फ्रोजेन हरी मटर उद्योग की मध्य प्रदेश में संभावनाएं

Share
  • डॉ. विजय अग्रवाल, वैज्ञानिक (उद्यानिकी)
    agrawal.kvk@gmail.com

26 अक्टूबर 2021, फ्रोजेन हरी मटर उद्योग की मध्य प्रदेश में संभावनाएं –

  • मध्यप्रदेश में कच्चे उत्पाद की पर्याप्त उपलबद्धता का प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान है। लोगों की तेजी से बदलती लाइफ स्टाइल ने खाद्य प्रसंस्कृत उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी की है। ऐसे में कारोबारी इस क्षेत्र में कम निवेश और बेहतर कारोबारी सहायता के जरिए एक नया मुकाम बना सकते हैं। प्रदेश संतरे तथा धनिया के उत्पादन में प्रथम, अमरुद, हरी मटर, लहसुन तथा प्याज के उत्पादन में द्वितीय स्थान पर तथा नीबूवर्गीय फलों तथा मिर्च उत्पादन में तृतीय स्थान पर है साथ ही फसलों के अधिशेष उपलब्धता का उपयोग खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में करके कृषकों को उत्पाद का उचित मूल्य मिलना भी आसान होगा।
  • खाद्य प्रसंस्करण के अंतर्गत फ्रोजेन सब्जी एवं फलों की मांग दिनोदिन बढ़ती जा रही है। फ्रोजेन उत्पाद में सबसे ज्यादा मांग हरी मटर की होती है। हरी मटर, जिसे ‘गार्डेन पी‘ के रूप में भी जाना जाता है, भारत में सब्जियों की फसलों में से एक है और इस फसल की खेती इसकी हरी फली के लिए की जाती है। हरी मटर लेगुमिनेसी कुल से संबंधित है। यह प्रोटीन, विटामिन, खनिज और घुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत है। हरी मटर का उपयोग सब्जी पकाने, सूप, फ्रोजेन और डिब्बाबंद भोजन में भी किया जाता है।
  • भारत चीन के बाद हरी मटर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। मध्यप्रदेश भारत में हरी मटर के उत्पादन में द्वितीय स्थान पर है यहां इसकी खेती लगभग 1.0 लाख हेक्टर में की जाती है। प्रदेश में जबलपुर जिले में सर्वाधिक मटर का (2.20 लाख मेट्रिक टन) उत्पादन होता है। दुनिया भर में बिकने वाले मटर का लगभग 5 प्रतिशत ही ताजा उपयोग होता है बाकी या तो फ्रोजेन या सूखे हुए रूप मे विक्रय किए जाते हैं। फ्रोजन मटर सुविधाजनक और उपयोग में आसान है, बिना छिलके के इसे ताजा रूप में संग्रहीत किया जा सकता है और साथ ही वे ताजे मटर की तुलना में अधिक महंगे नहीं हैं।
  • ताजे मटर केवल जाड़े के मौसम में ही मिलते हैं लेकिन आमतौर पर पूरे वर्षभर इनकी मांग रहती है। अन्य मौसम में इस फसल का उत्पादन कुछ राज्यों तक ही सीमित है। मांग और आपूर्ति के बीच के इस अंतर को भारतीय बाजार में उपलब्ध फ्रोजन मटर द्वारा पूरा किया जा रहा है।
  • बढ़ते हुए शहरीकरण और आय में फ्रोजन मटर के विपणन की अपार संभावनाएं हैं। शहरी क्षेत्रों में डिपार्टमेंटल स्टोर, मॉल, सुपर मार्केट में पैक फ्रोजन मटर की अच्छी मांग रहती हैं। इसके साथ ही इसकी आपूर्ति के लिए प्रोसेसर होटल, कैटरर्स और रेस्तरां के साथ भी गठजोड़ कर सकते हैं।
  • चूंकि मध्य भारत में मटर की उपलब्धता केवल नवंबर से फरवरी के बीच में ही होती है, इसलिए फ्रोजेन तकनीक से मटर का प्रसंस्करण कर इसे वर्षभर बाजार में उपलब्ध करवाया जा सकता है।
