राज्य कृषि समाचार (State News)

उदयपुर कृषि विश्वविद्यालय में किसानों को ‘विराट’ बीज वितरण, उन्नत कृषि तकनीकों की दी जानकारी

लेखक: राम नारायण कुम्हार, मीडिया प्रकोष्ठ & सह जन संपर्क अधिकारी, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर

21 मार्च 2026, उदयपुर: उदयपुर कृषि विश्वविद्यालय में किसानों को ‘विराट’ बीज वितरण, उन्नत कृषि तकनीकों की दी जानकारी – महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में समन्वित गेहूं एवं जौ सुधार परियोजना के अंतर्गत संचालित TSP अनुसूचित जनजाति योजना के तहत जायद मूंग की उन्नत किस्म ‘विराट’ का बीज 50 चयनित किसानों को वितरित किया गया। इस अवसर पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया, जिसमें किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में परियोजना प्रभारी डॉ. जगदीश चौधरी ने जायद मूंग की उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियों, उच्च गुणवत्ता वाले बीज चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं बेहतर फसल पद्धतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘विराट’ किस्म अधिक उत्पादन क्षमता के साथ रोगों के प्रति सहनशील है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि संभव है।

मृदा वैज्ञानिक (Soil Scientist) डॉ. उर्मिला ने मृदा जांच, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा दलहनी फसलों में संतुलित पोषण प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कर फसलवार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी, जिससे उत्पादन में वृद्धि के साथ मृदा की उर्वरता बनी रहे।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. अमित बिश्नोई ने बदलते मौसम के परिप्रेक्ष्य में दलहनी फसलों के समुचित प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था, पोषक तत्व प्रबंधन तथा समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण की रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मौसम आधारित कृषि पद्धतियां अपनाने की सलाह दी।

वहीं, वैज्ञानिक सूत्रकर्मी विभाग के डॉ. चंद्र प्रकाश नामा ने फसलों में लगने वाले सूत्रकर्मी (निमेटोड) की पहचान, उसके जीवन चक्र, फसल पर होने वाले नुकसान तथा समेकित प्रबंधन (Integrated Nematode Management) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जैविक, सांस्कृतिक एवं रासायनिक उपायों के समन्वित उपयोग पर जोर देते हुए किसानों को फसल चक्र अपनाने, प्रतिरोधी किस्मों का चयन करने तथा समय-समय पर खेत की निगरानी करने की सलाह दी।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमित बिश्नोई ने सभी अतिथियों एवं किसानों का आभार व्यक्त किया तथा किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यक्रम का समापन किया।

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