उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत जैव प्रेरकों को स्वीकृति मिली

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1 मार्च 2021, इंदौर । उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत जैव प्रेरकों को स्वीकृति मिली – केंद्र सरकार द्वारा उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत जैव प्रेरकों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस संबंध में केंद्रीय कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा गत 23 फरवरी को असाधारण राजपत्र में उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियंत्रण आदेश 1985 में संशोधित किए जाने का आदेश प्रकाशित किया गया है, जो प्रकाशन की तिथि से लागू होगा। बता दें कि इन जैव प्रेरकों को अब तक उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत शामिल नहीं किया गया था, इसलिए कई राज्यों में अघोषित प्रतिबंध जैसी स्थिति थी, लेकिन अब राजपत्र में इसकी अधिसूचना के प्रकाशन के बाद कृषि विभाग इसकी अनुमति दे सकेगा। निर्माता कंपनियों की एक बहु प्रतीक्षित मांग पूरी हो गई है।

जैव प्रेरक से आशय

जैव प्रेरक, जिसमें कोई पदार्थ या सूक्ष्म जीव या दोनों शामिल हैं, जिनका मुख्य कार्य पादपों,बीजों या राइजोस्फियर पर उपयोग करने पर वह भौतिक क्रियाओं को प्रेरित करता है, जिससे उनमें वृद्धि होने, उपज बढ़ाने और सहनशीलता में वृद्धि करता है, किन्तु जिसके अंतर्गत नाशक जीवमार या पादप वृद्धि विनियामक में शामिल नहीं है, जिनका विनियमन कीटनाशी अधिनियम 1968 के अधीन किया जाता है। जैव प्रेरक के विनिर्देश जिसमें उसका नाम, क्रियाशील अवयव या जहां इसकी पहचान सम्भव नहीं है, तब रासायनिक संयोजन, फसल का नाम, जिसको यह लागू हो सकेगी उसके क्रियाशील अवयव या रासायनिक संयोजन के निश्चय के लिए लाभ और रीति को केंद्रीय सरकार द्वारा अनुसूची 1द्ब में शामिल किया जाएगा।

प्रवर्ग वर्गीकरण 

जैव प्रेरक जिन प्रवर्गों के अधीन वर्गीकृत होंगे उनमें वनस्पति अर्क जिसके अंतर्गत समुद्री शैवाल अर्क भी है, के अलावा जैव रसायन, प्रोटीन हाइड्रोलाइसेट्स, अमीनो एसिड्स, विटामिन, सैल मुक्त सूक्ष्म जीव उत्पाद, एंटीऑक्सीडेंट, अपारदर्शी, धरणिक और फुल्विक एसिड और उनके यौगिक शामिल हैं। जैव प्रेरक विनिर्माता या आयातकर्ता को इसे प्रेरक के रूप में शामिल करने के लिए प्रारूप 6 में नियंत्रक को आवेदन करना होगा। जिसमें रसायन, उसके स्रोत (पादप, सूक्ष्म जीव आदि) उत्पाद विनिर्देश (गुड लेबोरेटरी प्रेक्टिस) से विश्लेषण सहित या प्रशिक्षण, अंश शोधन प्रयोगशाला के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड प्रत्यायित प्रयोगशाला की एकीकृत और सहायक क्रियाओं की रासायनिक और भौतिक सम्पत्तियों, यदि कोई हो तो उसका उल्लेख करना होगा।

