राज्य कृषि समाचार (State News)

धान की फसल पर स्वार्मिंग कैटरपिलर का अटैक, कृषि विभाग ने जारी की गाइडलाइन; ऐसे करें बचाव

27 अगस्त 2025, भोपाल: धान की फसल पर स्वार्मिंग कैटरपिलर का अटैक, कृषि विभाग ने जारी की गाइडलाइन; ऐसे करें बचाव – राजस्थान में धान की फसल में इन दिनों लटों का प्रकोप बढ़ गया है। इसी समस्या को लेकर केंद्र के कीट वैज्ञानिक प्रो. हरीश वर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार कौशल कुमार सोमाणी और अल्फा नगर के कृषि पर्यवेक्षक हेमराज वर्मा ने लट प्रभावित क्षेत्र के गाँव डोरा और तुलसी का दौरा किया।

भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि धान की फसल में स्वार्मिंग कैटरपिलर (स्पोडोप्टेरा मॉरीशिया) का प्रकोप हो रहा है। इस कीट का रंग शुरुआती अवस्था में हल्का हरा होता है, जिस पर पीली और सफेद धारियां होती हैं। बाद में ये गहरे भूरे या हरे रंग के हो जाते हैं और किनारों पर काले अर्धचंद्राकार धब्बे दिखते हैं। ये कैटरपिलर झुंड में पत्तियों को खाकर नष्ट करते हैं और पौधे के आधार तक काट डालते हैं। इसका पूरा जीवन चक्र लगभग 25 से 40 दिन का होता है, जिसमें कई पीढ़ियां पैदा होती हैं।

कीट प्रकोप बढ़ने का कारण

भ्रमण के दौरान यह भी पाया गया कि किसान नत्रजन युक्त उर्वरकों का सिफारिश से अधिक मात्रा में उपयोग कर रहे हैं, जिससे कीटों का प्रकोप और बढ़ रहा है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि नत्रजन युक्त उर्वरक (यूरिया) का संतुलित मात्रा में ही प्रयोग करें।

लट प्रबंधन के लिए विशेषज्ञों की सलाह

1. एकीकृत प्रबंधन अपनाएं: धान के खेतों में झुंड में रहने वाले कैटरपिलर को नियंत्रित करने के लिए संवर्धित, यांत्रिक और रासायनिक विधियों को मिलाकर काम करें।
2. खरपतवार साफ करें: खेत और आस-पास के क्षेत्र से खरपतवार हटाएं ताकि कीटों के छिपने और प्रजनन के स्थान कम हों।
3. प्राकृतिक शत्रुओं को बढ़ावा दें: खेत में पक्षियों के बैठने के लिए डंडे लगाएं, बत्तखों को लार्वा खाने दें और ततैया-मकड़ियों जैसे प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण करें।
4. जैविक नियंत्रण: बैसिलस थुरिजिएसिस (बीटी) या स्पोडोप्टेरा मौरेटिया न्यूक्लियोपॉलीहेड्रोवायरस (एसएमएनपीवी) जैसे सूक्ष्मजीवी उत्पादों का उपयोग करें।
5. नीम के तेल का छिड़काव करें: प्राकृतिक नियंत्रण के लिए नीम के तेल या इसके अर्क का छिड़काव करें।

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रासायनिक दवा का प्रयोग:

संक्रमण ज्यादा होने पर लार्वा की शुरुआती अवस्था में क्लोरोपाइरीफॉस 20 ई.सी. या क्यूनॉलफॉस 25 ई.सी. की 1.5 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर शाम के समय छिड़काव करें। अगर नियंत्रण नहीं होता, तो 15 दिन बाद लेम्डासायहेलोथिन 5 ई.सी. 300 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

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सावधानियां

कीटनाशकों का छिड़काव करने के बाद कम से कम एक सप्ताह तक खेत से पशुओं के लिए चारा नहीं लें। कीटनाशकों की मात्रा और पानी के अनुपात का सही प्रयोग करें। और क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक से सलाह अवश्य लें।

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