बहुआयामी फसलों के उत्पादन पर शोध कृषकों की आय बढ़ाने में होगा कारगर

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17 फरवरी 2022, जबलपुर । बहुआयामी फसलों के उत्पादन पर शोध कृषकों की आय बढ़ाने में होगा कारगर – जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय स्थित कृषि महाविद्यालय के वानिकी विभाग में चल रही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ‘‘सेंट्रल एग्रोफोरेस्ट्री रिसर्च इंस्टीट्यूट झांसी‘‘ द्वारा वित्त पोषित ’एग्रोफोरेस्ट्री परियोजना’ के अनुसंधान कार्यो का कुलपति डाॅं. प्रदीप कुमार बिसेन ने निरीक्षण किया । विभागाध्यक्ष डाॅं. राकेश बाजपेई ने विस्तृत जानकारी दी। कुलपति डाॅं. बिसेन ने शोधरत् वैज्ञानिकों से अपेक्षा की कि कृषि के साथ वानिकी के बेहतरीन तालमेल किसानों खासकर आदिवासी बहुल युवाओं की आय को दोगुना करने में सहायक सिद्ध होगा। छोटे से रकबे में किसान वृक्ष, फसल उत्पादन एवं मृदा स्वास्थ्य के तालमेल से पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में महती भूमिका निभाएंगे।

परियोजना प्रभारी डाॅं. एस.बी. अग्रवाल ने वानिकी के साथ ही कृषि सहित अनेक फसलों की खेती का आदर्ष मॉडल प्रदर्शित किया। डाॅं. अग्रवाल ने बताया कि कृषि वानिकी के माध्यम से मुख्य रूप से खमीर के साथ तिलहनी फसल सरसों, आम के साथ अलसी, करंट बबूल व शीशम के साथ गेहूं आदि की अंतर्वती खेती की लाभदायी होगी। इसके साथ ही वृक्षों की पत्तियां, अंतर्वती फसल के नींदा उपरान्त अवशेषों को जलाकर नष्ट करने की जगह प्रक्षेत्र पर ही वृक्षों की छाया में केंचुआ खाद तैयार करने की सफल तकनीक की जानकारी भी प्रदान की गई।

इस दौरान संचालक अनुसंधान सेवायें डाॅं. जी.के. कौतू, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डाॅं. शरद तिवारी, सस्य विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅं. पी.बी. शर्मा की मृदा वैज्ञानिक डाॅं. शेखर सिंह बघेल, डाॅं. यशपाल सिंह, डाॅं. आर.पी. डोंगरे, डाॅं. सोलंकी, डाॅं. पूर्णिमा सूर्यवंशी, डाॅं. शिव रामकृष्णन, डाॅं. आशीष गुप्ता, डाॅं. शरद विश्वकर्मा, डाॅं. सौरभ सिंह तथा अनुसंधान कार्यों में संलग्न छात्र एवं छात्राओं की उपस्थिति रही।

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