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राज्य कृषि समाचार (State News)

उत्तरप्रदेश: कन्नौज में 141 करोड़ का काऊ मिल्क प्लांट फिर होगा चालू, NDDB ने संभाली जिम्मेदारी

20 दिसंबर 2025, भोपाल: उत्तरप्रदेश: कन्नौज में 141 करोड़ का काऊ मिल्क प्लांट फिर होगा चालू, NDDB ने संभाली जिम्मेदारी – उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में लंबे समय से बंद पड़ा काऊ मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट अब एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। करीब 141 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्लांट को दोबारा चालू करने की जिम्मेदारी नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) ने संभाल ली है। इससे कन्नौज सहित आसपास के कई जिलों के पशुपालकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

चार साल से बंद था प्लांट

कन्नौज के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित यह काऊ मिल्क प्लांट लगभग एक लाख लीटर दूध प्रतिदिन प्रोसेस करने की क्षमता रखता है। साल 2015 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था और 2018 में प्लांट का संचालन शुरू किया गया था। हालांकि, बजट की कमी और संचालन संबंधी दिक्कतों के चलते यह प्लांट 2022 में बंद हो गया था। तब से अब तक प्लांट पर ताला लटका रहा और अंदर लगी महंगी मशीनें भी निष्क्रिय पड़ी थीं।

विदेशी तकनीक से लैस है प्लांट

इस मिल्क प्लांट में जर्मनी और फ्रांस से मंगाई गई अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इनमें दूध को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक चिलर सिस्टम, प्रोसेसिंग यूनिट और ऑटोमैटिक क्लीनिंग व फिल्टर मशीनें शामिल हैं। प्लांट को इस तरह तैयार किया गया था कि दूध की गुणवत्ता बनी रहे और बड़े स्तर पर प्रोसेसिंग संभव हो सके।

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NDDB ने लिया प्लांट लीज पर

यूपी सरकार ने यह प्लांट तैयार कर रखा था, लेकिन संचालन में आ रही समस्याओं के बाद अब इसे NDDB को लीज पर दिया गया है। बोर्ड की ओर से प्लांट को दोबारा चालू करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उम्मीद है कि तकनीकी सुधार और बेहतर प्रबंधन के जरिए प्लांट को स्थायी रूप से संचालित किया जाएगा।

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कई जिलों से आएगा दूध

पहले संचालन के दौरान इस प्लांट में आगरा, मथुरा, कन्नौज, फिरोजाबाद, एटा, हाथरस, अलीगढ़, बुलंदशहर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरेया, बरेली, मैनपुरी, हमीरपुर, हरदोई, शाहजहांपुर, बाराबंकी और फर्रुखाबाद समेत कई जिलों से दूध की आपूर्ति होती थी। अब दोबारा संचालन शुरू होने पर इस दायरे के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

बजट संकट बना था बंदी की वजह

जानकारों के मुताबिक, प्लांट में पहले 52 कर्मचारी अलग-अलग शिफ्ट में काम करते थे, जिनमें अधिकारी, तकनीकी स्टाफ, मजदूर और सुरक्षा कर्मी शामिल थे। लेकिन समय के साथ बजट की कमी इतनी बढ़ गई कि कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो गया। कई बार सरकार को बजट के लिए पत्र भेजे गए, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया और अंततः प्लांट को बंद करना पड़ा।

पशुपालकों को मिलेगी बड़ी राहत

अब NDDB के हाथ में जिम्मेदारी आने के बाद पशुपालकों को उम्मीद है कि उन्हें अपने दूध की स्थायी और भरोसेमंद खरीद व्यवस्था मिलेगी। इससे न केवल दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। 

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