गेहूं की दूसरी सिंचाई जरूरी, किसान सरसों-चना फसलों पर रखें सतत निगरानी: कृषि विभाग
30 जनवरी 2026, भोपाल: गेहूं की दूसरी सिंचाई जरूरी, किसान सरसों-चना फसलों पर रखें सतत निगरानी: कृषि विभाग – मध्यप्रदेश के दतिया जिले के उपसंचालक कृषि कल्याण दतिया ने जानकाीर देते हुए बताया कि गेंहू की फसल इस समय टिलरिंग (40-45 दिन) अवस्था है दूसरी सिंचाई अवश्य करें जिससे टिलर्स की संख्या में वृ़द्धि होगी। इस समय यूरिया की उपलब्धता कम होने के कारण कृषक भाई 2 कि.ग्रा. यूरिया 100 ली. पानी 500 ग्रा. जिंक सल्फेट चूने का पानी मिलाकर का छिड़काव करें, जिससे नाइट्रोजन, जिंक एवं केल्शियम की पूर्ति होगी तथा एक हेक्टर गेंहू में मात्र 10 कि.ग्रा. यूरिया से छिड़काव कर नाइट्रोजन की पूर्ति की जा सकती है।
किसान भाईयों द्वारा सरसों की फसल में सतत निगरानी रखी जाए समय झुलसा, सफेद फफोला रोग एवं म्रदरोमिल आसिता रोग की संभावना हो सकती है। यह दिखाई देने पर इसके नियन्त्रण हेतु 2.5 ग्राम मैनकोजेब अथवा 2.0 ग्राम रिडोमिल एम जेड.-72 दवा प्रति एक लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर प्रथम छिडकाव 45 दिन की अवस्था एवं दूसरा छिडकाव 55 से 60 दिन की अवस्था पर करें ।
इसी प्रकार चने की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें एवं चने की फसल में सतत निगरानी रखें इल्ली का आक्रमण़ बढने पर (2 से 3 इल्ली प्रति वर्ग मीटर) दिखाई देने पर इसके नियन्त्रण हेतु ज् आकार की खूंटी 50 प्रति हेक्टर लगाए। किसान भाई संभावित मौसम में फलदार पौधे – आम, अमरुद, कटहल, नीबू आदि के रोपित पौधों के थालों की सफाई करें एवं आवश्यकतानुसार सिंचाई करे। साथ ही आम में एक छिड़काव कॉपरआक्सीक्लोराइड 2.5 कि.ग्रा $ क्लोरोइन्ट्रोक्नॉल 150 मि.ली. 500 ली. पानी में मिलाकर छिड़काव करें। सभी फसलों में 5 से 10 प्रतिशत जीवामृत का छिड़काव किया जा सकता है।
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