ज़ीरो टिलेज तकनीक से बदलेगी खेती, श्रम और लागत में बड़ी बचत; किसानों को प्रति फसल 10–12 हजार तक का होगा फायदा
29 नवंबर 2025, भोपाल: ज़ीरो टिलेज तकनीक से बदलेगी खेती, श्रम और लागत में बड़ी बचत; किसानों को प्रति फसल 10–12 हजार तक का होगा फायदा – मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले में आधुनिक कृषि उपकरणों को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा ज़ीरो टिलेज आधारित उन्नत कृषि यंत्रों—सुपर सीडर, हैप्पी सीडर एवं स्मार्ट सीड ड्रिल—के लिए कुल 10 कृषकों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से शहपुरा विकासखंड के ग्राम बरगांव के किसान यतेंद्र कुमार साहू को सुपर सीडर के लिए अनुदान स्वीकृत हुआ है। वे जिले के प्रथम लाभार्थी बने हैं और रबी सीजन में नरवाई जलाए बिना गेहूं एवं चना की बुवाई कर रहे हैं।
किसान को मिला 2.80 लाख का सुपर सीडर, 1.20 लाख का अनुदान
जिले में नौ किसानों ने सुपर सीडर और एक किसान ने हैप्पी सीडर हेतु पंजीकरण कराया था। चयनित किसान को 2 लाख 80 हजार रुपए कीमत वाला सुपर सीडर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिस पर शासन द्वारा 1 लाख 20 हजार रुपए का अनुदान स्वीकृत किया गया है।
जुताई, सिंचाई और बीज की बचत—खर्च में 10 से 12 हजार की कमी
सुपर सीडर से बुवाई करने पर पारंपरिक खेती की दो जुताइयों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। इससे न केवल समय और लागत की बचत होती है, बल्कि एक सिंचाई और लगभग 25 किलो चने के बीज की भी बचत होती है। प्रति हेक्टेयर 10 से 12 हजार रुपए तक की सीधी आर्थिक बचत किसानों को मिल रही है।
फसल का बेहतर जमाव—खाद और बीज समान दूरी पर
यह मशीन बीज एवं खाद को समान दूरी पर गिराती है, जिससे पौधों की संख्या संतुलित रहती है और जमाव की दर लगभग पूर्ण होती है। परिणामस्वरूप फसल की बढ़वार पहले की तुलना में अधिक समान एवं मजबूत होती है। सुपर सीडर जुताई और बुवाई दोनों कार्य एक साथ कर मिट्टी की नमी को सुरक्षित रखता है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।
किसानों से अपील
उप संचालक कृषि ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे सुपर सीडर, स्मार्ट सीड ड्रिल एवं अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर जल, बीज और खाद की बचत के साथ उत्पादन बढ़ाएं तथा फसल अवशेष जलाने से होने वाले पर्यावरणीय दुष्प्रभाव से भी बचें।
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