इंदौर में तीन दिवसीय सोया महाकुम्भ का आयोजन

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9 जून 2022, इंदौर । इंदौर में तीन दिवसीय सोया महाकुम्भ का आयोजन सोयाबीन की उन्नत उत्पादन तकनीकी, नवीनतम कृषि पद्धतियों एवं उन्नत किस्मों का सोया कृषकों में प्रचार-प्रसार बढ़ाने के उद्धेश्य से भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास सोसायटी, सोलिडारिडाड, भोपाल और सोपा इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय ‘सोया महाकुम्भ’ का आयोजन देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में गत दिनों किया गया। महाकुम्भ का शुभारम्भ केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी, कृषि मंत्री श्री कमल पटेल, महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली डॉ. त्रिलोचन महापात्रा , सांसद श्री शंकर लालवानी और भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान की कार्यवाहक निदेशक डॉ. नीता खांडेकर की मौजूदगी में किया गया।

कृषि का बजट आवंटन बढ़ाया

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि भारत सरकार ने कृषि के बजटीय आवंटन को बढ़ाकर 1 लाख 32 हजार करोड़ कर दिया है, जो 2014 के बाद से रिकॉर्ड वृद्धि है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्टचर फंड के लिए एक लाख करोड़ का प्रावधान किया है। श्री चौधरी ने जानकारी दी कि आगामी 2 अक्टूबर से किसानों के लिए एक नया हेल्प नंबर जारी किया जाएगा,जो देश के कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि वैज्ञानिकों से जुड़ा रहेगा।

कृषि मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश के किसानों के लिए राज्य सरकार ने किसान केंद्रित नीतियां बनाई हैं। एमएसपी के माध्यम से खरीद की अधिकतम सीमा को हटा दिया गया है, जिससे राज्य के किसानों को लाभ हुआ है। उन्होंने फसल बीमा योजना पर प्रकाश डाला, जिससे पिछले दो वर्षों के दौरान मप्र के किसानों को 17 हजार करोड़ रुपये का लाभ हुआ है।
सांसद श्री लालवानी ने बताया कि भारत सरकार ने उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि नहीं होने दी। विशेष रूप से यूरिया, जो पौधों की वृद्धि के लिए एक प्रमुख तत्व है।

प्रजनक बीज उत्पादन का लक्ष्य हासिल

डॉ. महापात्रा ने कहा कि देश के विभिन्न संस्थानों ने देश को सोयाबीन की 164 किस्में दी हैं। सोयाबीन के उत्पादन में वृद्धि भी हुई है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं हैं। राज्यों से मांग आने पर प्रजनक बीज से आधार और प्रमाणित बीज तैयार किए जाते हैं। अभी देश को 12 लाख टन प्रमाणित बीज की आवश्यकता है। यदि इस लक्ष्य को पा लिया तो फिर बीज की कमी नहीं रहेगी। बार-बार एक ही बीज के इस्तेमाल करने से उत्पादकता प्रभावित होती है। बीज परिवर्तन करना समय की मांग हैं। इसे लेकर पिछले तीन सालों से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। 30 से 35 प्रतिशत बीज परिवर्तन के लक्ष्य को पाया जा सकता है, जिसमें सबको मिलकर काम करने की जरूरत है। सोयाबीन की प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता पिछले कुछ दशकों से लगभग 1 टन प्रति हे. है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की नई किस्मों का गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन में वृद्धि से ही सोयाबीन की उत्पादकता को 20-30 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि 14,326 क्विंटल के प्रजनक बीज (ब्रीडर बीज) उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया गया है।

नवाचार करने वाले किसान पुरस्कृत

डॉ. महापात्रा ने विभिन्न राज्यों से सोयाबीन की खेती में नवाचार कर अधिकाधिक उत्पादन प्राप्त करने वाले किसानों को पुरस्कृत किया। ये हैं; श्री गजानंद (इंदौर,मप्र), श्री रशपाल (उतर प्रदेश), श्री बनेसिंह चौहान (धार,मप्र), श्री कुमार मगदुम (कर्नाटक), श्री अनिल वर्मा (सिहोर, मप्र),श्री पृथ्वी सिंह सोलंकी (खरगोन, मप्र), श्री दिलीप (वाशिम, महाराष्ट्र), श्री हरपाल सिंह चौहान (मप्र), श्री सागर हिन्दुले (कोल्हापुर, महाराष्ट्र),श्री गुलनारायण (मप्र), श्री मह्न्तेश पुजर (मप्र), श्री बलजीत सिंह (उत्तर प्रदेश), श्री च. रंगखुपलियन (मणिपुर) तथा श्रीजुझार सिंह (पंजाब)। डॉ. नीता खांडेकर ने अपने स्वागत भाषण में अनुसंधान जनित तकनीकियों एवं नवीनतम पद्धतियों को किसानों तक ले जाने के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी।

दो तकनीकी सत्रों का आयोजन

दूसरे दिन कृषकों के लिए दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया।प्रथम सत्र ‘फंटास्टिक सेवन-फ़ूड, फोडर,फ्यूल,फर्टिलाइजर मेडिसिनल एवं कोस्मेटिक्स में सोयाबीन ‘शीर्षक पर डॉ. सुधा मैसूर, सी.ई.ओ., एग्री इनोवेट इंडिया, दिल्ली की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इसमें विशेषज्ञ के रूप में श्री सुमित के अग्रवाल, निदेशक, जैव पोषक तत्व (इंडिया) प्राइवेट लि., डॉ. दीपिका, केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल; डॉ. एम.एम. अंसारी, पूर्व-पीएस, डॉ. लोकेश मीणा, वैज्ञानिक, डॉ.आर.के वर्मा वैज्ञानिक, आईआईएसआर इंदौर ने कृषकों के सवालों एवं शंकाओं का निराकरण किया। इस तकनीकी सत्र का समन्वयन डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने किया। द्वितीय तकनीकी सत्र में ‘सतत सोयाबीन उत्पादन हेतु आधुनिक प्रसार प्रणालियाँ’ विषय पर डॉ. शिव कुमार अग्रवाल, इंटरनेशनल सेंटर फॉर ड्रायलैंड एग्रीकल्चर, फ़ूड लेगुम की अध्यक्षता में हुआ। समन्वयन डॉ. बी.यू. दुपारे ने किया। विशेषज्ञ के रूप में डॉ. सुरेश मोटवानी, सॉलिडरीडाड, भोपाल; डॉ. डी.एन.पाठक, कार्यकारी निदेशक, सोपा इंदौर, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ शर्मा, डॉ. राघवेन्द्र मदार, डॉ. संजीव कुमार तथा मंथन संस्था के डॉ. रजत सक्सेना ने कृषकों की समस्याओं का निराकरण किया।

तकनीकी सत्रों में प्रमुख रूप से फार्मर प्रोडूसर कंपनी बनाने, सोया बीज उत्पादन कार्यक्रम की गति बढ़ाकर अधिक से अधिक किसानों तक नवीनतम पद्धतियों एवं किस्मों के विस्तार की बात की गई। इसी प्रकार सोया खाद्य उत्पादों को जनता में उपलब्धता के लिए स्टार्ट अप शुरू करने के लिए एग्री बिजनेस इन्कुवेशन केन्द्रों के माध्यम से मदद का आश्वासन दिया गया।

सोया महाकुंभ का समापन

तीसरे दिन सोया महाकुंभ और कृषि प्रदर्शनी का समापन हो गया। इस आयोजन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान जैसे प्रमुख सोया उत्पादक राज्यों के 4300 सोया किसानों ने भाग लिया।

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