 लीटर पानी में मिलाकर ट्रैक्टर चल्रित स्प्रे पम्प (पावर स्प्रेयर) से छिड़काव करें।

  5. रासायनिक कीटनाशी पाउडर फेनबिलरेड 0.4 प्रतिशत 20-25 कि.ग्रा. या क्‍यूनालफ़ास .5 प्रतिशत 25 किग्रा. प्रति है. भुरकाव करे।

  6. टिड्डी दल के आक्रमण हो जाने के बाद यदि कीटनाशी दवा उपलब्ध न हो इस दशा में ट्रेक्टर चलित (पावर स्प्रेयर) के द्वारा पानी की तेज बौछार से भी भगाया जा सकता है।
    अधिक जानकारी के लिए रिलायंस फाउंडेशन के टोल फ्री नंबर 1800 419 8800 पर सुबह 9:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक फोन कर संपर्क कर सकते हैं।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।