छिंदवाड़ा जिले में जैविक खेती का दिया गया प्रशिक्षण
08 जनवरी 2026, छिन्दवाड़ा: छिंदवाड़ा जिले में जैविक खेती का दिया गया प्रशिक्षण – विकासखंड मोहखेड़ की ग्राम पंचायत पालाखेड़ में आज ग्राम पंचायत पालाखेड़ एवं अंबामाली के नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना में पंजीकृत किसानों का प्राकृतिक कृषि से होने वाले लाभ एवं पंचमहाभूत कृषि का परिचय विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें विकासखंड तकनीकी प्रबंधक सुश्री प्रिया कराड़े उपस्थित थीं। उन्होंने जैविक खेती की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित किसानों को बताया कि वर्तमान समय में हमारे देश का उत्पादन सर प्लस है किंतु उत्पादन की क्वालिटी में निम्नता के कारण विदेश में हमारा अनाज निर्यात नहीं किया जा सकता है। रासायनिक खेती से उत्पादित अनाज के अंदर रासायनिक कंटेंट ज्यादा होने से विदेश में हमारे देश के अनाज की मांग घट रही है। इसलिये मांग घटने से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में फसल का मूल्य सही प्राप्त नहीं हो पा रहा है । अच्छी गुणवत्तापूर्ण फसल प्राप्त करने के लिए हमें जैविक खेती की ओर अग्रसर होना ही होगा।
ऊर्जा आधारित प्राकृतिक कृषि के प्रशिक्षक श्री राजेश धारे ने प्रशिक्षण में उपस्थित लोगों को जैविक कृषि के लाभों पर चर्चा के दौरान बताया कि कृषि में उर्जा का महत्व कितना है। पूरी सृष्टि ऊर्जा से संचालित है। ऊर्जा दो प्रकार की होती है। पहली उर्ध्वगामी ऊर्जा (पॉजिटिव) दूसरी अधोगामी ऊर्जा (नकारात्मक)। नकारात्मक ऊर्जा जहर के समान है जो प्राणी को लचीला चमकीला तथा आलसी बनाता है । रसायनिक खाद दवा भी नकारात्मक उर्जा देते है जिससे हमारी फसलें, पेड़-पौधे भी लचीले चमकीले और आलसी हो जाते हैं, जिससे उनमें बीमारियां अधिक आती है। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे उत्पादन घटता है और लागत ज्यादा आती है।
“जीवों जीवस्य जीवनम्” जैविक/ प्राकृतिक खेती जीवों जीवस्य जीवनम् के सिद्धांत पर खेती के अधिकतर कार्य जीवाणुओं के द्वारा ही नैसर्गिक रूप से करवाएं जाते है इसलिए मिट्टी में जीवाणुओं की संख्या बढ़ाए जाने के प्रयास किए जाने चाहिए । प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जैविक खेती में ऊर्जा विज्ञान के प्रयोग कर उर्जा के प्रभावों का खेती मे पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बताया कि पंचमहाभूत आधारित प्राकृतिक कृषि पद्धति में खेती करने के लिए हमें ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता नहीं है। यदि हम अपने खेत में ऊर्जा को पॉजिटिव कर देते है एवं पंचमहाभूतों को स्थापित कर लेते है तो पंचमहाभूत स्वयं ही अपना काम करना प्रारंभ कर देते हैं। वह भूमि में बैक्टीरिया की मात्रा को बढ़ाकर खेती के कार्यों में हमारी सहायता करते हैं और फसल में आने वाले कीटाणु और इल्लियों की समस्या से भी निजात पाया जा सकता है। नकारात्मक ऊर्जा के खत्म करते ही नकारात्मक खरपतवार एवं कीड़े मकोड़े खेत में आना स्वयं ही बंद हो जाते हैं। इस प्रकार से खेती में किसान की लागत घटती है और मेहनत भी, जिससे किसान मानसिक रूप से भी स्वतंत्र व स्वस्थ्य रहता है और अपने खेतों की देखभाल अच्छे ढंग से कर सकता है। जैविक कृषि के पंचमहाभूत आधारित कृषि में कई लाभ है जो हमारे स्वयं के जीवन को भी सरल बनाती है। प्रशिक्षण के अंत में खेत में लेजाकर फसल का प्रदर्शन किया गया, जिसमें आए किसानों ने कहा कि ऐसी फसल तो रासायनिक खेती में भी नही होती। कार्यक्रम में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सिल्लेवानी सुश्री भाग्यश्री कड़वे, कृषि सखी सुश्री छाया गाडरे, सुश्री रोशनी नायक, समाजकार्य स्नातकोत्तर विद्यार्थी नरेंद्र घाघरे एवं पालाखेड़ व अंबामाली के जैविक कृषक सम्मिलित हुए।
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