  • निर्माण प्रक्रिया, निर्माण कार्यविधि: किसी भी अशुद्धता को हटाने के लिए छिली हुई मटर को धोया और सुखाया जाता है। इसके पश्चात ब्लांचिंग प्रक्रिया में मटर को कुछ मिनट के लिए गर्म पानी में उबाल कर ठंडे पानी से ठंडा किया जाता है। इसके पश्चात इसमे से अतिरिक्त पानी निकल जाता है। ब्लांचिंग के बाद हरी मटर के दानों की मानक अनुसार छटाई तथा निरीक्षण किया जाता है, जिससे अंतिम उत्पादों की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। फिर निर्जलित हरी मटर को ढ्ढक्तस्न के माध्यम से फ्रोजेन किया जाता है। फ्रोजेन हरी मटर पैकेजिंग मशीन द्वारा स्वचालित रूप से पैक की जाती है। पैकिंग के बाद उन्हें फ्रोजेन अवस्था में बनाए रखने के लिए -18 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कोल्ड चेंबर में भंडारित किया जा सकता है। ढ्ढक्तस्न के माध्यम से अन्य उत्पाद जैसे स्वीट कॉर्न, आलू फ्रेंच फ्राइस, आम, अमरूद, भिंडी, फूल गोभी, गाजर, मिक्स्ड वेजीटेबल आदि को भी फ्रोजेन किया जा सकता है। इसके अतरिक्त ब्लास्ट फ्रीजर के माध्यम से भी फ्रोजेन मटर को तैयार किया जा सकता है।
  • मशीनरी उपकरण: 120 टन/वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता वाले संयंत्र जिसकी लागत लगभग 40.0 लाख तक होती है की स्थापना के लिए निम्नलिखित मशीनरी की आवश्यकता होती है-
    फीडिंग कन्वेयर, ऑनलाइन वॉशर, मटर डिपोडिंग मशीन, ऑनलाइन ब्लैंचर, सॉर्टिंग/ मैनुअल इंस्पेक्शन कन्वेयर, लिफ्ट कन्वेयर, वाइब्रेटरी स्क्रीन कन्वेयर, ब्लास्ट फ्रीजर, मेटल डिटेक्टर, पैकेजिंग मशीन, कोल्ड चेंबर आदि। लीनियर आईक्यूएफ तकनीक के माध्यम से फ्रोजेन उत्पाद तैयार करने में संयंत्र की लागत अधिक आती है। इस तकनीक से तैयार उत्पाद हर दाने को फ्रीज किया जाता है एवं इसमे ढेले नहीं बनते हंै साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता अच्छी होने से इसकी मांग भी अधिक होती है।
  • उद्योग की स्थापना हेतु प्रभावी शासकीय योजनाओं जैसे खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना के माध्यम से प्रदेश में स्थापित मेगा फूड पार्क, फूड पार्क, भारत सरकार द्वारा स्वीकृत एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर में लघु, मध्यम एवं वृहद स्तर के उद्योग लगा सकते हंै। इस हेतु 35 प्रतिशत अधिकतम रु. 5.0 करोड़ अनुदान का प्रावधान है। हाल ही आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश भर सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों की स्थापना एवं उन्नयन हेतु शुरू की गयी प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना का भी लाभ लिया जा सकता है। यह योजना एक जिला एक उत्पाद की अवधारणा पर तैयार की गयी है इसके अंतर्गत मटर हेतु चयनित जिला जबलपुर में उद्योग स्थापित करने पर 35 प्रतिशत अधिकतम रु. 10 लाख अनुदान का प्रावधान है इसके अतिरिक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग एवं उद्योग विभाग के माध्यम से भी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योगों को स्थापित एवं उन्नयन किया जा सकता है। इसके अंतर्गत 25 प्रतिशत अधिकतम रु. 250.0 लाख अनुदान का प्रावधान है।
Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.