प्रभावकारिता परीक्षण

जैव प्रेरक के आवेदक को जैव प्रभावकारिता परीक्षण, राष्ट्रीय कृषि अनुसन्धान तंत्र जिसमें भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् और राज्य कृषि वि.वि. भी हैं, में संचालित किया जाएगा। यह परीक्षण कम से कम एक मौसम में तीन विभिन्न खुराकों के रूप में तीन कृषि पारिस्थितिकी अवस्थानों पर संचालित होंगे। विषाक्ता संस्थान जहां विनिर्माता जैव प्रेरक के लिए प्रमाण पत्र प्राप्त किया है, प्रत्यायित प्रयोगशाला पांच मूल घोर विषाक्ता परीक्षण और चार पर्यावरण परीक्षण की सिफारिश के साथ परीक्ष रिपोर्ट आवेदन के साथ प्रस्तुत करना होगा। भारी धातु विश्लेषण रिपोर्ट के अलावा विनिर्माता या आयातकर्ता को दस रुपए के गैर न्यायिक स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र पर यह घोषणा करनी होगी कि उत्पाद 0 .01 पीपीएम की अनुज्ञेय सीमा से अधिक कीटनाशक नहीं रखता है। जैव प्रेरक के प्राकृतिक मूल या अन्य दशा में जरुरी आंकड़ों के बजाय इसके लिए बनाए गए दिशा निर्देशों के अनुसार केंद्रीय जैव प्रेरक समिति द्वारा निश्चित की जाएगी।

वर्तमान निर्माताओं का रजिस्ट्रेशन

यदि कोई निर्माता इस आदेश के प्रकाशन की तिथि पर जैव प्रेरक का निर्माण कर रहा है, जिसमें कोई मानक निर्धारित नहीं किए गए हैं तो इस आदेश के प्रकाशन की तारीख से दो वर्षों की अवधि के लिए ऐसे जैव प्रेरक को बिक्री, विक्रय के प्रस्ताव, भंडार या प्रदर्शन के लिए विनिर्माण को जारी करने के लिए उप खंड (5) के अधीन अन्त: कालीन रजिस्ट्रीकरण को प्रदान करने के लिए आवेदन करने के अधीन होगा, जिसमें नियंत्रक को दिए आवेदन में उत्पाद के ब्यौरे, निर्देश, लेबल और अन्य अपेक्षित जानकारियों का उल्लेख करेगा कि उक्त उत्पाद आदेश के प्रकाशन से पहले बाजार में उपलब्ध है और उत्पाद के कारण कोई हानिकारक घटना नोटिस में नहीं आई है। इसके पश्चात् नियंत्रक जैव प्रेरक के रजिस्ट्रीकरण का अंत: कालीन प्रमाण पत्र जारी करेगा।

जैव प्रेरक अनुसूची vi में शामिल होना जरुरी

कोई व्यक्ति तब तक किसी जैव प्रेरक का ििनर्माण या आयात नहीं कर सकेगा जब तक वह जैव प्रेरक अनुसूची 1द्ब में शामिल नहीं है। इसके बाद ही नियंत्रक द्वारा उसका नाम प्रकाशित किया जाएगा। इसके अलावा कोई जैव प्रेरक विभिन्न धातुओं के लिए तय की गई अधिकतम सीमा से अधिक भारी धातु अंतर्वस्तु नहीं करेगा। जो न्यूनतम 5 मि.ग्रा. से अधिकतम 1000 मि.ग्रा. है। इसकी पृथक से सूची दी गई है। कोई जैव प्रेरक 0 .01 पीपीएम की अनुज्ञेय सीमा से अधिक कोई कीटनाशक नहीं रखेगा। जैव प्रेरक उत्पाद के पैक पात्र पर इसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा।

नमूनों का विश्लेषण 

किसी निरीक्षक द्वारा जैव प्रेरक नमूना केंद्रीय उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण और प्रशिक्षण संस्थान, फरीदाबाद या प्रादेशिक प्रयोगशालाओं या केंद्र सरकार के पूर्व अनुमोदन से विश्लेषित किया जाएगा। जैव प्रेरक समिति किसी जैव प्रेरक को शामिल करने, अन्य विष्टियाँ, नमूना लेने, विश्लेषण की विधि, प्रयोगशालाओं के लिए न्यूनतम अपेक्षाएं, जैव प्रेरक जांचने की विधि और केंद्र सरकार के किसी विषय पर उसे सलाह दे सकेगी। उक्त आदेश में जैव प्रेरक नमूना लेने की प्रक्रिया और परीक्षण कार्य पद्धति का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

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