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राज्य कृषि समाचार (State News)

हार्वेस्टर मशीन से गेहूं कटाई के साथ बन रहा भूसा, नरवाई जलाने की जरूरत खत्म

13 मार्च 2026, भोपाल: हार्वेस्टर मशीन से गेहूं कटाई के साथ बन रहा भूसा, नरवाई जलाने की जरूरत खत्म – मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कलेक्टर बालागुरू के. के निर्देशानुसार जिले में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग द्वारा किसानों को अनुदान पर हार्वेस्टर एवं अन्य कृषि मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनकी सहायता से गेहूं की कटाई के साथ-साथ नरवाई से भूसा भी तैयार किया जा रहा है।

इस तकनीक के उपयोग से किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल रहा है तथा खेतों में नरवाई जलाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती। कृषि उप संचालक अशोक उपाध्याय ने बताया कि इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि खेतों की उर्वरता भी बनी रहती है और किसानों को बेहतर नरवाई प्रबंधन का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा विभाग द्वारा किसानों को जागरूक करने के लिए लाउडस्पीकर के माध्यम से निरंतर प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है, ताकि जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके।

 नरवाई प्रबंधन के लिए सरकार भी दे रही यंत्रों पर अनुदान

कृषकों द्वारा नरवाई को जलाने से रोकने के लिए शासन द्वारा भी कई कदम उठाये गये हैं, जिसमें प्रदेश स्तर पर 46,800 से अधिक नरवाई प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र अनुदान पर वितरित करने के लिए कुल 468 करोड़ रूपये की अनुदान राशि जारी की गई है। वर्ष 2025-26 में नरवाई प्रबंधन से संबंधित 15 फसल अवशेष सप्लाई चैन (एग्रीगेटर) स्थापित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में नरवाई प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ रीपर, बेलर जैसे 07 हजार कृषि यंत्रों को अनुदान के माध्यम से वितरित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

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 नरवाई प्रबंधन में यंत्रों के उपयोग की कलेक्टर ने की अपील

कलेक्टर बालागुरू के. ने किसानों से नरवाई प्रबंधन यंत्र अपनाने व नरवाई न जलाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि भूमि की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने हेतु खेतों में नरवाई नहीं जलाएं। सरकार किसानों को नरवाई प्रबंधन में उपयोग किये जाने वाले यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही हैं। जो किसान यंत्र नही खरीद सकते वो किराये पर लेकर उपयोग करें, इन यंत्र के उपयोग से उत्पादन भी अधिक होगा तथा लागत भी कम लगेगी। कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि किसान कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर अपनी उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें और पर्यावरण का संरक्षण करें।

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