राजस्थान में किसानों के लिए एग्रीकल्चर कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट शुरू, आय और जलवायु संरक्षण दोनों पर फोकस
09 मार्च 2026, जयपुर: राजस्थान में किसानों के लिए एग्रीकल्चर कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट शुरू, आय और जलवायु संरक्षण दोनों पर फोकस – कृषि विभाग और मैसर्स IORA ईकोलोजिकल सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के मध्य राजस्थान में एग्रीकल्चरल लैंड मैनेजमेंट कार्बन प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए सहमति हुई। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की पहल पर इस प्रकार की गतिविधि अपनाने में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में से एक है।
कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों द्वारा कार्बन उत्सर्जन घटाने वाली गतिविधियां जैसे पौधारोपण, सूक्ष्म सिंचाई, फार्म पौण्ड और सोलर पम्प की जाती है। इन गतिविधियों से कृषकों को कार्बन फाइनेंस प्राप्त हो सकता है। राजस्थान के किसानों को इन गतिविधियों पर कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम 2023 के तहत सुगमता से कार्बन फाइनेंस उपलब्ध करवाने हेतु राज्य के चयनित ब्लॉकों में कार्बन क्रेडिट को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इनमें कोटपुतली-बहरोड़ का बानसुर ब्लॉक, दौसा का महुवा और टोंक का मालपुरा ब्लॉक शामिल है। इसे प्रदेश के तीन ब्लॉकों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है, जिसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जायेगा। जिससे कृषकों की आय में वृद्धि होगी।
उक्त परियोजना अन्तर्गत किसानों द्वारा समुचित उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई में दक्षता, मृदा कार्बन संवर्धन, फसल अवशेष प्रबंधन, वृक्षारोपण, चक्रीय पशु चराई जैसी गतिविधियां अपनाये जाने पर उनको कार्बन उत्सर्जन कमी के आधार पर प्रति हेक्टेयर निर्धारित राशि देय होगी।
कार्बन क्रेडिट प्रणाली जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए बनाया गया एक आर्थिक और पर्यावरणीय तंत्र है। इसका उद्देश्य वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को नियंत्रित करना और कम करना है। दुनिया भर में औद्योगिकीकरण, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन के कारण बड़ी मात्रा में कार्बन डाईआक्साइड वातावरण में उत्सर्जित होती है। यह गैस ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण है।
इसी समस्या के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्बन क्रेडिट प्रणाली शुरू की गई है। इसके तहत कंपनियों और देशों को एक निश्चित सीमा तक कार्बन उत्सर्जन की अनुमति दी जाती है। यदि कोई संस्था निर्धारित सीमा से कम उत्सर्जन करती है तो उसे कार्बन क्रेडिट मिलते हैं जिन्हें वह अन्य कंपनियों को बेच सकती है।
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