शांतिलाल ने बायो-फोर्टिफाइड गेहूं का चयन कर खेती में किया बदलाव
30 दिसंबर 2025, बड़वानी: शांतिलाल ने बायो-फोर्टिफाइड गेहूं का चयन कर खेती में किया बदलाव – खेती में नवाचार और सही मार्गदर्शन किसी भी किसान की किस्मत बदल सकता है। वरला तहसील के ग्राम सीली के रहने वाले प्रगतिशील किसान श्री शांतिलाल आर्य ने इसी राह पर चलते हुए अपनी खेती को नया आयाम दिया है।
शांतिलाल ने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने का सोचा। उन्हें कृषि विभाग के माध्यम से बायो-फोर्टिफाइड 1650 गेहूं की किस्म के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने यह उन्नत बीज कृषि विभाग की सहायता से 50 प्रतिशत के अनुदान पर प्राप्त हुए, जिससे उनकी लागत में काफी कमी आई। उन्होंने लगभग 80 किलो गेहूं की बुवाई की है, जो न केवल पोषण से भरपूर है बल्कि बेहतर पैदावार के लिए भी जानी जाती है। शांतिलाल के अनुसार, फसल की वर्तमान स्थिति बहुत अच्छी है और उन्हें इस बार अच्छे उत्पादन की उम्मीद है।
बायो-फोर्टिफाइड गेहूं न केवल बाजार में अच्छी कीमत दिलाता है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत लाभकारी है और कुपोषण से लड़ने मददगार हैं। बायोफोटिफाइड और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों में अंतर बायो-फोर्टिफाइड और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के बीच मुख्य अंतर इस पर निर्भर करता है कि पोषक तत्व कब और कैसे जोड़े गए हैं। फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों में फैक्ट्री या प्रोसेसिंग के स्तर पर ऊपर से आवश्यक पोषक तत्व जैसे विटामिन और मिनरल मिलाए जाते हैं। इसके विपरीत, बायो-फोर्टिफाइड फसलों में जेनेटिक्स और आधुनिक ब्रीडिंग तकनीकों की मदद से पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से खेत में दाने के अंदर ही विकसित होते हैं। चूँकि ये पोषक तत्व अनाज का ही हिस्सा होते हैं, इसलिए इन्हें धोने या पकाने पर भी उसकी पौष्टिकता कम नहीं होती।
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