राज्य कृषि समाचार (State News)

कटनी के कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने किसानों को दी आधुनिक खेती की सीख  

14 फरवरी 2026, कटनी: कटनी के कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने किसानों को दी आधुनिक खेती की सीख  – कृषक कल्याण वर्ष 2026 समृद्ध किसान समृद्ध मध्यप्रदेश के तहत कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के मार्गदर्शन में एवं उप संचालक कृषि श्रीमती अरूणिमा सेन के नेतृत्व में कृषि विभाग का रथ गाँव-गाँव में लगातार घूम कर कृषकों का मार्गदर्शन कर रहा है।  इसी क्रम में विकासखंड कटनी के ग्राम पूंछी और बिस्तारा में कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी दी।    

 विकासखंड कटनी के ग्राम पूंछी और बिस्तारा में कृषि अभियांत्रिकी विभाग के उपयंत्री श्री संदीप पीपड़ा ने किसानों को खेती में गहरी जुताई के महत्व के बारे में विस्तार से बताते  हुए  जानकारी दी कि खेत में  ट्रैक्टर  व हार्वेस्टर चलने से तथा रासायनिक खाद के डालने से जमीन बहुत अधिक कठोर होती जा रही है। इससे जब हम गहरी जुताई करते हैं तो कृषि यंत्र पलाऊ की सब्बल जमीन में 8 से 10 इंच गहरी घुस कर  मिट्टी को उलट पलट देती है इससे मिट्टी के अंदर जो हानिकारक जीवाणु है वह ऊपर आ जाते  हैं । जैसे दीमक, इल्ली व उनके अंडे आदि वह तेज धूप लगने से मर जाते  हैं । खेत में जो खरपतवार व घास आदि लगी होती है  मिट्टी  पलटने से व ऊपर आ जाती है और तेज धूप में वह पूरी तरह से सूख कर मिट्टी में मिल जाती है। जो खाद के रूप में परिवर्तित हो जाती है  तथा  मिट्टी  के पलटने से मिट्टी  का नवीनीकरण हो जाता है इससे मिट्टी अधिक उपजाऊ होती है। साथ ही जब बारिश होती है तो पानी जमीन के अन्दर परकुलेट होता है या पानी का जमीन के अंदर रिसाव होता है। इससे जमीन में पानी का स्तर ऊपर आता है। गहरी जुताई का सही समय अप्रैल व मई माह में होता है तथा जुताई के बाद कम से कम 15 से 20 दिन की तेज धूप लगना आवश्यक होता है।          

उपयंत्री श्री पीपड़ा द्वारा यह भी बताया गया कि यदि खेत में ढलान हो तो गहरी जुताई ढलान के विपरीत करना चाहिए ताकि बारिश में जब पानी गिरे तो मिट्टी का क्षरण न हो व खेत का पानी खेत में रहकर जमीन के अंदर रिसाव हो, क्योंकि यदि ढलान की दिशा में गहरी जुताई की गई तो बारिश का पानी व मिट्टी अपने खेत से बहकर दूसरे खेत में चला जायेगा। उपयंत्री श्री पीपड़ा द्वारा यह भी बताया गया  कि  गहरी जुताई प्रत्येक वर्ष करने की जरूरत नहीं है। प्रत्येक वर्ष गहरी जुताई करना स्वयं को आर्थिक क्षति  पहुंचाना  है। इसे कम से कम 3 से 5 वर्ष के अंतराल में करना चाहिए। इसके अलावा किसानों को अन्य यंत्रों की जानकारी के साथ विभाग की योजनाओं की भी जानकारी दी गई।

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