जैविक खेती की जागृति लाने वाले पद्मश्री हुकमचंद पाटीदार

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6 अप्रैल 2022, इंदौर । जैविक खेती की जागृति लाने वाले पद्मश्री हुकमचंद पाटीदार – परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, यदि व्यक्ति दृढ निश्चय कर ले ,तो सफलता अवश्य मिलती है। इसे सिद्ध किया है , राजस्थान के झालावाड़ जिले के मानपुरा गांव के प्रगतिशील किसान श्री हुकम चंद पाटीदार ने। जैविक खेती के प्रति जागृति लाने के इनके निरंतर प्रयासों से अब 500 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक खेती होने लगी है। जैविक खेती के प्रति इनके प्रयासों को देखकर  वर्ष 2019 में इन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया ,वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जैविक खेती का पाठ्यक्रम तैयार करने वाली समिति में इन्हें सदस्य बनाया गया है। इनके जैविक उत्पादों की भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत मांग है।

जैविक खेती का जूनून  – उल्लेखनीय है कि श्री पाटीदार ने 2003 में झालावाड़ जिले के अपने गांव मानपुरा के खेत में एक हैक्टेयर से जैविक खेती की शुरुआत की थी। पहले साल के नतीजे निराशाजनक रहे। जहाँ पहले एक हेक्टेयर में 40 क्विंटल गेहूं उत्पादित होता था , वह घटकर 22  क्विंटल रह गया।  लोगों ने उपहास भी किया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने यह सोच लिया था कि कुछ भी हो रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों  का उपयोग नहीं करेंगे और रासायनिक खेती के कारण ज़मीन में कम हो रहे कार्बन के स्तर को बढ़ाएंगे। रबी-खरीफ में जैविक खेती ही करने लगे और धीरे -धीरे उत्पादन बढ़ने लगा। बाज़ार में अच्छे दाम भी मिलने लगे तो अन्य किसानों का भी ध्यान आकृष्ट हुआ। दूसरे किसानों में भी जागरुकता आई।श्री पाटीदार ने जैविक तरीके  से धनिया, मेथी, लहसुन और गेहूं की पैदावार में सफलता हासिल की। इन्होंने अपने स्वामी विवेकानंद जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र (कृषि फार्म) को जैविक प्रमाणीकरण संस्था से पंजीकृत कराया। अपने खेत पर ही हरी खाद, गोबर खाद, जीवामृत, पंचगव्य रसायन सहित अन्य जैविक दवाइयां तैयार की। वर्मी कम्पोस्ट इकाई लगाई। यहां तैयार होने वाले 16 हज़ार किलो जैविक खाद में से 4 हज़ार किलो खाद किसानों को दी जाती है। इस केंद्र में 28 देशों के लोग अनुसन्धान के लिए आ चुके हैं। 16 राज्यों में ऐसे ही जैविक कृषि फार्म तैयार हो चुके हैं। यहां न केवल राष्ट्रीय स्तर का जैविक खेती का प्रशिक्षण भी हो चुका है,बल्कि  यहां राजस्थान का पहला जैविक खेती एक्सीलेंस सेंटर भी खुल चुका है। इनके प्रयासों से अब 500 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक खेती हो रही है।

जैविक खेती पाठ्यक्रम समिति के सदस्य नियुक्त  – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद , नई दिल्ली द्वारा देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जैविक खेती का पाठ्यक्रम तैयार करने वाली समिति में श्री हुकम चंद पाटीदार को भी शामिल किया गया है। उनके अलावा 14 अन्य लोग  इस समिति  के सदस्य हैं। यह समिति  जैविक खेती का पाठ्यक्रम विकसित करने पर जल्द ही अपनी रिपोर्ट  प्रकाशित करेगी। अब तक कृषि विश्वविद्यालयों में उद्यानिकी और वानिकी के अलग से पाठ्यक्रम थे ,लेकिन जैविक खेती से संबंधित कोई पाठ्यक्रम शामिल नहीं था। अब जैविक खेती का भी अलग से पाठ्यक्रम शामिल होगा।

जैविक उत्पादों की विदेशों में मांग -श्री पाटीदार के  जैविक उत्पादों की विदेशों में भी मांग है। आस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, जर्मनी, फ्रांस और कोरिया तक यहां से जैविक उत्पाद भेजे जा रहे हैं। इन देशों में काफी अच्छी कीमत मिलती है। साथ ही देश के मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों में भी जैविक उत्पादों की काफी अच्छी मांग रहती है। यहां पर तैयार हुए मसाले को  जापान, जर्मन और  स्वीट्जरलैंड तक पहुंचाया जाता है । जैविक खेती के उत्पादों की कीमत भी बाजार में अधिक मिलती है। जैविक खेती को बढ़ावा देने पर श्री हुकम चंद पाटीदार को  26 जनवरी 2019 को भारत के राष्ट्रपति के द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

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